The Rig Veda (ऋग्वेद) is the oldest of the four Vedas and one of the most ancient religious texts in the world. Composed in Vedic Sanskrit by the Rishis (sages) of ancient India, it is a collection of 1,028 hymns (Suktas) organized into 10 books called Mandalas. These hymns are addressed to various deities — Agni (fire), Indra (king of gods), Soma (sacred plant), Varuna (cosmic order), Surya (sun), and many others.

Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం
stroms  Srimad Bhagavad Gita  Valmiki Ramayanam/Valmiki Ramayanam

Rig Veda - ऋग्वेद


Mandalas 1 - (2006 verses)


Mandala 1 · Verse 1
eṣa pra pūrvīr ava tasya camriṣo 'tyo na yoṣām ud ayaṁsta bhurvaṇiḥ | dakṣam mahe pāyayate hiraṇyayaṁ ratham āvṛtyā hariyogam ṛbhvasam

O Agni, most glorious and eternal, who removes the decay of devotees, the sacrificer serves you like a messenger.

एवं तुभ्दारा यजः परमं यशस्वी होता है, हे जरारहित एवं भक्कों की जरा का निवारण करने वाले अग्नि! यजमान दूतों के समान तुम्हारी सेवा करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तं यजसाधमपि वातयामस्यस्य पथ नम्सा हविष्मता देवताता हविष्मता. स न ऊर्मिमुपाभृत्यया कृपा न जुर्यति. यं मात्रिश्वा मनवे परावतो देवं भाः परावतः.. (२)

The divine light, worshipped with offerings, guides us on the path of righteousness, bestowing grace and strength. It is the radiant deity, dwelling afar, whom Manu invoked for his well-being.

हमारा स्तोत्र यज् और घृत से युक्त तथा नम्रतासंपन्न है। हम इस स्तोत्र द्वारा अग्नि की तब तक सेवा करते हैं, जब तक वे संतुष्ट न हो जावें। अग्नि हव्यसंपन्न देवयज्ञ को पूर्ण करने में सहायता करते हैं, हमारे हव्य को स्वीकार करने से अग्नि का नाश नहीं होगा, जिस प्रकार मातारिक्षा मनु के निमित्त अग्नि को दूर से लाएं और उसे जलाया, उसी प्रकार अग्नि दूर देश से हमारे यज् में आवें। (२)


Mandala 1 · Verse 3
एवेन सहः पर्यग्निं पार्थिवं मुहुर्गी रतो वृषभः कनिकक्रदद्धृतः कनिकक्रदत्, शतं यक्ष्णो अक्षभिर्देवो वनेषु तुर्विः। सदो दधान उपरेषु सानुष्वाग्निः परेषु सानुष्.. (३)

The powerful, roaring bull, the divine Agni, is sustained by a hundred supports, swift in the forests. He holds firm in the high places, the divine Agni in the furthest reaches.

अग्नि की सदा स्तुति की जाती है. वे अन्नयुक्त, कामवर्षी, सामर्थ्यशाली एवं शब्द करने वाले हैं. वे हमारे आह्वान के तुरंत बाद ही वेदी के चारों ओर चलने लगते हैं. वे ग्रहण करने योग्य स्तोत्रों के कारण अपनी ज्वालाओं द्वारा यजमान के कार्य को सौगुणा प्रकाशित करते हैं. उच्चस्थान प्राप्त अग्नि यज् को सदा घेरे रहते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
स सुकृतुः पुरोहितो दमेद्मेऽग्निर्यज्ञस्य च्छरस्य चेतति कृत्वा यज्ञस्य चेतति। कृत्वा वेधा इष्यते विश्वा जातानि पस्पशे। यतो घृतश्रीरतिथिरजायत वह्निर्वधा अजयत.. (४)

The wise priest, dwelling in the home, ignites the sacrificial fire, and through this act, the essence of the sacrifice is realized. By performing this ritual, all beings are nourished and sustained, and the divine radiance of the guest, the fire, is born.

शोभनकर्मा एवं यज्निपादक अग्नि प्रत्येक यजमान के घर में नाशरहित यज् को जानते हैं एवं विविध कर्मों के फलतां बनकर यजमान को अन्न देने की इच्छा करते हैं. अग्नि घृतसेवी अतिथि के रूप में उत्पन्न होने के कारण संपूर्ण हव्य को स्वीकार करते हैं. अग्नि के प्रज्वलित होने पर यजमान को बहुत से फल मिलते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
कृत्वा यदस्य तविबीषु पृच्छतेऽग्नेरेवेण मरुतां न भ yoj्येभिराय न भ yoj्या। स हि ष्मा दानमिन्वति वसूनां च मज्जना। स नस्त्रास्तेऽसुरितादभिभुतः शंसादघादभिभुतः.. (५)

He who, having performed his duty, asks the Agni (fire god) for the wealth of the Maruts, and is not bound by their offerings, he indeed attains the wealth of the Vasus. He protects us from the demoniac, and from being overwhelmed, he speaks of our sins.

वायु द्वारा मेघों से वर्षा किए जाने पर जिस प्रकार सभी अन्न समान रूप से पकते हैं अथवा याचक को जिस प्रकार सभी भक्षणीय द्रव्य दिए जाते हैं, उसी प्रकार यजमान अग्नि को तृप्त करने के लिए उसकी ज्वालाओं में पुरोडाश आदि द्रव्य मिलाते हैं. यजमान अपने धन के अनुसार हव्य देता है. अग्नि हमें दुःख एवं हिंसक पाप से बचावें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
विश्वो विहायोऽरतिर्युर्युधै हस्ते दक्षिणे तरणिं शिश्नश्वच्छ्वस्यया न शिश्नथत्, विश्वस्मा इदिष्यते देवत्रा हव्यमोहिषे। विश्वस्मा इत्सुकृते वारंणवत्याग्निद्रां व्यृण्वति.. (६)

The universe, with its vast expanse, is the offering presented to the divine. The fire god, Agni, is invoked with oblations, and the wise, through their actions, illuminate the path for all.

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्र याहुं नः परावतो नायमच्छा विदथानीव सत्वतिरस्तं राजेव सत्वतिः। हवामहे त्वां वयं प्रयस्वन्तः सुतेसचा।। पुत्रासो न पितरं वाजासातये महिष्ठं वाजासातये.. (१)

We invoke you, Indra, from afar, O powerful one, like a king, for the sake of sustenance and strength. We call upon you, our father, for victory in battles and for abundant nourishment.

हे इंद्र! यज्ञशाला में ऋत्विजों के पालक यजमान के समान, अस्ताचल को जाने वाले नक्षत्रेश चंद्र के समान एवं सम्मुख उपस्थित सोम के समान स्वर्ग से हमारे समीप आओ. जिस प्रकार पुत्र अन्न भक्षण के लिए पिता को बुलाते हैं, उसी प्रकार हम भी सोमरस निचोड़ जाने पर तुम्हें बुलाते हैं. हम ऋत्विजों के साथ महान् इंद्र को हव्य स्वीकार करने के लिए बुलाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
पिबा सोममिन्द्र सुवानमद्रिभिः कोशन सिक्तमवन्तं न वंसगस्तात्ृषाणो न वंसगः। मदाय हर्यताय ते तुविष्ठमाय धायसे।। आ त्वा यच्छन्तु हरितो न सूर्यमहाँ विश्वे सूर्यम्.. (२)

Drink the Soma pressed by stones, O Indra, which is offered, not withheld by any obstacle. May the steeds, swift as the sun, carry you to this exhilarating draught for your mighty enjoyment.

हे शोभन गति संपन्न इंद्र! जिस प्रकार प्यासा बैल जल पीता है, उसी प्रकार तुम तृप्ति, पराक्रम, महत्व एवं आनंद के लिए पत्थार द्वारा पीसकर निचोड़े गए एवं जल द्वारा शोधित सोमरस को पियो. हरि नाम के घोड़े जिस प्रकार सूर्य को बुलाते हैं, उसी प्रकार तुम्हारे घोड़े तुम्हें सोमरस पीने के लिए लावें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अविन्ददिन्द्रो निहितं गुहा निधिं वेनं गर्भं परवीतमश्मन्यन्तं अन्तरश्मनि। व्रजं वज्री गवामिव सिषासन्नश्रृंस्तस्तमः।। अपावृतोदिष इन्द्रः परीवृता द्वार इषः परीवृताः.. (३)

Indra, the thunderbolt-wielder, found the hidden treasure, the embryo enveloped in stone, and like a herdsman, broke open the darkness. He opened the doors of abundance, which were previously closed.

जिस प्रकार कबूतरी दुर्गम स्थान में अपने बच्चों को रखकर उस अपरिचित स्थान को खोज लेती है, वैसे ही इंद्र ने अत्यंत गुप्त स्थान में रखा हुआ तथा पत्थरों के ढेर से घिरा हुआ सोम स्वर्ग में प्राप्त किया. पणियों ने गायों को गोशाला में बंद कर दिया था. अंगिराओं में श्रेष्ठ

Mandala 1 · Verse 4
दादृहाणो वज्रमिन्द्रो गभस्त्योः क्षेदीय तिग्ममसनं सं श्यदहिहृत्यं सं श्यत्. संविच्यान् ओजसा शवोभिरिन्द्र मञ्जना. तस्येव वृक्षां वनिनो नि वृक्षसि परश्वेव नि वृक्षसि.. (४)

Indra, wielding the thunderbolt in his hands, strikes with sharp, irresistible force, shattering the serpent. With his might and strength, Indra is the source of joy. He fells the trees of the forest as if with an axe.

इन्द्र अपने हाथों में वज्र को दृढ़ता से धारण किए हैं. वज्र तेज है, जैसे मंत्रों की सहायता से जल को प्रभावाशाली बनाया जाता है, उसी प्रकार शत्रु पर चलाने के लिए वज्र को और भी तेज किया जाता है. हे इन्द्र! जैसे बढ़ई कुल्हाड़ी से वन के वृक्षों को काटता है, उसी प्रकार तुम अपने तेज, शरीर, बल एवं शक्ति से बुद्धि प्राप्त करके हमारे शत्रुओं को छिन्न करते हो. (४)


Mandala 1 · Verse 5
त्वं वृथा नह इन्द्र सर्ववेऽच्छा समुद्रमृजो र्थां इव वाजयतो र्थां इव. इत ऊतीरयुञ्जत समानमर्थमक्षितम्. धेनुरिव मनवे विश्वदोहसो जनाय विश्वदोहसः.. (५)

You are not in vain, Indra, all-knowing, like swift chariots rushing to the ocean. They have harnessed powers, seeking the same unceasing goal, like a cow yielding all for man, for all people.

हे इन्द्र! जिस प्रकार तुमने हमारे यज्ञ में आने के लिए रथ को बनाया है अथवा योद्धा संग्राम में जाने को रथ बनाता है. उसी प्रकार तुमने समुद्र तक पहुँचने के साधन के रूप में नदियों का निर्माण किया है. जिस प्रकार मनु के लिए अथवा किसी समर्थ पुरुष के लिए गाएँ स्वार्थ देने वाली हैं, उसी प्रकार हमारी ओर बहने वाली नदियाँ एक ही उद्देश्य से जल का संग्रह करती हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
इमां ते वाचँ वसुयन्त आयवो रं न धीरः स्वपा अतक्षिक्षुः सुम्नाय त्वामतक्षिक्षुः. शुम्भन्तो णेन्यं यथा वाजेषु विप्र वाजिनम्. अत्येमिव शवसे सातये धेना विश्वा धेनानि सातये.. (६)

These words, like a skilled craftsman, have been fashioned for you, O wise one, to bring you prosperity and joy. They are meant to strengthen you, enabling you to conquer all obstacles and attain your desires.

हे इन्द्र! जिस प्रकार शोभन कर्म वाले धीर मनुष्य रथ का निर्माण करते हैं, उसी प्रकार हम यजमानों ने धन प्राप्ति की इच्छा से तुम्हारी स्तुति बनाई है एवं अपनी सुख प्राप्ति के लिए तुम्हें प्रसन्न कर लिया है. जिस प्रकार योद्धा विजयी की प्रशंसा करते हैं, उसी प्रकार हे मेधासंपन्न इन्द्र! तुम्हारी प्रशंसा की जा रही है, जैसे युद्ध के समय जयशील अश्व प्रशंसित होता है, उसी प्रकार बल, धन की रक्षा एवं समस्त कल्याण पाने के लिए तुम्हारी प्रशंसा हो रही है. (६)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्राय हि घोरसुरो अनमन्तेन्द्राय मही पृथिवी वरीमभिरभ्मुन्साता वरीमभिः. इन्द्रं विश्वे सजोषसो देवासो दधिरं पुरः. इन्द्राय विश्वं सवनानि मानुषा रातानि सन्तु मानुषा.. (१)

May all human offerings and sacrifices be made to Indra, the mighty one, for whom the earth bows down with reverence. All the gods, united in purpose, have placed Indra at their forefront.

विस्तृत आकाश इन्द्र के सामने झुक गया है एवं महती पृथ्वी वरणीय स्तोत्रों द्वारा नत हुई है. उत्तम हवि लिए हुए यजमान भी अन्न एवं यश पाने के लिए इन्द्र के सामने नत हैं. समस्त देवों ने प्रसन्न मन से तुम्हें अपने आगे रखा है. इन्द्र के सुख के लिए ही लोग सारे यज्ञ और दान करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
विश्वेषु हि त्वा सवनेषु तुञ्जते समानमेकं वृष्मण्यवः पृथक् स्वः सनिष्यवः पृथक् । तं त्वा नावं न पर्णणि शृष्यस्य धुरि धीमहि । इन्द्रं न यजंश्चिन्तयन्त आयवः स्तोमीभिरिन्द्रमायवः.. (२)

We praise you, Indra, the mighty one, who is honored in all sacrifices, as we seek your favor and strength. Like a boat carried by leaves, we place our hopes in you, the giver of all, as we sing your praises.

हे इंद्र! यजमान मनचाही वर्षा की इच्छा से प्रत्येक यज्ञ में एकमात्र तुम्हें ही हवि आदि प्रदान करते हैं. तुम सबके लिए एकरूप हो एवं स्वर्ण पाने के लिए तुम्हें ही द्रव्य दिया जाता है. जिस प्रकार नदी पार जाने के लिए समर्थ नाव का सहारा लिया जाता है, उसी प्रकार हम विजय की अभिलाषा से तुम्हें अपनी सेना के आगे रखते हैं. यजमान यशों एवं स्तुतियों द्वारा ईश्वर के समान इंद्र की ही चिंता करते हैं. (२)


Mandala 1 · Verse 3
वि त्वा ततसे मिधुना अवस्यवो व्रजस्य साता गव्यस्य नि:सुज: सक्षन्न् इन्द्र नि:सुजः। यादवन्त्या द्दा जना स्वर्यन्ता समूहिसे. आविष्क्रिक्रिदृषणं सचाभुवं वज्रमिन्द्रं सचाभुवम्.. (३)

O Indra, you who are the protector and sustainer, you have spread forth your might for the sake of the cows and the cattle. You are the one who brings forth abundance, and with your strength, you gather all beings towards the heavens. You are the thunderbolt-wielding Indra, ever present and ever victorious.

हे इंद्र! तुम्हारे भक्त और पापरहित यजमान पत्नियों को साथ में लेकर तुम्हें तृप्त करने की इच्छा से अधिक मात्रा में द्रव्य देते हुए यज्ञ करते हैं. गायों के चाहने वाले एवं स्वर्ग जाने के इच्छुक वे बहुत सी गायों को पाने के लिए तुम्हारे उद्देश्य से यज्ञ करते हैं. तुमने अपने साथ उत्पन्न हुए इच्छानुकूल एवं साथ रहने वाले वज्र को बनाया है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
विदुष्टे अस्य वीर्यस्य पूरवः पुरो यदिन्द्र शार्दीरवातिरः सासाहनोऽवातिरः। शासस्तमिन्द्रं मत्यमप्युं शंवरस्पते. महीममुष्णाः पृथिवीमिमा अपो मन्दसान इमा अपः.. (४)

O Indra, lord of Shambara, you have the strength to conquer all, even mortals. You have brought forth the earth, the waters, and the heavens, filling them with joy.

हे इंद्र! जो यजमान तुम्हारी महिमा जानते हैं, वे तुम्हारे ही उद्देश्य से यज्ञ करते हैं. तुमने वर्ष भर खाई से सुरक्षित शत्रु नगरों को नष्ट करके उन्हें पीड़ित किया था. हे सेना के पालक इंद्र! तुमने यज्ञविनाशक मरणधर्मा को वश में किया था एवं उसके अधीन रहने वाली विशाल धरती एवं महान् सागर को बलपूर्वक छीन लिया था. तुमने उसके अन्न ले लिए थे. (४)

Mandala 1 · Verse 5
आदिते अस्य वीर्यस्य चक्रिर्मदेषु वृष्नुशिजो यदाविव सखीयतो यदाविव. चक्रर्थ कारमेभ्यः पूतनासु प्रवन्तवे. ते अन्याभ्यां न्यं सनिष्णात श्रवस्यन्तः सनिष्णात.. (५)

The mighty ones, born of Aditi, have established their strength and glory, like friends united. They have created a path for the nourishment of all beings, and through their divine power, they bestow abundant fame and sustenance.

Mandala 1 · Verse 6
उतो नो अस्या उषसो जुषेत ह्य्श्कस्य बोधि हविष्ो हवीमभिः स्वर्षता हवीमभिः। यदिन्द्र हन्तवे मृधो वृषा वज्रिञ्चि केतसि। आ मे अस्य वेधसो नवीयसो मन्म श्रुधि नवीयसः.. (६)

O Indra, may this dawn please us; awaken to our offerings, to our shining oblations. If you, the strong one, with your thunderbolt, strike down the wicked, then hear my newest praise, my newest song.

क्या इंद्र हमारे प्रातःकालीन यज्ञों में सम्मिलित होंगे? हे इंद्र! हवि देने के लिए स्वर्ग प्रदाता यज्ञों में हमारे द्वारा बुलाए जाने पर आओ और हवि स्वीकार करो. हे वज्रधारी! हिंसक शत्रुओं के नाश के लिए हमारे इच्छापूरक बनकर आओ एवं मुझ मेघावी, नवीन एवं असाधारण स्तुति वाले के उत्तम स्तोत्र सुनो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्वं तमिन्द्र वावृधानो असमयिमित्रयन्तं तुविजातं मर्त्यं वज्रेण शूर मर्त्यम्। जहि यो नो अधाययति शृणुष्व सुश्रवस्तमः। रिचं न यामन्भुत दुर्मतिविंशाप भृत दुर्मतिः.. (७)

O Indra, mighty and ever-growing, strike down the mortal enemy who opposes us with your thunderbolt. Hear our plea, O renowned one, and destroy the wicked, who brings misfortune.

हे इंद्र! तुम शूर, अनेक गुण युक्त एवं हमारी स्तुति के कारण उन्नत हो. तुम हमें चाहते हो. जो लोग हमारे प्रति शत्रुता रखते एवं हमें दुःख देते हैं, अपने वज्र द्वारा तुम उनका विनाश करो. हे सुंदर कानों वाले! हमारी बात सुनो. जिस प्रकार मार्ग में थके हुए पथिक को चोर बाधा पहुंचाते हैं, उसी प्रकार के दुष्टबुद्धि हिंसक तुम्हारी कृपा से हमारे समीप न रहें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
त्वया वयं मघवन्पूज्यं धन इन्द्रत्वोताः सासह्याम पृत्त्यन्तो वणुयाम वणुषत:। नेदिष्ठे अस्मिन्नह्य्धि वोचा नु सुन्वते। अस्मिन्ज्जे वि चयेमा भरे कृतं वाजयन्तो भरे कृतम्.. (८)

O Indra, by your might, we are protected and victorious in battle, and we shall overcome those who oppose us. Grant us strength and prosperity in this life.

Mandala 1 · Verse 9
bhavā varūthaṁ gṛṇate vibhāvo bhavā maghavan maghavadbhyaḥ śarma | uruṣyāgne aṁhaso gṛṇantam prātar makṣū dhiyāvasur jagamyāt

O Indra, Lord of Bliss, if you protect us, we shall conquer even armies of foes. We will strike down those enemies eager to kill us. Tell the sacrificer, rich in the aforementioned wealth and present at this nearby sacrifice, repeatedly: "For your victory in battles, we bring offerings of food."

हे सुखस्वामी इंद्र! यदि तुम हमारी रक्षा करोगे तो हम प्रबल सेना वाले शत्रुओं को भी हरा देंगे. जो शत्रु हमें मारने के लिए तत्पर होंगे, उन पर हम प्रहार करेंगे. पूर्वोक्त धनों से युक्त इस निकटवर्ती यज्ञ में हवि देने वाले यजमान से बार-बार कहो, युद्धों में विजय पाने वाले तुम्हारे उद्देश्य से हम हवि रूप अन्न लाते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 1
उभे रोदसी ऋतेन दुहो दहामि सं महीरनिन्द्राः। अभिvelocityX यत्र हता अमित्रा वैलस्थाने परि तूळ्हा अशेरन्.. (१)

I shall milk both heaven and earth with truth, and the great, sleepless ones shall yield. I shall conquer where enemies, struck down, lie defeated and scattered.

हे इंद्र! मैं यज्ञ द्वारा धरती और आकाश दोनों को पवित्र करता हूँ एवं इंद्रद्रोहियों को आश्रय देने वाली धरती को भली-भाँति जानता हूँ. एकत्र हुए शत्रु हमें जहाँ भी मिले, वहीं मारे गए. मरे हुए वे श्मशानभूमि में इधर-उधर पड़े हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अभिvelocityX चिदद्रिवः शीर्षा यातुमतीनाम्। छिन्धि वट्रिणा पदा महावट्रिणा पदा.. (२)

Strike down the heads of the flowing waters with the thunderbolt, with the great thunderbolt.

हे वैरीभक्षणकर्ता इंद्र! शत्रुओं की सेना का सिर अपने विस्तृत पैरों से कुचल दो. (२)


Mandala 1 · Verse 3
अवासां मघवन्जहि शर्धो यातुमतीनाम्. वैलस्थानके अर्मके महावैलस्थे अर्मके.. (३)

O powerful Indra, destroy the strength of the demonesses. Strike down the wicked ones, the powerful and wicked ones.

हे धनस्वामी इंद्र! इन आयुधसंपन्न सेनाओं की शक्ति नष्ट करके इन्हें निंदनीय श्मशान में फेंक दो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यासां तिस्रः पञ्चाशतोऽभिलङ्घैरपावपः. तत्सु ते मनायति तक्तसु ते मनायति.. (४)

She who has crossed fifty obstacles, her mind finds peace in what is given and in what is taken away.

हे इंद्र! तुमने एक सौ पचास शत्रु सेनाओं का विनाश किया. लोग इस काम को बड़ा कहते हैं, पर तुम्हारे लिए यह छोटा है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पिषङ्ङ्भष्मभ्मणं पिशाचिमित्रं सं मृण. सर्वं रक्षां नि बहय.. (५)

O Lord, destroy the wicked, the enemies of the gods, and banish all evil.

हे इंद्र! पीले रंग वाले, भयंकर शब्द करने वाले पिशाचों का नाश करो एवं संपूर्ण राक्षसों को समाप्त करो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अवर्मह इन्द्र दादहि श्रुधीं नः शुशोच हि द्यौः क्षां न भीषां अद्रिवो घृणां भीषां अद्रिवः। शुष्मिन्मो हि शुष्मिभधैरुग्रभरीरये। अपुरुषषो अप्रतीत् शूरं सत्त्वभिरिस्तप्तः शूरं सत्त्वभिः.. (६)

O Indra, hear our plea, for the heavens are ablaze with grief. Grant us strength, O mighty one, to overcome this fierce trial.

Mandala 1 · Verse 7
वनोति हि सुन्वन्क्षयं परीणसः सुन्वानो हिष्मा यजत्त्वं द्विषो देवानाम् इषः । सुन्वान् इत्सिभ्रासति सहसा वाज्युवृतः । सुन्वानायेन्द्रो ददात्याभुव रयिं ददात्याभुवम्.. (७)

The one who performs sacrifices and offers oblations to the gods receives strength and prosperity. Indra, the king of gods, bestows abundant wealth and sustenance upon the worshipper.

हे इंद्र! सोम रस निचोड़ने वाला यजमान उत्तम घर पाता है. सोमयज्ञकर्ता चारों ओर घिरे हुए शत्रुओं को समाप्त करके देवों के विरोधियों को भी नष्ट करता है. वह अन्न का स्वामी बनता है. उस पर कोई शत्रु आक्रमण नहीं करता, वह असीमित संपत्ति प्राप्त करता है. जो व्यक्ति इंद्र के निमित्त सोमयज्ञ करता है, उसे इंद्र चारों ओर अवस्थित एवं अति समृद्ध धन देते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 1
आ त्वा जुवो रारहाणा अभि प्रयो वायो वहन्त्वहं पूर्वपीतये सोमस्य पूर्वपीतये । ऊर्ध्वा ते अनु सुनृता मनस् तिष्ठतु जानती । नियुत्वता रथैना याहि दावने वायो मखस्य दावने.. (१)

O Vayu, may the singers, praising you, bring you to our offerings. I come for the first taste of Soma, for the first taste of Soma. May your mind, knowing and attentive, be established in our hymns. Come with your chariot, O Vayu, to bestow gifts, to bestow gifts upon the sacrifice.

हे वायु! तुम्हें शीघ्रगामी एवं शक्तिशाली अश्व सबसे प्रथम सोमपान के लिए यज्ञ में ले आवें. तुम पहले के समान सोमपान करते हो. तुम्हारे मन के अनुकूल एवं सच्ची हमारी स्तुति तुम्हारे गुणों का वर्णन करती है, वह तुम्हें सदा प्रसन्न करती रहे. यज्ञ में दिए हुए द्रव्य को स्वीकारने एवं हमें वांछित फल देने के हेतु रथ से शीघ्र आओ. तुम्हारे रथ में नियुक्त नामक घोड़े जुते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
मन्दन्तु त्वा मन्दिно वायुविन्दोऽस् म्त्क्राणोपासः सुकृता अभिधवो गोभिः क्राणा अभिधवः । यद् क्राणा इर्ध्यं दक्षं सञ्चन्त ऊत्यः । सझीचीना नियुतो दावने धिय उप ब्रुवत् ई धियः.. (२)

May the winds, the swift ones, and the divine powers, aided by righteous deeds, bring you prosperity. May the divine powers, with their strength and protection, bestow upon you abundant blessings and inspiration.

हे वायु! यज्ञभूमि में पहुँचने के लिए तुम्हें नियुक्त नामक अश्व मिले हैं. वे अपने कार्य में कुशल, तुमसे अनुराग करने वाले, सर्वदा तुम्हारे साथ रहने वाले हैं एवं तुम्हारी रुचि देखकर चलते हैं. हर्ष उत्पन्न करने वाले, मादक, भली प्रकार रखे गए, उज्ज्वल और मंत्र द्वारा आहूत सोम रस की बूंदें तुम्हें मुदित करें. बुद्धि संपन्न यजमान तुम्हारे पास जाकर स्तुति करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वायुर्युङ्क्ते रोहिता वा yururūṇā वायु रथे अजिरा धुरि वोळ्हवे वहिष्ठा धुरि वोळ्हवे. प्र बोधया पुर्न्थिं जार आ सस्तीयिम्. प्र चक्षय रोदसी वासोयोषसः श्रवसे वासोयोषसः.. (३)

The wind yokes the swift, red horses to the chariot, the strongest to bear the yoke. Awaken the sleeping, the beloved. Shine forth, O Dawn, for glory.

Mandala 1 · Verse 4
आ वां स्थो नियुत्वान्क्षदवसेऽभि प्रयांसि सुवितानि वीतये वायो हव्यानि वीतये. पिबतं मध्वो अन्धसः पूर्वपेयं हि वां हितम्. वायवा चन्द्रेण राधसा गतमिन्र्द्र राधसा गत्म्.. (४)

O Vayu and Indra, come to accept our offerings and enjoy the sweet libations, for you are the first to partake of this divine nectar.

हे वायु! नियुत नामक घोड़ों से युक्त रथ तुम्हारे साथ-साथ इंद्र को भी हमारी रक्षा, हमारे द्वारा गृहीत अन्न के भक्षण एवं अन्य हव्यों को स्वीकारने के लिए यज में लावें. तुम दोनों का मधुर सोम-रस पियो. अन्य देवों से पहले तुम्हारा सोमपान करना उचित है. तुम और इंद्र हमें प्रसन्न करने वाला धन लेकर आओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
आ वां धियो वृत्पुरुधं उपेमिमंन्द्ं मर्मजन्त वाजिनमाशुमत्त्यं न वाजिनम्. तेषां पिबतमस्मयु आ नो गन्तमितोत्या. इन्द्रवायु सुतानामद्रिभिरुवं मदाय वाजदा युयम्.. (५)

O Indra and Vayu, drinkers of soma, come to us, who desire you, with your swift steeds, to enjoy the pressed libations, and bestow upon us strength and sustenance.

हे इंद्र और वायु! हमारे स्तोत्र तुम्हें यज में आने की प्रेरणा दें. जिस प्रकार तेज चलने वाले घोड़े की मालिश की जाती है, उसी प्रकार घर से कलश में रखकर यजभूमि में लाए गए सोम को ऋत्विज् रगड़ते हैं. तुम उनका सोम-रस पियो और हमारे यज की रक्षा के लिए पधारो. तुम दोनों अन्न देने वाले हो, इसलिए अपनी तृप्ति के लिए पत्थरों द्वारा पीसे गए सोम को पियो. (५)


Mandala 1 · Verse 1
asmā id u pra tavase turāya prayo na harmi stomam māhināya | ṛcīṣamāyādhrigava oham indrāya brahmāṇi rātatamā

O priests, begin a praiseworthy and great hymn directed at the eternal friends Mitra and Varuna, and resolve to offer them oblations. They bestow happiness upon the sacrificers and, having consumed the delicious offerings, are well-adorned. For them, ghee is collected, and they are praised in every sacrifice. Their strength is insurmountable, and there is no doubt of their divinity.

हे ऋत्विजो! नित्य रहने वाले मित्र और वरुण को लक्ष्य करके प्रशंसनीय एवं महान् स्तोत्र को आरम्भ करो एवं उन्हें द्रव्य देने का निश्चय कर लो. वे यजमानों को सुख देते हैं एवं स्वादिष्ठ हवि का भक्षण करके भली-भाँति सुशोभित होते हैं. उन्हीं के लिए घी एकत्र किया जाता है एवं प्रत्येक यज में उनकी स्तुति की जाती है. उनका बल अलंधनीय है एवं उनके देव होने में किसी को संदेह नहीं है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अदर्शो गातुरवे वरीयसी पन्था ऋतस्य समर्यस्तं रश्मिभिश्वभर्गस्य रश्मिभिः। घृक्षं मित्रस्य सादनमर्यम्णो वरुणस्य च॥ अथा दधाते बृहदुक्थं वय उपस्तृत्वं बृहद्रयः.. (२)

The path of Truth, ever-expanding and supreme, is illuminated by the rays of divine splendor, the dwelling place of Mitra, Aryaman, and Varuna. Then, the wise ones, with great praise and abundant wealth, establish the great hymn.

सब लोगों ने देखा है कि महती उष विस्तृत यज की ओर जाती है, गतिशील सूर्य का मार्ग आकाश प्रकाश से भर गया एवं सूर्यकिरणों से सभी को आँखें मिलीं. मित्र, अर्यमा और वरुण का आकाशस्वरूप घर उज्ज्वल प्रकाश से पूर्ण हो गया. हे मित्र एवं वरुण! तुम दोनों स्तुतियोग्य अन्न को अधिक मात्रा में धारण करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
ज्योतिष्मतीमदतिं धारयक्षतिं स्वर्त्तिमं सचेते दिवेदिचे जागुवांसा दिवेदिचे. ज्योतिष्मत्क्ष्माशाते आदित्या दातुनस्पतिं. मित्रस्तयोर्वरुणो याTuyajjanodaiyma Yatayjjan:.. (३)

The radiant, all-pervading light of the Sun, the sustainer of all, shines eternally, awakening all beings. The Sun, the lord of all, bestows blessings, and through righteous actions, we attain union with the divine.

यजमान ने अग्नि के तेज से युक्त, समस्त लक्षणों तथा स्वर्ग प्रदान करने वाली यजवेदी अपने आप बनाई है. तुम दोनों एकत्र होकर प्रतिदिन सावधान रहो एवं प्रतिदिन यजवेदी पर आकर तेज और बल प्राप्त करो. तुम अदिति के पुत्र एवं समस्त देवों के पालक हो. मित्र, वरुण और अर्यमा लोगों को अपने-अपने काम में लगाते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अयं मित्राय वरुणाय शान्तमः सोमो भूत्वपानेष्वाभगो देवो देवैष्वाभगः। तं देवा सो जुषेरत विश्वे अहा सजोषणः तथा राजानो करथो यदीमहं ऋतावाना यदीमहे.. (४)

May this Soma, the most peaceful, become a share for friends and for Varuna in drinking, and a share for the divine among the gods. May the gods, in unison, delight in it. Thus, may kings act, if we, the truthful ones, indeed desire it.

नीचे की ओर मुंह करके पीने वाले मित्र और वरुण के लिए सोमपान प्रसन्नता प्रदान करे. समस्त देव अपनी सेवा के उपयुक्त एवं तेजस्वी सोम को प्रसन्नतापूर्वक पिएं. हे समान प्रीत्युक्त मित्र एवं वरुण! तुम यज्ञ के स्वामी हो. तुम हमारी प्रार्थना के अनुसार कार्य करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
यो मित्राय वरुणायविजजनोऽनर्वाणं तं परि पातो हंसो दाक्षांसं मतंमहसः। तमर्यमाभि रक्ष्यतुयन्तमं व्रतुम्. उक्थैर्ये एनोः परिभूषति व्रतं स्तोमैरभूषति व्रतुम्.. (५)

May the swan, protector of the friend Varuna, guard him who is without fault. May Aryama protect him who upholds the vow. Those who adorn the vow with hymns and praises, they are protected from sin.

Mandala 1 · Verse 6
नमो दिवे बृहते रोदसीभ्यां मित्राय वोचं वरुणाय मीळ्हुषे सुम्ळीकाय मीळ्हुषे. इन्द्रग्निमृप स्तुहि घृक्षमयर्माणं भगम्, ज्यागजीवन्त: प्रजाया सचेमहि सोमस्योती सचेमहि.. (६)

We bow to the great sky and earth, and praise Mitra, Varuna, and the bounteous Indra and Agni. May we live long with offspring, protected by Soma.

मैं अभीष्ट फल तथा सुख के दाता महान् एवं प्रकाशयुक्त सूर्य, धरती, आकाश, मित्र, वरुण और रुद्र को नमस्कार करता हूं. हे होताओ! इस समय इंद्र, अग्नि, दीप्तिसंपन्न अर्यमा एवं भग की स्तुति करो. इनकी कृपा से हम पूजा से घिरे हुए एवं सोम रस द्वारा रक्षित रहेंगे. (६)

Mandala 1 · Verse 7
ऊती देवानां वयमिन्द्रवन्तो मंसीमहि स्वयंशसो मरुद्धिः अग्निमित्रो वरुणः शर्म यंसन्त् तदश्याम मघवानो वयं च.. (७)

May we, with Indra's might and our own glory, with the Maruts, think of the protection of the gods. May Mitra, Varuna, and Agni grant us shelter, and may we, the powerful, attain that.

हमने अपनी स्तुतियों से मरुद्गणों को प्रसन्न कर लिया है. इंद्र हम पर प्रसन्न हैं. हम देवों की रक्षा चाहते हैं. इंद्र, अग्नि, मित्र और वरुण हमें सुख दें. हम उनके दिए हुए अन्न से सुख भोगें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
मो ष्ा वो अस्माद्भिं तानि पौंस्या सना भूवन्-घ्मानि मोत जारिष्मत्-पुरोत्त जारिष्ः. यद्ग्शिंत्रं युगेयुगे नव्यं घोषादमत्यम्. अस्मासु तन्-मरुतो यच्च दुष्टं दिधुता यच्च दुष्टम्.. (८)

O Maruts, may our strength be renewed, our vigor restored, and our lineage flourish. May you bring forth newness in every age, dispelling all that is impure and harmful within us.

Mandala 1 · Verse 9
अधीवासं परि मातुं रिहन्नं तुविग्रभिः सत्वभियाति वि ज्रयः वयो दधत्पद्वे रेहिहत्सदोनुं श्येनं सचते वर्तनर.. (९)

The swift falcon, with powerful wings, descends to embrace its prey, a hunter of the skies.

Mandala 1 · Verse 10
अस्माकमग्ने मघवत्सु दीदिह्यु श्रुसीवान्वृषभो दमूनाः अवास्यां शियुमतीरदीदेर्देवं युत्सु परिभ्रण.. (१०)

O Agni, brilliant among the wealthy, hear our call, you who are powerful, domestic, and radiant. You have illuminated the homes of the pious, a divine presence in battles.

Mandala 1 · Verse 11
इदम्नने सुधितं दुर्दृितादधि प्रियादुं चिन्मनःमनः प्रेयो अस्तु ते. यते शुक्रं तन्वोऽ रोचते शुचि तेनास्भ्यं वन्से रत्नमा त्वम्.. (११)

May this offering, pleasing to the mind, be dear to you, O Lord, and free from all impurities. With that brilliance of yours which shines in your form, bestow upon us precious jewels.

Mandala 1 · Verse 12
रथाय नावमुत नो गृहाय नित्यारिं पद्दतीं रास्यग्ने. अस्माकं वीरों उतो नो मघोनो जनांश्च या पारयाच्छर्म या च.. (१२)

O Agni, grant us a chariot, a boat, and a home, and a path that leads to prosperity. May you protect our heroes, our wealthy, and our people, bestowing upon them peace and well-being.

Mandala 1 · Verse 13
अग्निं उक्थमभिसंयुगं द्यावाक्षामा सिन्धवश्च स्वगुर्ताः। गव्यं यव्यं यन्तो दीर्घाहर्षं वरमरुण्ये वरन्त.. (१३)

The radiant fires, hymns, and waters, along with the earth and sky, are united and self-sustaining. They bestow abundant, long-lasting prosperity and blessings.

हे अग्नि! हमारे मंत्रों को प्रोत्साहित करो. धरती, आकाश एवं स्वयं बहने वाली नदियां हमें घी, दूध, जौ, गेहूं आदि देकर प्रोत्साहित करें. लाल रंग वाली उषएं हमें सदा उत्तम अन्न दें. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
asyed u bhiyā girayaś ca dṛḻhā dyāvā ca bhūmā januṣas tujete | upo venasya joguvāna oṇiṁ sadyo bhuvad vīryāya nodhāḥ

Mandala 1 · Verse 15
asmā id u tyad anu dāyy eṣām eko yad vavne bhūrer īśānaḥ | praitaśaṁ sūrye paspṛdhānaṁ sauvaśvye suṣvim āvad indraḥ

Mandala 1 · Verse 16
evā te hāriyojanā suvṛktīndra brahmāṇi gotamāso akran | aiṣu viśvapeśasaṁ dhiyaṁ dhāḥ prātar makṣū dhiyāvasur jagamyāt

Mandala 1 · Verse 1
बळिभ्यश्च तदपुषे धायि दर्शंतं देवस्य भर्गः सहसो यतो जनिनि. यदीमुप ह्यते साधते मतिंक्रतस्य धेना अनयन्त ससृतः.. (१)

The divine radiance of the Lord, from which all strength originates, is revealed to the devoted. When this divine essence is approached with pure intellect, it guides the mind towards righteous actions.

होतनशील अग्नि का दर्शनीय वह तेज सब लोग शरीर की दृढ़ता के लिए धारण करते हैं, क्योंकि वह बल से उत्पन्न है. यह बात सत्य है. यह प्रसिद्ध है कि उसी तेज का सहारा लेकर मेरी बुद्धि कार्य करती है और अपना इष्ट सिद्ध करती है. यज्ञसाधक अग्नि के तेज को ही सबकी स्तुतियां प्राप्त होती हैं. (१)


Mandala 1 · Verse 2
पृक्षो वपुः पितुमान्नित्य आ शये द्वितीयमा सप्तशिंवाशु मातुषु. तृतीयस्य वृषभस्य दोहसे दशप्रमतिं जनयन्त योषणाः.. (२)

The divine father, ever present, rests in the sky, while the seven mothers nourish the second. The women give birth to the bull's offspring, bringing forth ten desires.

यह अग्नि अन्नसाधक, शरीर बढ़ाने वाला एवं द्रव्य अन्न से युक्त होकर एक रूप में नित्य धरती पर रहता है. दूसरे रूप में सातों लोकों का कल्याण करने वाली वर्षाओं में रहता है. तीसरे रूप में इस कामवर्षा बादल का जल बरसाने के लिए रहता है. इस प्रकार परस्पर मिली हुई दसों दिशाएं इस अग्नि को उत्पन्न करती हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
नियतं बुझानमहिष्यस्य वर्ष ईशानाः शवसा क्रन्नत सूर्यः. यदीमनु प्रदिवो मध्य आधवे गुहा सन्तं मातरिश्वा मथायति.. (३)

The sun, the lord of all, shines with its might, nourishing the earth and all beings. It is the sun that awakens the hidden life within the womb of the sky.

महान् यज्ञ के आरंभ से सब कार्य सिद्ध करने में समर्थ ऋत्विज् बल से अग्नि को उत्पन्न करते हैं एवं वेदीरूपी गुफा में छिपी हुई अग्नि को फैलाने के लिए चलती हुई वायु अनादि काल से प्रेरित करती है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
प्र यन्तिः परमान्नीयाते पर्यां पृश्धु वीरुधो दंशु रोहति. उभा यदस्य जनुषं यदिन्वत् आदिघविष्ठो अभवदऋणा शुचिः.. (४)

The divine essence, ever-present and all-pervading, rises with the vast, spreading vegetation, becoming pure and free from debt.

अन्न की उत्कृष्टता के निमित्त अग्नि को उत्पन्न किया जाता है. भोजन की इच्छा वाली लताएं अग्नि के दांतों में प्रवेश करती हैं. ऋत्विज् एवं यजमान दोनों ही अग्नि की उत्पत्ति का प्रयत्न करते हैं, इसलिए शुद्ध अग्नि यजमानों पर कृपा करते हुए युवा होते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
आदिद्दोतारं वृणते दिदिष्विषुं भगमिव पप्चानास ऋञ्जते. देवान्यत्क्रत्वा मज्मना पुरुषुतो मर्त्त शंसं विश्वधा वेति धायसे.. (५)

The devoted seeker chooses the giver, and the eager one praises the divine. Through His might, the Creator spreads His glory throughout the universe for sustenance.

आदिউদ্दोतारं वृणते दिदिष्विषुं भगमिव पप्चानास ऋञ्जते. देवान्यत्क्रत्वा मज्मना पुरुषुतो मर्त्त शंसं विश्वधा वेति धायसे.. (५)

Mandala 1 · Verse 6
tad u prayakṣatamam asya karma dasmasya cārutamam asti daṁsaḥ | upahvare yad uparā apinvan madhvarṇaso nadya1ś catasraḥ

Priests worship Agni, the fire of sacrifice, like a king, desiring to enter his divine realm. They praise him, for through his power, he provides sustenance for gods and worthy humans, embodying the universal form.

ऋत्विज् घृलोके में जाने की इच्छा के कारण होम संपादक अग्नि की राजा के समान पूजा करते हैं, क्योंकि ये बहुत से लोगों द्वारा स्तुत एवं यज्ञरूप कर्म तथा अपने शारीरिक बल से देवों एवं स्तुति योग्य मानवों के लिए अन्न की इच्छा करते हैं. अग्नि विश्वरूप हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
वि यदस्थाजतो वातचोदितो हारो न वक्वा जरणा अनाकृतः. तस्य पत्मन्दक्षुः कृष्णजंइसः शुचिजन्मनां रज आ व्यधनः.. (७)

The divine chariot, impelled by the wind, moves with great speed, its wheels churning the dust of the earth. The swift, dark-winged eagle, born of purity, flies through the heavens, scattering the dust of the earth.

यज्ञ के योग्य अग्नि वायु द्वारा प्रेरित होकर चारों ओर उसी प्रकार फैल जाते हैं, जिस प्रकार बहुवक्ता विदूषक भ्रांति-भ्रांति की स्तुतियां करता है. जलाने वाले, कृष्णमार्ग वाले एवं पवित्रजन्म वाले अग्नि के गमनमार्ग में समस्त लोक स्थित हैं. (७)


Mandala 1 · Verse 8
रथो न यातः शिवक्भिः कृती घामङ्गेभिरूष्भिरियते. आदस्य ते कृष्णायो दक्षिं सूर्यः शूरस्वेव त्वष्यादिषते वयः.. (८)

The chariot, though not yet drawn by horses, is propelled by the strength of its own will. Just as the sun, with its radiant power, illuminates the world, so too does the valiant one advance with divine energy.

जिस प्रकार रसियों से बंधा हुआ रथ अपने पहिए आदि अंगों के सहारे चलता है, उसी प्रकार अग्नि अपनी ज्वालाओं के साथ आकाश में जाते हैं. वे अपने मार्ग को काले रंग का बनाने के लिए लकड़ियों को जलाते हैं. अग्नि के तेज से पक्षी उसी प्रकार भाग जाते हैं, जिस प्रकार वीर के भय से लोग भागते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वया ह्यग्ने वरुणो धृतव्रतो मित्रः शशाद्रे अर्यमा सुदानवः. यत्सीमनु क्रतुना विश्वधा विभुरान्न नेमिः परिभुरजायथाः.. (९)

O Agni, by your power, Varuna, the keeper of vows, Mitra, and Aryama, the generous, are upheld. You, the all-pervading, have arisen with your might, like the rim of a wheel, encompassing all.

हे अग्नि! तुम्हारे कारण वरुण व्रतधारी, मित्र अंधकारनाशकर्ता एवं अर्यमा शोभनदानशील होते हैं. जिस प्रकार नेमि रथ के पहियों के अरों को धारण करती है, उसी प्रकार अग्नि अपने यज्ञरूपी कर्म के द्वारा सर्वव्यापक एवं अपने तेज से सबका पराभव करते हुए उत्पन्न होते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
त्वमग्ने शशमानाय सुन्वते रत्वं यविष्ठ देवतातमिन्नवसि. तं त्वा नु नव्यं सहसो युवन्यं भर्ग् न कारे महिरत्नं धीमहि.. (१०)

O Agni, most youthful and powerful, we offer you praise and devotion, seeking your radiant brilliance and abundant blessings.

हे अत्यन्त युवा अग्नि! तुम स्तुति करने वाले एवं सोम निचोड़ने वाले यजमानों के कल्याण के निमित्त उनका रमणीय द्रव्य देवों के समीप ले जाकर विस्तृत करते हो। हे बलपुत्र, धनसंपन्न, नित्यतरण एवं हव्यभोक्ता अग्नि! हम यजमान स्तोत्र बोलते समय तुम्हें शीघ्र स्थापित करते हैं। (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अस्मे रयिं न स्वर्थं दमुनसं भर्ग्ं दक्षं न पञ्चाचसि धर्णसिम्, रश्मींरिव यो यमति जनमनी उभे देवानांशंसमृत आ च सुकृतुः.. (११)

He who, like the reins of a chariot, controls the two worlds and the divine portions, is indeed blessed with wealth, strength, and prosperity.

हे अग्नि! जिस प्रकार तुम हमें वरणीय एवं पूज्य धन देते हो, उसी प्रकार सबको आकृष्ट करने वाला, उत्साहहित एवं विद्याधारण में कुशल पुत्र देते हो. अग्नि अपनी किरणों के समान ही अपने जन के आधार दोनों लोकों का विस्तार करते हैं. शोभनयज्ञकर्ता अग्नि हमारे यज्ञ में देवस्तुति को विस्तार देते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
उत नः सुद्योना जीराशो होता मन्द्रः शणवचन्द्ररथः स नो नेष्रेषतमैरभोरग्निर्मिं सुविंतं वसयो अच्छ.. (१२)

May the radiant, swift, and melodious Agni, the divine priest, guide us with His brilliant chariot, bringing us abundant prosperity and well-being.

क्या अत्यंत द्योतमान, गतिशील अश्वों वाले, देवों को बुलाने वाले, आनंदपूर्ण स्वर्णरथ के स्वामी, अमोघशक्तिसंपन्न एवं निवासायोग्य अग्नि हमारा आह्वान सुनेंगे? क्या वह हमें सरलता से प्राप्त एवं सबके द्वारा अभिलषित स्वर्ग में हमारे कर्मों द्वारा ले जाएँगे? (१२)

Mandala 1 · Verse 13
अस्ताव्यग्निः शिमीवद्धिर्कैः साम्राज्यय प्रतरं दधानः अमी च ये मघवानो वर्य च मिहं न सरो अति निष्टन्युः.. (१३)

The radiant sun, adorned with rays, bestows vast dominion. Those mighty ones, with their abundant wealth, surpass all others in their glory.

अत्यंत प्रकाश धारण करने वाले अग्नि की हमने हव्यप्रदान आदि कर्मों एवं अर्चंनासाधक मंत्रों द्वारा स्तुति की है. जिस प्रकार सूर्य बरसने वाले बादल को शब्द युक्त करता है, उसी प्रकार हम सब यजमान इस अग्नि की स्तुति करते हैं. (१३)

Mandala 1 · Verse 1
समिद्धो अग्न आ वह देवाँ अघ यतसुचे. तन्तुं तषृष पूर्वं सुतसोमाय दाशुषे.. (१)

O Agni, brightly kindled, bring the gods to this sacrifice. For the worshipper who has prepared the Soma and offered it, you weave the path.

हे समिद्ध अग्नि! आज सुच उठाए हुए यजमान के कल्याण के लिए देवों को बुलाओ. सोम निचोड़ने वाले और यज्ञ में हवि देने वाले यजमान के निमित्त पूर्वकालीन यज्ञ का विस्तार करो. (१)


Mandala 1 · Verse 2
घृतवन्तमुप मासि मधुमन्तं तनूनपात्. यजं विप्रस्य मावतः शशमानस्य दाषुः.. (२)

O Agni, you are rich with ghee and honey, the son of the waters, the priest of the sacrifice, and the recipient of the offerings of the devoted.

हे तनूनपात! मेधावी, स्तुतिकर्ता एवं हव्यदाता मुझ जैसे यजमान के घृत एवं मधु से संपन्न यज्ञ में आकर अंत तक रहो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
शुचिः पावकः अद्‌भुतो मध्या यजं मिमि क्षति | नराशंसखिरा दिवो देवो देवेषु यजियः.. (३)

He who is pure, purifying, wonderful, and the center of worship, is the divine one, worthy of adoration among gods.

देवों के मध्य शुद्ध, पवित्रकर्ता, आश्चर्यजनक, तेजस्वि एवं यज्ञसंपादक नराशंस अग्नि स्वर्गलोक से आकर हमारे यज्ञ को तीन बार मधु से सींचते है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
ईळितोऽग्न आ वहेन्द्रं चित्रमिह प्रियम्। इयं हि त्वा मतिर्माच्छा सुजिह्वं वच्यते.. (४)

O praiseworthy Agni, bring Indra, who is dear and wonderful, to this place. This thought of yours, O Agni with a beautiful tongue, is spoken.

ईळितो अग्नि आ वहेन्द्रं चित्रमिह प्रियम्। इयं हि त्वा मतिर्माच्छा सुजिह्वं वच्यते.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
स्तृणानासो यतसुचो बर्हिर्येज्ञे स्वधवरैः। वृज्जे देवव्यचस्तममिन्द्राय शर्म सप्रथः.. (५)

The sacrificial grass, spread by the gods, offers ample protection and shelter to Indra, the lord of sacrifices.

स्तृणानासो यतसुचो बर्हिर्येज्ञे स्वधवरैः। वृज्जे देवव्यचस्तममिन्द्राय शर्म सप्रथः.. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वि श्रयन्तामृतावृधः प्रये देवेभ्यो महीः। पावकासः पुरुषषृढो द्रोवीदंस्क्षत.. (६)

May the great, life-giving, purifying, and strength-bestowing divine beings be invoked, who protect and sustain this offering.

देवों के आने के लिए यज्ञ के यज्ञवर्धक, यज्ञापावक, अनेक लोगो द्वारा अभिलषित एवं एक-दूसरे से पृथक् स्थित द्वार खुल जावें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
आ भन्दमाने उपाके नक्तीषासा सुपेशसा। यही ऋतस्य मातरा सीदतां बहिरा सुमत.. (७)

May the radiant Dawn and Dusk, the mothers of Truth, seated on this sacred grass, be pleased with our offerings.

आ भन्दमाने उपाके नक्तीषासा सुपेशसा। यही ऋतस्य मातरा सीदतां बहिरा सुमत.. (७)

Mandala 1 · Verse 8
मन्द्रजिह्वा जुगुर्वणी होतारा दैव्या कवी। यजं नो यक्षतामिमं सिप्रमहं दिविस्पृशम्.. (८)

May the divine poets, with their resonant tongues, accept this sacrifice, which reaches the heavens.

मन्द्रजिह्वा जुगुर्वणी होतारा दैव्या कवी। यजं नो यक्षतामिमं सिप्रमहं दिविस्पृशम्.. (८)


Mandala 1 · Verse 9
शुचिदेवेष्पर्पिता होता मरुत्सु भारती। इळा सरस्वती मही बर्हिः सीदन्तु यजियः.. (९)

May the pure deities, the Hotri priests, Bharati, Ila, Saraswati, and Mahi, seated on the sacred grass, be pleased to accept this offering.

शुचिदेवेष्पर्पिता होता मरुत्सु भारती। इळा सरस्वती मही बर्हिः सीदन्तु यजियः.. (९)

Mandala 1 · Verse 1
प्र तव्यसीं न्यवसीं धीतिमग्नये वाचो मतिं सहसः सूनवे भरे । अपां नपाद्यो वसुभिः सह प्रियो होता पथिष्या न्यसीददृत्त्वियः ।। १ ।।

I offer this thought, this praise, to Agni, son of strength, the beloved priest who sits in his appointed place with the Vasus, the divine waters' offspring.

मैं बल के पुत्र, जल के नाती, यजमान के प्रिय एवं यज्ञ संपन्नकर्ता व यथासमय धन के साथ यज्रवेदी पर बैठने वाले अग्नि के निमित्त यह अतिशयवर्धक एवं नवीनतम् यज्ञ करता हूं तथा स्तुति पढ़ता हूं। (१)

Mandala 1 · Verse 2
स जायमानः परमे व्योमन्त्याविरग्निर्भवन्मातरिश्ने । अस्य कृत्वा समिधानस्य मज्म्ना प्र द्यावा शोचिः पृथिवीं अरोचयत् ।। २ ।।

Born in the highest heaven, Agni appeared in the atmosphere. His blazing brilliance, when kindled, illuminated the sky and the earth.

स जायमान: परमे व्योम-न्याविरग्निर्भवन्मातरिश्ने। अस्य कृत्वा समिधानस्य मज्म्ना प्र द्यावा शोचिः पृथिवीं अरोचयत्.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
भावक्षसो अत्यतकुर्न सिन्धवोऽग्ने रेजन्ते अससन्नतो अजराः.. (३)

The oceans, boundless and unyielding, tremble before the divine fire, which is ever-present and eternally youthful.

हे अग्नि! तुम सिन्धुओं के समान असीम हो, कभी न थकने वाले, कभी बूढ़े न होने वाले और कभी भी न रुकने वाले हो।

Mandala 1 · Verse 4
यमेररे भृगवो विश्ववेदसं नाभा पृथिव्या भुवनस्य मज्जना. अग्निं तं गीर्भिरिङ्गुहि स्व आ दमे य एको वरुo न राजति.. (४)

The Bhrigus, knowing all, have placed the world's essence in the navel of the earth. Sing praises to that Agni, who alone reigns supreme in his own abode.

हे भृगुवंशियों! विश्व के धन के ज्ञाता, पृथ्वी के नाभि स्वरूप और संसार के सारभूत उस अग्नि की स्तुति करो। वह अग्नि एक है, जो वरुण के समान राज करता है।

Mandala 1 · Verse 5
īśānakṛto dhunayo riśādaso vātān vidyutas taviṣībhir akrata | duhanty ūdhar divyāni dhūtayo bhūmim pinvanti payasā parijrayaḥ

Worship the all-possessing Agni, established by the sacrificer of the Bhrigu lineage for the strength of all beings. These principal Agnis, like Varuna, are lords of all wealth.

भृगुवंशी यजमानो ने समस्त प्राणियों की बलप्राप्ति के उद्देश्य से जिन सर्वधन संपन्न अग्नि को स्थापित किया है, उन अग्नि को अपने घर में ले जाकर स्तुति करो. वे अग्नि मुख्य हैं एवं वरुण के समान समस्त धनों के स्वामी हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
न यो वराय मरुतामिव स्वानः: सनेव सृष्टा दिव्या यथाशनिः. अग्निर्भैभस्तिगैतिरतिं भवति योथो न शृण्वन् वना न्युज्जाते.. (६)

Like the divine thunderbolt of the Maruts, the radiant fire, when not heeded, consumes the forests.

जो वायु के समान, प्रबल आक्रमणकारी की सेना एवं दिव्य वज्र के समान निवारण नहीं किए जा सकते, वे अपने तीखे दांतों से शत्रुओं की उसी प्रकार हिंसा करें, जिस प्रकार वनों को जलाते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
घृतप्रतीकं व ऋतस्य धूर्षदमग्निं मित्रं न समिधान ऋज्जाते. इन्धानो अक्रो विदधेपु दीद्यच्छक्रवर्णांमु नो यंस्ते धियम्.. (७)

The radiant Agni, the sustainer of cosmic order, is like a friend, kindled and upright. He, the powerful one, ignites our intellect, bestowing brilliance and wisdom.

यज्ञ का निर्वाह करने वाले एवं दीप्त ज्वालाओं वाले अग्नि को मित्र के समान जलाते हुए सुशोभित किया जाता है. भली-भाँति प्रदीप्ति अग्नि यज्ञों में प्रज्ज्वलित होते हुए हमारी यात्रादि विषयक निर्मल बुद्धि को जगाते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अप्रयुच्छन्नप्रयुच्छद्दरने शिवेभिनः पायुभिः पाहि शर्म्ः. अदब्धैभिरदृप्तैभिरिडेऽनिमिषद्धिः परि पाहि नो जाः.. (८)

Protect us with your unfailing, unyielding, and benevolent powers, O Lord. Guard us with your invincible and ever-vigilant strength, O source of sustenance.

हे अग्नि! बिना प्रमाद के निरंतर मंगलकारी एवं सुखद रक्षणों से हमारा कल्याण करो. हे इष्ट! तुम निमेषरहित एवं अहिंसक उपायों से हमारी एवं हमारी संतान की रक्षा करो. (८)


Mandala 1 · Verse 9
rodasī ā vadatā gaṇaśriyo nṛṣācaḥ śūrāḥ śavasāhimanyavaḥ | ā vandhureṣv amatir na darśatā vidyun na tasthau maruto ratheṣu vaḥ

Mandala 1 · Verse 10
viśvavedaso rayibhiḥ samokasaḥ sammiślāsas taviṣībhir virapśinaḥ | astāra iṣuṁ dadhire gabhastyor anantaśuṣmā vṛṣakhādayo naraḥ

Mandala 1 · Verse 11
hiraṇyayebhiḥ pavibhiḥ payovṛdha ujjighnanta āpathyo3 na parvatān | makhā ayāsaḥ svasṛto dhruvacyuto dudhrakṛto maruto bhrājadṛṣṭayaḥ

Mandala 1 · Verse 12
ghṛṣum pāvakaṁ vaninaṁ vicarṣaṇiṁ rudrasya sūnuṁ havasā gṛṇīmasi | rajasturaṁ tavasam mārutaṁ gaṇam ṛjīṣiṇaṁ vṛṣaṇaṁ saścata śriye

Mandala 1 · Verse 13
pra nū sa martaḥ śavasā janām̐ ati tasthau va ūtī maruto yam āvata | arvadbhir vājam bharate dhanā nṛbhir āpṛcchyaṁ kratum ā kṣeti puṣyati

Mandala 1 · Verse 14
carkṛtyam marutaḥ pṛtsu duṣṭaraṁ dyumantaṁ śuṣmam maghavatsu dhattana | dhanaspṛtam ukthyaṁ viśvacarṣaṇiṁ tokam puṣyema tanayaṁ śataṁ himāḥ

Mandala 1 · Verse 15
nū ṣṭhiram maruto vīravantam ṛtīṣāhaṁ rayim asmāsu dhatta | sahasriṇaṁ śatinaṁ śūśuvāṁsam prātar makṣū dhiyāvasur jagamyāt

Mandala 1 · Verse 1
एति प्र होतां व्रततमस्य मायोध्यर्धां दधानः शुचिपेशसं धियम् । अभि सुचः क्रमतं दक्षिणावृत्तो या अस्य धाम प्रथमं ह निंसते.. (१)

The divine priest, adorned with sacred vows and pure brilliance, approaches, holding the divine offering. He moves with devotion towards the sacred altar, where his true abode is revealed.

प्रजा युक्त होता अपनी ऊर्ध्वमुखी एवं शोभन रूपवाली प्रजा को धारण करता हुआ अग्नि को हवि देने के लिए जा रहा है एवं प्रदक्षिणा करता हुआ अग्नि में प्रथम साधन सुच को धारण करता है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अभीमृतस्य दोहना अनूषत योनौ देवस्य सदने परीवृताः । अपामुपस्थे विभृतो यदावसदृ स्वधा अध्ययभिरियते.. (२)

The divine milkings of the newly born, held within the womb, are nourished in the abode of the gods. When the waters sustain them, they are offered with devotion.

जल की धाराओंं अपने उत्पत्ति-स्थल सूर्यलोक में सूर्य की किरणों से घिरकर नई बन जाती हैं. उसी समय जल की गोद में विशेष रूप से धारण की गई अग्नि के कारण लोग अमृत के समान जल पीते हैं. अग्नि बिजली के रूप में जल से मिलते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
युयुषतः सवसा तद्धिदुः समानमर्थ वितरित्रता मिथः । आदीं भागो न हव्यः समस्दा वोढुर्न रश्मीन्त्सयस्तं सारथिः.. (३)

Those who strive together with strength understand the equal purpose of their shared endeavors. The first portion is not to be offered, but to be borne by the charioteer, who holds the reins.

युयुक्षत: सवसा तद्धिदुः समानमर्थ वितरित्रता मिथः । आदीं भागो न हव्यः समस्दा वोढुर्न रश्मीन्त्सयस्तं सारथिः... (३)

Mandala 1 · Verse 4
यमीं द्वा सवसा सपर्यतः समाने योनां मिधुना समोक्सा । दिवा न नर्कं पलितो युवाजनिं पुरू चरन्जरो मानुषा युगा.. (४)

The two brothers, united in purpose and dwelling together, worship the divine mother. She, the eternal, gives birth to both the aged and the young, moving through the ages of humanity.

Mandala 1 · Verse 5
तमीं हिन्वन्ति धीतयो दश त्रिशो देवं मतसि ऊतये हवमहे । धनोरधि प्रवत् आ स ऋण्वत्यभिजिव्दयुना नवाधित.. (५)

The ten guiding thoughts propel the divine being, whom we invoke for protection. They flow forth from the source of abundance, bringing forth new strength.

दस उंगलियां परस्पर अलग होकर प्रकाशमान अग्नि को प्रसन्न करती हैं एवं हम यजमान लोग जिन्हें अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं, वे अग्नि चिनगारियों को उसी प्रकार बिखेरते हैं, जिस प्रकार धनुष से बाण छूटते हैं. अग्नि चारों ओर घूमते हुए यजमानों की नवीन स्तुतियों को धारण करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वं ह्यग्ने दिव्यस्य राजसि त्वं पार्थिवस्य पशूपा इव त्वम्। एनी त एते बृहती अभिश्रिया हिरण्ययी वक्वरी बहिराशते.. (६)

You indeed rule over the divine and earthly realms, like a guardian of cattle. Your vast, golden, and radiant powers are spread out, bringing forth nourishment.

हे अग्नि! जिस प्रकार पशुपालक अपनी शक्ति से पशुओं पर अधिकार करता है, उसी प्रकार तुम आकाश एवं धरती पर वर्तमान प्राणियों के स्वामी हो। इसी कारण विस्तृत ऐश्वर्य वाले, हिरण्यमय, शोभन शब्द करने वाले, श्वेतवर्ण एवं प्रसिद्ध द्यावापृथ्वी यज्ञ में आते हैं। (६)

Mandala 1 · Verse 7
अग्ने जुषस्व प्रति हर्यं तद्दचो मन्द्रं स्वधाव ऋतजात सुकृतो। यो विश्वतः प्रत्यङ्ङसि दर्शतो रण्वः सन्दृष्टौ पितुमाँ इव क्षयः.. (७)

O Agni, accept this praise, radiant and pleasing, born of truth, well-made. You who are all-pervading and visible, joyful in appearance, like a father's home, full of sustenance.

हे अग्नि! तुम हव्य का सेवन करो एवं प्रिय स्तोत्र सुनने की इच्छा करो। हे प्रसन्नताकारक, अनृतयुक्त, यज्ञ के निमित्त-उत्पन्न तथा शोभन-बुद्धि अग्नि! तुम समस्त विश्व के अनुकूल, सबके दर्शनीय, रमणशील एवं प्रभूत-अन्न के स्वामी के समान सबके आश्रयदाता हो। (७)

Mandala 1 · Verse 8
युवां यज्नैः प्रथमा गोभिरज्जात ऋतवाना मनसो न प्रयुक्तिषु, भरन्ति वां मनमाना संयता गिरोदृष्ट्यपता मनसा रेवदाशथे.. (८)

You two, the first to be nourished by sacrifices and cows, are the upholders of cosmic order, whose minds are never distracted from their purpose. Your controlled words, offered with devotion and clear vision, fill you with abundance.

हे यज्ञाली मित्र एवं वरुण! जिस प्रकार किसी काम में सबसे पहले मन लगाया जाता है, उसी प्रकार यजमान यज्ों में सबसे पहले तुम्हें घृतादि द्रव्यों से पूजित करते हैं। वे तुममें भली-भाँति संलग्नाचित्त से स्तुति करते हैं। तुम प्रसन्नचित्त से अन्ययुक्त यज् में पधारो। (८)

Mandala 1 · Verse 9
रेवद्वयो दधाथे रेवदाशाथे नरा मायाभिरिञ्जति माहिन्म्, न वां द्यावोऽहभिर्नां सिन्धवो न देवत्वं पणायो नानशुर्मधम्.. (९)

You possess abundant wealth and bestow it, O heroes, and with your powers you achieve greatness. Neither the heavens, nor the rivers, nor the divine powers can equal your might.

हे मित्र एवं वरुण! तुम दोनों धन सहित अन्न धारण करते हो, इसलिए धनयुक्त अन्न प्रदान करो। वह विशाल धन तुम्हारी बुद्धि द्वारा रक्षित है। दिन एवं रात को तुम्हारे समान शक्ति प्राप्त नहीं है। नदियों और पणियों ने तुम्हारा देवत्व नहीं पाया. पणियों को तो तुम्हारे समान धन भी प्राप्त नहीं है। (९)

Mandala 1 · Verse 10
somo na vedhā ṛtaprajātaḥ paśur na śiśvā vibhur dūrebhāḥ

Mandala 1 · Verse 1
यजामहे वां महः सजोषा हव्येभिमित्रावरुणा नमोभिः, घृतैर्धृतस्नू अध यद्रासमसे अध्वर्यवो न धीतिभिरभ्रन्ति.. (१)

We worship you, Mitra and Varuna, with offerings and salutations, O mighty ones, who are pleased by these oblations.

हे घृतवर्षक एवं महान् मित्र, वरुण! समान प्रीति वाले हमारे अध्वर्यु और हम यजमान हव्य द्वारा तुम्हारी पूजा एवं अपनी स्तुतियों द्वारा तुम्हारा पोषण करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अनक्ति यद्वां विदथेषु होता सुम्नं वां सूरिर्ऋषणाविवक्षन्.. (२)

The priest anoints you both, O divine ones, with the knowledge of the sacred rites, as the wise poet desires to praise you.

हे मित्र और वरुण! मैं तुम्हारे यज्ञ का प्रस्ताव मात्र करता हूँ, प्रयोग नहीं कर पाता. इतने से ही मैं तुम्हारा तेज प्राप्त कर लेता हूँ. हे कामवर्षको! जब तुम्हारे बुद्धिमान् होता तुम्हारे लिए हवन करते हैं, उस समय वे सुख के भागी बनते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पीपाय धेनुर्ददितंक्रतताय जनाय मित्रावरुणा हविर्दें. हिनोति यद्वां विदथेपु सपर्यन्त्स रातहव्यो मानुषो न होता.. (३)

May Mitra and Varuna, the divine patrons, accept our offerings, just as a cow gives milk to her calf, and may they, pleased by our worship in assemblies, bestow blessings upon us, the human sacrificers.

हे मित्र और वरुण! जैसे रातहव्य नामक राजा ने साधारण मनुष्य रूप यजमान के होता के समान यज में अपनी सेवा से तुम्हें प्रसन्न किया था और उसकी गाएँ बहुत दूध वाली बन गई थीं, उसी प्रकार तुम्हें हव्य देने वाले मेरी गाएँ दूध वाली बनकर मुझे तृप्त करें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उत वां विष्णुं महास्वन्थो गाव आपश्च पीपयन्त देवीः. उतो नो अस्य पूर्वः परिदन्वीतं पातं पयस उसियायाः.. (४)

May the divine waters and cows nourish you, Vishnu, with their abundant milk. May we partake of the pure, life-giving essence of this divine nourishment.

हे मित्र और वरुण! अन्न, दिव्य गाएँ एवं जल तुम्हारी कृपा प्राप्त करने वाले यजमानों को प्रसन्न करें. हमारे यजमान के पूर्वकालीन पालक अग्नि दाता हों. तुम दोनों दुधारू गाय का दूध पियो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तदस्य प्रिय मभि पाथो अश्यां नरो यत्र देवयवो मदन्ति. उक्क्रमस्य स हि बन्धुरिथया विष्णुः पदे परमे मघ उत्सः.. (५)

May we partake of that beloved nourishment where the devoted rejoice, for Vishnu, the friend of the strong, has established a great abundance in the highest realm.

स्वयं को विष्णु रूप में परिवर्तित करके इच्छुक लोग विष्णु के जिस प्रिय एवं सबके द्वारा सेवनीय अविनाशी ब्रह्मलोक में तृप्ति प्राप्त करते हैं, मैं उसी लोक को प्राप्त करूँ. वे सबके बंधु हैं एवं उनके स्थान पर अमृत बरसता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
ता वां वास्तून्यूश्मसि गमथ्यं यत्र गावो भूरिशृङ्गा अयासः. अत्राहं रुद्रगास्यस्य वृष्णः परं पदमव भाति भूरि.. (६)

We desire those dwelling places where cows with many horns roam freely. Here, the supreme abode of Rudra, the singer, shines abundantly.

हे यजमान एवं यजमान पत्नी! हम तुम दोनों के उस लोक में जाने की अभिलाषा करते हैं, जहाँ बड़े सींगों वाली गाएं निवास करती हैं. अनेक लोगों द्वारा प्रशंसित विष्णु का परम पद सभी प्रकार सुशोभित होता है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
भवा मित्रो न शेव्यो घृतासुतिर्विभूतभूम एवया उ सप्रथाः। अथा ते विष्णो विदुषा चिदधर्यः स्तोमो यजश्च राध्यो हविष्मता.. (७)

O Vishnu, even the wise find your praise and offerings, made with devotion, to be worthy of accomplishment.

Mandala 1 · Verse 8
इदमदकं पिबतेत्यब्रवीत्‍तनेदं वा ध‍ा पिबता मुञ्जनेजनम्‍। सौधन्वना यदि तन्त्रेव ह्यर्थं तृतीये ध‍ा सवने माद‍याध‍ै.. (८)

"Drink this water," he said, "or drink this milk, O people of the Sādhvanas. If indeed the meaning is in the third libation, then drink it."

हे देवो! तुमने हमसे कहा था—"हे सुधन्वा के पुत्रो! तुम इसी सोम‍रस रूपी जल को पिओ अथवा मूंज के तिनकों से शुद्ध किया हुआ दूसरा सोम‍रस पिओ. यदि तुम इन्हें पीना न चाहो तो तीसरे सवन में सोमपान से मुदित बनो." (८)

Mandala 1 · Verse 9
आपो भूयिष्ठा इत्येकोऽब्रवीदग्निभ‍िष‍ू इत्यन्योऽब्रवीत्‍। व‍र्धयन्ती बहुभ्यः ‍प्रैकोऽब्रवीद्‍त‍ा वदन्त‍श्‍च‍म‍सोऽपिश‍त्.. (९)

One said water is the most abundant, another said fire. A third declared them both to be enhancers, and the drinking cup also agreed.

तीन ऋभुओ‍ में से एक बोला—"जल ही सर्वोत्तम है." दूसरे ने अग्नि एवं तीसरे ने धरती को उत्तम स्वीकार किया. इस प्रकार सच्ची बात कहते हुए उन्होंने चमस के चार भाग किए. (९)

Mandala 1 · Verse 10
श्रोणामे‍क उद‍कं ग‍ामव‍ाज‍ाति मांसेमे‍कः पिश‍ित‍ं सू‍नयाभ‍ृतम्‍। आ नि‍मुचः श‍कुदेको अपाभ‍र‍त्किं स्व‍पुत्रेभ्यः प‍ित‍रा उपावतुः.. (१०)

One person offers water, another a cow, and a third brings meat. One brings flesh, another a bird. What protection can parents offer their sons?

ऋभुओ‍ में से एक लाल रंग का उदक अर्थात् रक्त धरती पर रखता है, दूसरा छुरी से काटे गए मांस को रखता है एवं तीसरा उस मांस से मलमूत्र साफ करता है. माता-पिता ऋभुओ‍ से क्या प्राप्त करते हैं? (१०)

Mandala 1 · Verse 1
मा नो मित्रो वरुणो अर्यमायुरिन्द्र ऋभुक्षा मरुतः परि ख्यन्, यद्ब्रजिंनो देवजात्यस्य सप्तैः प्रवक्ष्यामो विविधे वीर्याणि.. (१)

May Mitra, Varuna, Aryama, Indra, Ribhuksha, and the Maruts not overlook us, as we shall proclaim the diverse glories of the divine, seven-fold offspring.

तुम मनुष्य देवजात एवं शीघ्रगतिशाली अश्व के पराक्रमों का वर्णन कर रहे हैं. ऐसे विचारकर मित्र, वरुण अर्यमा, आयु, इंद्र, ऋभुक्षा एवं वायु हमारी निंदा न करें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यन्निर्जा रेक्णसा प्रावृत्तस्य रात्रिं गृभितां मुखतो नयन्ति. सुप्राङ्जो मेम्याद्विड्रूप इन्द्रायुष्पोः प्रियंमप्येति पान्थः.. (२)

The traveler, having shed his impurities and darkness, guided by the dawn, joyfully approaches Indra's beloved abode.

ऋत्विज रूपवान एवं सोने के आभूषणों से सजे हुए घोड़े के सामने भेंट करने के उद्देश्य से बकरे को ले जाते हैं. ‘मैं, मैं’ करता हुआ अनेक रंग का बकरा इंद्र और पूषा का प्रिय है. वह अश्व के सामने आए. (२)

Mandala 1 · Verse 3
एष छागः पुरो अश्वेन वाजिना पूष्णे भागो नीयते विश्वदेव्यः, अभिप्रिं यत्पुरोळाशमर्वता त्वष्टेदनं सौत्रवसाय जिन्वति.. (३)

This goat, along with the swift horse, is offered as a portion to Pushan and the Vishvedevas. This oblation, pleasing to the horse, nourishes Tvashtar and Soutrasa.

समस्त देवों के लिए उपयोगी, पर पूषा का अंश वह बकरा शीघ्र गतिशालि अश्व के सामने लाया जाता है. घोड़े के साथ इस बकरे को प्रयोग करके त्वष्टा देव के लिए स्वादिष्ट भोजन रूप पुरोडाश बनाया जाए. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यदृच्छिवभ्यतुशो देवयानां त्रिर्मनुषाः पर्यश्वं नयन्ति. अत्रा पूष्णेः प्रथमो भाग एति यजं देवेभ्यः प्रतिवेदयन्.. (४)

The divine path, traversed thrice by mortals, leads to the gods. Here, the Sun, Pushan, first receives his share, offering to the deities what is sacrificed.

जब ऋत्विज हवि के योग्य एवं देवों के प्राप्त करने के पात्र अश्व को समय-समय पर तीन बार अग्नि के चारों ओर घुमाते हैं, तब पूषा का भाग रूप पहला बकरा अपनी ‘मैं, मैं’ से देवयज्ञ का प्रचार करता हुआ जाता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तेन यज्ञेन स्वरङ्कृतेन स्खिटेन वक्षणा आ पूर्णध्वम्.. (५)

Through this well-performed sacrifice, may our desires be fulfilled.

होता, अध्वर्यु, आवया, अग्निमिध, ग्रावाग्राम, शस्ता एवं सुविप्र उस प्रसिद्ध एवं भली-भांति अलंकृत यज्ञ द्वारा नदियों को जल से भरें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
युपवस्का उत्त ये युपवाहाश्रुपालं ये अभ्युपाय तक्षति. ये चार्वते पचन सम्भर्न्त्युतो तेषामभ्भिरुर्तं इन्वतु.. (६)

May the waters, which nourish and sustain, flow abundantly for those who diligently prepare and offer them.

जो लोग यूष के लिए उपयोगी पेड़ काटने वाले हैं, जो यूष के निमित्त कटे हुए पेड़ को ढोने वाले हैं, जो अश्व बांधने वाले यूष में चञ्चल अर्थात् बांधने योग्य सिरा बनाने हैं अथवा जो घोड़े का मांस पकाने के लिए लकड़ी के बरतन तैयार करते हैं, इन सबमें मेरा संकल्प समा जाए. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उप प्रागात्सुमनमेऽधायि मन्त्र देवानामाशा उप वीतपृष्ठः. अन्वेनं विप्र ऋषयो मदन्ति देवानां पुष्टे चक्रमा सुबन्धुम्.. (७)

The sacred offering has been made, the prayers ascend to the gods, and the wise seers rejoice in their divine nourishment, having established a strong connection.

हमें उत्तम फल प्राप्त हो. सुडौल पीठ वाला घोड़ा यजफल के रूप में देवों की आषापूर्ति हेतु आवे. हम उसे बांधेंगे. इसे देखकर मेधावी ऋत्विज् तुष्ट हों. (७)

Mandala 1 · Verse 8
य द्रजिंनो दाम सन्दानमर्वतो या शीर्ष्यण्या रशना रज्जुरस्य. यद्धा घस्य प्रभूमास्ये? तृणं सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु.. (८)

May all that is bound, harnessed, and controlled by reins and ropes, and all that is held in the mouth, be offered to the gods.

घोड़े की गरदन में बांधी जाने वाली, पैरों में बांधी जाने वाली एवं लगाम के रूप में मुख में डाली जाने वाली रस्सी— ये सब रस्सियां एवं उसके मुंह में पडने वाली घास देवों को प्राप्त हो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यदश्वस्य क्रविशो मक्षिकाश यद्धा स्वरी स्वधितौ रिप्तमस्ति. यदश्वस्योः शमितुर्यनखेसु सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु.. (९)

May all that is impure from the horse's flesh, flies, or the butcher's knife, and that which has been smeared on the axe, be purified and offered to the gods.

घोड़े का जो कच्चा मांस मखियां खाती हैं, जो उसे काटते समय छुरी में लगा रह जाता है, अथवा काटने वाले के हाथों में लगा रह जाता है, वह भी देवों को प्राप्त हो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
यदुवधमुदरस्यापवाति य आमस्य क्रविशो गन्धो अस्थि. सुकृता तच्छिमितारः कृणवन्तं मेघं शृतपांक पचन्तु.. (१०)

May those who have performed good deeds prepare the flesh, and may the cooked food be consumed by the one who has drunk the nectar.

घोड़े के पेट में जो बिना पची हुई घास रह जाती है एवं पकाते समय जो कच्चे मांस का अंश बच रहता है, उसे मांस काटने वाले शुद्ध करें एवं यज्ञ के योग्य मांस देवों के निमित्त पकावें. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
यदक्रन्दः प्रथमं जायमान उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्। शयेनस्य पक्षा हरिण्यस्य बाहु उपस्तुत्य महि जातं ते अर्वन्.. (१)

When the first-born roared, rising from the ocean or the waters, the swift horse, praised and mighty, spread its wings like a doe's.

Mandala 1 · Verse 2
यमेन दंन्तं त्रितं एनमायुगन्निगन्द्रं एणं प्रथमो अध्यतिष्ठत्। गन्धर्वो अस्य रशनामागृभ्णात्सुरादश्वं वासो निरतष्ट.. (२)

The horse, restrained by Yama, was first mastered by Trita. The Gandharvas grasped its reins, and the Asuras fashioned its harness.

Mandala 1 · Verse 3
असि यमो अस्यादित्यो अर्वन्नसि त्रितो गृहेन व्रतेन। असि सोमेन समया विपुक्त आहस्ते त्रीणि दिवि बन्घनानि.. (३)

You are Yama, the Aditya, the swift one; you are Trita by vow and dwelling. You are united with Soma, and three celestial bonds are placed upon you.

Mandala 1 · Verse 4
त्रीणि त आहुर्दिवा बन्धनानि त्रीण्यस्य त्रीण्यन्तः समुद्र। उतेव मे वरुणशुच्छन्त्यस्येवन्त्रा त आहुः परंम जनित्रम्.. (४)

Three are the bonds of the sky, three within him, and three in the ocean. Thus, they say, your supreme origin is revealed.

Mandala 1 · Verse 5
इमा ते वाजिन्नवमार्जनानीमा शफानां सनितुर्निधाना। अत्रा ते भद्रा रशना अपश्यमूतस्य या अभिरक्षन्ति गोपाः.. (५)

These are your purifying waters, O Soma, the treasures of the swift-moving one. Here, O Soma, I have seen your auspicious reins, which protect the herds.

Mandala 1 · Verse 6
आत्मानं ते मनसादजानामवो दिवां पतयन्तं पतङ्ग्म्। शिरो अपश्यं पथिभिः सुगिरेरग्णिरिहंमानं पतत्रि.. (६)

The Self, unseen by the mind, like a bird falling from the heavens, I perceived with the mind's paths, a bird of fire, descending.

हे अश्व! मैं तुम्हारे दूरस्थ शरीर को अपने मन की कल्पना से जानता हूं. तुम धरती से अंतरीक्षस्थित सूर्य में जाते हो. धूलिरहित सुखप्रद मार्ग से शीघ्रतापूर्वक उठते हुए तुम्हारे सिर को भी मैंने देखा है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अत्र ते रूपमुतममपश्यं जिगीषमाणिष आ पदे गोः। यदा ते मतो अनु भोगमान्नादिदृग्सिध ओषधीर्जीगः.. (७)

Here I saw Your supreme form, desiring victory at the cow's place. When You were pleased, You nourished the plants and herbs.

हे अश्व! मैंने धरती पर चारों ओर अग्रग्रहण के निमित्त आते हुए तुम्हारे रूप को देखा है, जिस समय मनुष्य तुम्हारे खाने की वस्तुएं लेकर जाते हैं, उस समय तुम कृपा करके घास आदि तिनकों को खाते हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अनु त्वा रथो अनु मयों अर्वन्नु गावोऽनु भगः कनीनाम्. अनु वातासस्त्वं सव्यमीयुरनु देवा ममिरे वीर्यं ते.. (८)

Following you, O swift one, are chariots, and the gods, and cattle, and the blessings of maidens. The winds have followed you, and the gods have measured your strength.

हे अश्व! रथ, मनुष्य, गायें एवं नारियों के सौभाग्य तुम्हारे पीछे चलते हैं, अन्य अश्व तुम्हारे पीछे चलकर तुम्हारी मित्रता प्राप्त कर चुके हैं. ऋत्विज तुम्हारे शौर्यकर्मों की स्तुति करके प्रसन्न होते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
हिरण्यश्शुङ्गोऽस्य पादा मनोजवा अवर इन्द्र आसीत्. देवा इ ẩm हविरेहमायन्त्यो अर्चन्तं प्रथमो अध्यतिष्ठत्.. (९)

The golden-horned one, whose feet are swift as thought, was the first to ascend. The gods, coming to offer oblations, worshipped him, and he first established himself.

घोड़े का शीश सोने का एवं पैर लोहे के हैं. मन के समान वेग वाले इंद्र भी इससे भिन्न हैं. घोड़े रूपी द्रव्य को खाने के लिए देव आते हैं. इंद्र वहां सबसे पहले आकर बैठें हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
ईमान्तासःSilikmadhyamas: सं शृणआसो दिव्यासो अत्याः. हंसाइव श्रेणिशो यतन्ते यदाक्षिपुर्द्युमममक्षः.. (१०)

Like swans in formation, they ascend, their minds fixed on the divine, their eyes beholding the radiant light.

यज्ञसंबंधी अश्व जिस समय स्वर्ग के मार्ग से जाता है, उस समय घनी जांघों वाले, पतली कमर वाले एवं विक्रमीशील घोड़ों के समूह दिव्य अश्व के साथ इस प्रकार चलते हैं, जिस प्रकार सितारे इस आकाश में पंक्तिबद्ध होकर चलते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
अस्य वामस्य पलितस्य होतुरस्तस्य भ्राता मध्यमोऽस्त्यश्रः। तृतीयो भ्राता घृतपृष्ठोऽस्यात्रापश्यं विशपते सपुत्रम्.. (१)

The eldest, white-haired, and sacrificial one has a brother, the middle one, who is swift. I see the third brother, with a ghee-covered back, ruling with his sons.

आरोग्य प्राप्ति के लिए सबके द्वारा सेवनीय व जगत्पालक सूर्य के बीच वाले भाई वायु हैं. इसके तीसरे भाई आहुति स्वीकार करने वाले अग्नि हैं. इन भाइयों के बीच में किरणरूपी सात पुत्र सहित विश्वपति दिखाई देते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
सप्त युञ्जन्ति रथमेकचक्रमेकोऽश्वो वहति सप्तनामा। त्रिनाभिं चक्रमरं यत्रमा विश्वं भुवनमाधिं तस्थुः.. (२)

The single-wheeled chariot, with seven horses and seven names, is yoked. Its three-spoked wheel, without a hub, is where all the worlds and beings are established.

सूर्य के एक पहिए वाले रथ में जुते हुए सात घोड़े ही उसको खींचते हैं. सात नामों वाला एक ही घोड़ा रथ को खींचता है. दृढ़ और नित्य नवीन तीन नाभियां उस पहिए में हैं. उस में सारा विश्व स्थित है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इमं रथमध्ये ये सप्त तस्थुः सप्तचक्रं सप्त वहन्त्यश्रः। सप्त स्वसारोऽभि सं नवन्ते यत्र गावां निहिता सप्त नाम.. (३)

The seven steeds, with seven wheels, carry this chariot, where seven sisters sing, and seven names of cows are placed.

सात पहियों वाले रथ में जुते हुए सात घोड़े ही उसको खींचते हैं. सात किरण रूपी बहिनें इसके सामने चलती हैं एवं सात गाएं इस रथ में बैठी हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
को દર્શ પ્રથમં જાયમાનमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभर्ति। भूम्या असुरृगात्मा क्व स्वि को विद्रांसमुप ग्रात्प्रभुमेतत्.. (४)

Who first beholds the born, the bone-filled that the boneless sustains? Where is the soul of the earth, the life-giver? Who can grasp this supreme Lord?

जब अस्थिहीन प्रकृति ने अस्थि वाले संसार को धारण किया था, तब प्रथम उत्पन्न होने वाले को कौन देख सका था? प्राण और रक्त ने तो पृथ्वी से जन्म लिया, पर आत्मा कहां से आई? यह प्रश्न किसी जानकार से पूछने कौन जाएगा. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पाकः पृच्छामि मनसाविजानन्-देवानामना निहिता पदाने। वत्से बष्केयेऽधि सप्त तन्तूनि तन्निरं कवय ओतवा उ.. (५)

I ask with a mind that knows not, where the gods have placed their steps. The wise have woven the seven threads upon the calf and the young goat.

हे पुत्र! मैं मन से न जानकर देवताओं के दिये हुए इस पद को पूछता हूँ। हे वत्स! कवियों ने सात तन्तुओं को किस प्रकार पिरोया है, यह बताओ। (५)

Mandala 1 · Verse 6
अचिकित्वत्चिचिकितुषि श्रद्धत्र कवीन्-पृच्छामि विद्वाने न विद्वान्। वि यस्तस्तम्भ षष्ठिमा रजांस्ज्यस्य रूपे किमुपि स्विदकम्.. (६)

I ask the wise, who truly knows, not the one who merely appears to know, who has established the six realms, what is that one form?

अज्ञानी, अचेत, श्रद्धाहीन और कवियों से पूछता हूँ, विद्वान से नहीं। जिसने छः ऋतुओं को अपने रूप से धारण किया है, वह कौन है? (६)

Mandala 1 · Verse 7
इह ब्रवीतु य ईमङ्ग् वेदस्य वामस्य निहिते पदं वेः। शीर्षः क्षीरं दुहते गावो अस्य वर्ष्णिं उदकं पदापुः.. (७)

The wise one who knows the hidden essence of the Vedas, from which all nourishment flows, drinks the divine milk of knowledge, and the waters of truth are attained through its foundation.

जो इस (सूर्य) के उस छिपे हुए पद को जानता है, वह यहाँ कहे। गायें इसके (सूर्य के) शरीर से दूध दुहती हैं, और इसके (सूर्य के) बल से जल को प्राप्त करती हैं। (७)

Mandala 1 · Verse 8
माता पितरमुत आ बभ्राज धीत्यग्रे मनसा सं हि जग्मे। सा बीभत्सुर्गर्भरसा निविद्धा नमस्स्वन्त इदुपाक्मीय.. (८)

She, the mother, shone forth with her father, her mind united with him. She, filled with the essence of conception, was adorned with reverence and approached.

माता, पिता और अन्य सब मन से ही उस (सूर्य) के पास गये। वह (पृथ्वी) गर्भ के रस से युक्त होकर, नमस्कार करती हुई, उस (सूर्य) के पास गई। (८)

Mandala 1 · Verse 9
युक्ता मातासीदधुरि दक्षिणाया अतिष्ठदगर्भों वृजनीष्वन्तः। अमीमेद्त्सो अनु ग्रामपश्यदृश्रुष्यं त्रिषु योजनेषु.. (९)

The mother, yoked to the chariot of the South, stood firm, the embryo within her womb protected. She saw the herds moving, heard their lowing, across the three yokes of the journey.

दक्षिणा के लिए युक्त माता ने गर्भ धारण करने वाले को रोका। उन्होंने तीन योजन की दूरी पर ग्राम को देखा। (९)

Mandala 1 · Verse 10
तिसो मातृस्निन्-पृति-भ्देक ऊर्ध्वस्तस्थौ नेमव ग्लापयन्ति। मन्त्रयन्ते दिवो अमुष्य पृष्ठे विश्वविद् वाचमविष्मिन्वाम्.. (१०)

The three mothers, bound by affection and unity, stand above, their brilliance undimmed. They converse on the celestial expanse, revealing the all-knowing Word.

तीनों (माता, पिता, सूर्य) ऊर्ध्वलोक में स्थित होकर, जल को नहीं पीते। वे स्वर्ग के पृष्ठ पर विश्व को जानने वाली वाणी का उच्चारण करते हैं। (१०)

Mandala 1 · Verse 1
कया शुभा सवuas: सनोळा: सामान्य मरुतः सं मिमिभिः। कया मती कृत एतऽऽर्चन्ति शुष्मं वृष्णो वासुया.. (१)

By what auspicious power, by what divine inspiration, do the Maruts, with their might, bestow strength and sustenance? By what wisdom do they worship the powerful Vasu?

इंद्र ने कहा—“समान अवस्था वाले और एक स्थान के निवासी मरुद्गण ऐसी महान शोभा वाले हैं, जिसे सब लोगों को जानना कठिन है. वे धरती को सींचते हैं. मन में क्या विचार रखते हैं और कहां से आए हैं? आकर जल बरसाने वाले बादल क्या धन की इच्छा से शक्ति की उपासना करते हैं? (१)

Mandala 1 · Verse 2
कस्य ब्रह्माणि जुजुष्र्षवानः को अध्वरे मरुत आ वर्त्त। शयेनो इव धजती अन्तरिक्षे केन महा मनसा रीरमाम्.. (२)

Who, desiring to serve Brahman, has invoked the Maruts to the sacrifice? Like a falcon, it soars through the sky; by what great mind shall we be pleased?

नित्य तरुण मरुद्गण किसका हवि स्वीकार करते हैं? यज्ञ में आए हुए उन्हें कौन हटा सकता है? वे बाज पक्षी के समान आकाश में उड़ते हैं. हम उन्हें किस महान् स्तोत्र द्वारा प्रसन्न करें? (२)

Mandala 1 · Verse 3
कृतस्वमिन्द्र मांहिन: सन्नोको यासि सत्तते किं त इत्था. सं पृच्छसे समरण: शुभानेवैचेस्तन्नो हरिबो यन्ते अस्मे.. (३)

O Indra, having achieved your greatness, why do you approach us with such haste? Ask us, for we are devoted and will surely grant you auspicious things.

मरुद्गणों ने कहा— "हे सज्जनों के पालक एवं पूजनीय इंद्र! तुम अकेले कहां जा रहे हो? क्या तुम इसी प्रकार के हो? तुम हमसे मिलकर जो पूछ रहे हो, यह उचित है. हे घोड़ों के स्वामी! हमसे जो कहना हो, वह हमसे शोभन वचनों द्वारा कहो." (३)

Mandala 1 · Verse 4
ब्रह्माणि मे मतयः शं सुतासः शुष्म इयर्ति प्रभृतो मेऽद्रिः। आ शास्ते प्रति हर्यन्त्युक्थेमा हरी वहस्तनो अच्छ.. (४)

My thoughts are divine, my sons are auspicious, strength flows from the mighty mountain. The hymns praise and delight, carrying the divine essence.

इंद्र ने कहा—"सारा यजकर्म एवं स्तुतियां मेरी हैं. सामने रखा हुआ सोम मेरा है. मैं जब अपना शक्तिशाली वज्र फेंकता हूं तो यह कभी असफल नहीं होता. यजमान मेरी ही प्रार्थना करते हैं. ऋग्वेद के मंत्र मेरी ही कामना करते हैं. ये हरि नाम के घोड़े हवि ग्रहण करने को मुझे ही वहन करते हैं." (४)

Mandala 1 · Verse 5
अतो वयमन्तेभिर्युजानाः स्वक्षेत्रभिस्तन्यः शृम्भमानाः. महोरभितोऽ उप युज्महे न्दिन्द्र स्वधामनु हि नो बभूथ.. (५)

We, united by our innermost selves and our own realms, invoke you, Indra, for you have become our strength and refuge.

मरुद्गण बोले—"इसी कारण हम अपने शरीरों को महान् तेज से चमकाते हुए समीपवर्ती एवं विशाल बल वाले अश्वों के साथ इस महान् यज्ञ में आने को तैयार हुए हैं. हे इंद्र! हमारे बल का अनुभव करते हुए तुम भी हमारे साथ रहो." (५)

Mandala 1 · Verse 6
क्व १ स्या वो मरुतः स्वाधासीघ्न-मामेकं समदत्ताहितृत्ये. अहं ह्य् ग्रस्विष्ठुविष्वा-न्विश्य श्रोत्रनर्म वस्नेः.. (६)

O Maruts, grant us a portion of your strength, for I am the most powerful, entering all and possessing the ears of Vasu.

इंद्र ने कहा—"हे मरुतो! जब मैंने अकेले ही अहि का वध किया था, तब साथ रहने वाला तुम्हारा बल कहां था? मैं उग्र शक्ति वाला एवं महान् हूं. मैंने हनन में कुशल वज्र द्वारा संपूर्ण शत्रुओं का विनाश किया है." (६)

Mandala 1 · Verse 7
भूरि चक्रर्थ युज्योभिरस्मे समानैर्भिर्विषभ पौस्येभिः. भूरीणि हि कृणवामा शविष्ठेन्द्र कृत्वा मरुतो यदृग्शाम.. (७)

O Indra, with your mighty companions, let us perform many great deeds, just as the Maruts, who are strong and numerous, have done.

मरुतों ने कहा—"हे कामवर्षि इंद्र! हम तुम्हारे समान शक्ति वाले हैं. तुमने हमारे साथ मिलकर बहुत से कर्म किए हैं. हे बलवान् इंद्र! हमने तुमसे भी बढ़कर काम किए हैं. हम मरुत् होने के कारण तुम्हारे साथ कर्म करके वर्षा की इच्छा करते हैं." (७)

Mandala 1 · Verse 8
वधीं वृत्रं मरुद् इन्द्रियेण स्वेन भामेन तविषो बभूवान्. अहमेता मनवे विश्वश्रन्दाः सुगा अपश्रकर वज्रबाहः.. (८)

With his own might and power, Indra, the wielder of the thunderbolt, slew Vritra. He made the paths accessible for Manu, the all-pervading.

इंद्र ने कहा—"हे मरुद्गण! मैंने क्रोध युक्त होकर अपने निजी बल से वृत्र को मारा था, मैं वज्र अपने हाथ में रखता हूं, इसलिए मैं समस्त मनुष्यों की प्रसन्नता के लिए वर्षा करता हूं." (८)

Mandala 1 · Verse 9
अनुतमा ते मघवन्चकिर्नु न त्वांऽअस्ति देवता विदानः. न जायमानो न शते न जातो यानि करिष्या कृणहि प्रवृद्ध.. (९)

O mighty Indra, no god knows you as truly as I do. Whether born or unborn, you are the one who accomplishes all that is to be done.

Mandala 1 · Verse 10
एकस्य चिन्मे विश्वः स्वोजो या नु दृष्ट्वाणकृणवै मनीषा. अहं हुं ग्र्ो मरुतो विदानो यानि व्यवमिन्द्र ईश एषाम्.. (१०)

The universe is in the one consciousness; by seeing its own power, the mind creates. I am the great one, the Maruts know me; Indra, who rules them, is this very essence.

इंद्र बोले—“मुझे अकेले की ही शक्ति सब जगह फैले. मैं मन से जो भी इच्छा करूँ, वही काम कर सकूँ. हे मरुतो! मैं उग्र एवं विद्वान् हूं, जिन संपत्तियों को मैं जानता हूं, उन पर मेरा ही अधिकार है.” (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अमन्दनमा मरुतः स्तोमो अत्र यन्मे नरः श्रुत्यं ब्रह्म चक्र. इन्द्रा य वृष्णो सुखांय मह्यं सख्ये सखायस्तन्त्रे तन्भिः.. (११)

O Indra, the wind blows ceaselessly, and the hymns of praise are sung here, for the strength and joy of my friends who have woven this sacred knowledge for me.

“हे मित्र मरुतो! इस विषय में तुमने मेरी जो स्तुतियाँ की हैं, वे मुझे आनंदित करती हैं. मैं कामवर्षक, शोभन यज्ञों वाला, अनेक रुपधारी एवं तुम्हारा सखा हूं. (११)

Mandala 1 · Verse 1
तनु वोचाम रभसाय जन्मने पूर्व महित्वं वृषभस्य केतवे। एधेव यामनमरूतस्तुविष्णुणो युधेव शक्रास्तविषाणि कर्तेन.. (१)

We shall now declare the primeval glory of the Bull, the radiant one, for the sake of the swift-born. As the Maruts, with their great strength, invigorate the dawn, so does Indra, the powerful, prepare for battle.

हे मरुतो! मैं तुम्हारे प्राचीनतम महत्त्व का इसलिए वर्णन कर रहा हूँ कि तुम यजर्वेदी पर शीघ्र आकर यज्ञ संपत्र कराओ. हे गमन के समय विशाल ध्वनि करने वाले एवं समस्त कार्य करने में समर्थ! तुम्हारे यज्ञस्थल में आते ही समिधाओं की ज्वाला उसी प्रकार महती हो जाती है, जिस प्रकार तुम रण में अपना पराक्रम दिखाते हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
नित्यं न सूनुं मधु बिभ्रत उप क्रीळन्ति क्रीळा विदथेषु घृष्ययः। नक्षन्ति रुद्रा अवसा नमस्विन्नं न मर्थन्ति स्वतवसो हविष्कृतम्.. (२)

The ever-youthful, honey-bearing ones play joyfully in the contests, and the mighty Rudras protect the worshipper with their strength, not allowing the offering-maker to be harmed.

प्रिय पुत्र के समान मधुर हव्य धारण करने वाले एवं यज्ञों में रक्षा करने में प्रवृत्त मरुदगण प्रसन्नचित्त होकर क्रीड़ा करते हैं. नम्र यजमान की रक्षा के लिए स्वाधीन शक्ति वाले एवं यजमान को कभी कष्ट न पहुंचाने वाले रुद्रपुत्र मरुदगण आते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
यस्मा उमासी अमृता अरासस्त रासस्पोषं च हविषा ददाशुषे। उक्षन्त्यस्मै मरुतो हिता इव पुस् रुर्जासिं पयसा मयोभुवः.. (३)

May the Maruts, like well-aimed arrows, bestow upon the giver, through offerings and milk, abundant nourishment and joy, from whom the divine and immortal (powers) flow.

हवि देने वाले जिस यजमान की आहुति के कारण प्रसन्न, सबके रक्षक एवं मरणरहित मरुदगण अधिक मात्रा में धन देते हैं, उसी यजमान के हितकारी सखा के समान मरुदगण सारे संसार को सुख-रूपी जल से भली-भाँति सींचते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
आ ये रजांसि तविषीभिरव्यत प्र व एवासः स्वयतासो अध्जनुः। भयन्ते विश्वा भुवनानि हम्ग्रां चित्रो वो ग्रामः प्रयतासुष्टिषु.. (४)

The mighty ones, who have created the worlds with their strength, have brought forth the shining ones. All beings tremble before them, and their glorious might is revealed in their powerful movements.

हे मरुतो! तुम्हारे घोड़े अपनी शक्ति के द्वारा सारे संसार का भ्रमण करते हैं. वे सारथि के बिना ही तेज चलते हैं. तुम्हारी गति इतनी विचित्र है कि तुम्हारे चलने से समस्त प्राणी और अटटालिकाएँ उसी प्रकार काँप उठती हैं, जिस प्रकार कोई युद्ध में उठी हुई तलवार को देखकर काँपता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
यत् त्वेषयामा नदयन्त पर्वतान्दिवा वा पृष्ठं नृया अच्युव्युः। विश्र्वो वो अज्म-भयते वनस्पति रथीयन्तीव जिहीति ओषधिः.. (५)

The mountains roar with your brilliance, and the earth trembles. The forest trembles before you, and the plants move as if drawn by a chariot.

Mandala 1 · Verse 6
यूयं न उग्रा मरुतः सुचेतुनारिष्ठग्रामाः सुमतिं पिपर्तन. यत्रा वो दिद्युददति क्रिविर्दती रिणाति पeşुः सुधिवतेव बर्हणा.. (६)

O powerful Maruts, with your excellent wisdom and unhindered might, bestow upon us good fortune. Where your lightning flashes, you bring forth abundance, like a swift chariot drawn by strong steeds.

हे विशाल शक्ति संपत्र मरुतो! तुम शोभनचित्त एवं हिसारहित होकर हमारी सुबुद्धि को बढ़ाओ. जिस समय तुम्हारी चलते हुए दांतों वाली बिजली बादलों को प्रकाशित करती है, उस समय वह तलवार के समान पशुओं का नाश करती है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
प्र स्कम्भदेष्णा अनवभ्राधसोऽलातৃणसो विदधेषु सुष्ठुताः. अर्चन्त्यर्कं म दिरस्य प्तिये विदुर्व्वीयस्य प्रथमानि पौस्या.. (७)

They who are free from desire, unclouded in mind, and unburdened by worldly attachments, worship the Sun with devotion, understanding His supreme power and glory.

अविरत दान वाले, नाशरहित धन वाले, सकल शत्रुनाशक एवं यज्ञां में भली प्रकार स्तुति पाने वाले मरुद्गण यज्ञ में अपने मित्र इन्द्र की अर्चना करते हैं, क्योंकि वे शत्रुनाशक इन्द्र के पूर्वकृत वीर कर्मों को जानते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
शतभुजिभिस्तमभिहतेरघातूमीं रक्षता मरुतो यमावत. जनं यमुग्रास्त्वसो विरक्षिनः पाथना शंसाततस्य पुष्टिए.. (८)

The Maruts, with their hundred arms, protected this earth from destruction, and the Asuras, who were fierce, were driven away, thus ensuring the prosperity of the people.

हे महान् तेजस्वी एवं शक्तिशाली मरुतो! जिस मनुष्य को तुमने कुटिल स्वभाव वाले पाप से बचाया है एवं पुत्र-पौत्रादि की पुष्टि से संबंधित निंदा से रक्षा की है, उसका पालन अगणित भोग वस्तुओं द्वारा करो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
विश्वानि भद्रा मरुतो रथेष्षु वो मिश्स्पृश्येव तविषण्याहिता. अंसेष्वा वः प्रपेषु खादयोऽक्षं वश्क्रमा समया वि वावृते.. (९)

O Maruts, may your chariots, filled with auspiciousness, be swift and powerful, carrying you with divine strength. May your wheels turn smoothly, bringing forth prosperity and well-being.

हे मरुद्गण! तुम्हारे रथों पर समस्त कल्याणकारी वस्तुएँ रखी हुई हैं. तुम्हारी भुजाओं में एक से एक शक्तिशाली शस्त्र वर्तमान हैं. सभी विश्राम स्थानों पर तुम्हारे लिए खाने की वस्तुएँ उपस्थित हैं. तुम्हारे रथों के पहिए धुरियों के साथ घूमते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
भूरीणि भद्रा नर्येषु बाहुषु वक्षःसु रुक्मा रभसासोऽज्जयः. अंसेष्वाः पविषु क्षुरा अधि वयो न पञ्चान्न्यनु श्रियो धिरे.. (१०)

With mighty arms and golden chests, they are invincible and swift, adorned with radiant splendor like five lions.

मानवों का कल्याण करनेवाली अपनी भुजाओं में मरुद्गण कल्याणकारी अनंत पदार्थ धारण करते हैं. उनके वक्षस्थलों पर कान्तिमय एवं स्पष्ट दिखने वाले स्वर्णाभूषण, कंथों पर श्वेत मालाएं, वज्र के समान आयुधों पर छुरा एवं पक्षियों के पंखों के समान शोभा धारण करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
ni kāvyā vedhasaḥ śaśvatas kar haste dadhāno naryā purūṇi | agnir bhuvad rayipatī rayīṇāṁ satrā cakrāṇo amṛtāni viśvā

O Indra, lord of horses, may your thousandfold protections, your thousandfold renowned nourishment, your thousandfold wealth that brings joy, and your thousandfold cattle come to us.

हे इन्द्र! तुम्हारे हज़ारों प्रकार के रक्षण उपाय हज़ारों तरह से हमारे पास आवें, हे अश्वों के स्वामी! तुम्हारे हज़ारों तरह के प्रसिद्ध अन्न हमें प्राप्त हों. तुम्हारे पास जो हज़ारों प्रकार के धन हैं, वे हमें प्रसन्नता देने के लिए मिलें. हमें हज़ारों पशु प्राप्त हों. (१)

Mandala 1 · Verse 2
आ नोऽवोभिरमृतो यान्तवच्छा ज्येष्ठेभिवर् बृंहदिर्वैः सुमायाः। अथ यदेषां नियुक्तः परमाः समुद्रस्य चिद्वयन्तं पारे.. (२)

May the immortal one, with his great powers and divine skill, come to us with his aid. He who is appointed above the ocean, even beyond its farthest reach.

मृदगण रक्षा के साधनों सहित हमारे पास आवें. शोभन बुद्धि वाले मृदगण परम प्रसिद्ध एवं दीप्तिशाली धन के साथ हमारे समीप आवें. उनके नियुक्त नामक घोड़े समुद्र के उस पार रहते हुए भी धन धारण करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
मिभ्यक्ष येषु सुधिता घृटाची हिरण्यनिर्णगुपरा न ऋष्टिः। गुहा चरन्ती मनुषो न योषा सम्भवती विदग्धेषु सं वाक्.. (३)

She who is the radiant, all-pervading, and golden-hued, moves in the hidden places, not as a woman, but as the discerning speech that is born within the wise.

भली प्रकार स्थित, जल बरसाती हुई एवं सुनहरे रंग की बिजली मरुतों के साथ मेघमाला, छिपे हुए स्थान में रहने वाली राजपुरुष की पत्नी अथवा यज्तीय वाणी के समान रहती है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
परा शुभा अयासो यव्या साधारणयेव मरुतो मिभिः। न रोदसी अप नृदन्त घोर जुषन्त वृधं सख्याय देवाः.. (४)

The divine Maruts, with their mighty powers, do not shun the heavens or earth, nor do they reject the gods, but rather embrace them in friendship and growth.

जिस प्रकार युवक साधारण नारी से मिलते हैं, उसी प्रकार शोभन अलंकारों वाले परम वेगशाली एवं महान् मृदगण बिजली के साथ संगत होते हैं. भयंकर वर्षा करने वाले मृदगण धरती और आकाश का त्याग नहीं करते. देवगण मित्रता के कारण मरुतों की उन्नति का प्रयत्न करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
जोष्घदीमसूर्या सचधै विविष्तस्तृका रोदसी नृमणाः। आ सूर्येव विधतो रथं गान्त्वेप्रतीका नभसो नेत्या.. (५)

The radiant Sun, the sustainer of all, drives his chariot across the heavens, unhindered and ever-present.

बिखरे हुए बालों वाली मरुत्-पत्नी बिजली समागम के निमित्त इनकी सेवा करती है. जिस प्रकार सूर्य की पुत्री अश्विनीकुमारों के रथ पर सवार हुई थी, उसी प्रकार तेजस्विनी शरीर वाली चंचल बिजली मरुतों के रथ पर बैठकर यजस्थल पर आती है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आस्थायपन्त युवतं युवानः शुभे निमिश्लां विदधेषु पज्राम्। अकों यद्दो मरुतो हविष्मानायदाग्थ सुतसोमो दुवस्न.. (६)

The young men, embracing their beloved, adorned themselves with auspicious garlands. The Maruts, receiving offerings, rejoiced with the Soma juice.

नित्य तरुण मृदगण नियम से मिलन करने वाली एवं शक्तिशाली तरुणी बिजली को वर्षा के लिए अपने रथ पर बैठा लेते हैं. उसी समय पूजा के मंत्र बोलते हुए हव्यदाता एवं सोमरस निचोड़ने वाले यजमान मरुतों की सेवा करते हुए स्तुतियां पढ़ते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
प्र तं विवक्मि वाक्यो य एषां मरुतां महिमा सत्यो अस्ति. सचा यदीं वृष्मणा अहंयुः स्थिरा चिज्जनीवईहते सुभागाः.. (७)

I speak the truth of the greatness of these Maruts, who, when united with the powerful, shake even the firm earth like a mother.

मैं मरुतों की प्रशंसनीय एवं सरलता से समझा में न आने वाली महिमा का वर्णन करता हूँ. मरुतों से संबंधित बिजली बरसने की इच्छा वाली, अहंकार युक्त स्थिर सौभाग्यशालिनी एवं जननसमर्थ प्रजाओं को धारण करने वाली है. (७)

Mandala 1 · Verse 8
पान्ति मित्रावरुणावदृयाच्यत ईर्मयमो अप्रशस्तान्. उत च्यवन्ते अच्युता ध्रुवाणि वावृध ई मरुतो दातिवारः.. (८)

Mitra and Varuna protect the unworthy and the unpraised. The steadfast ones do not fall, and the Maruts, givers of gifts, grow in strength.

हे मरुतो! मित्र, वरुण और अर्यमा इस यज्ञ की निंदा से रक्षा करते हैं तथा यज्ञ के दोषयुक्त पदार्थों का नाश करते हैं. इन्हीं के कारण समय पर मेघ का अच्युत एवं ध्रुव जल टपक पड़ता है. जल की अधिकता से मित्रादि ही जगत् की रक्षा करते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
नही नु वो मरुतो अन्त्येसे आाराताच्चिच्चवसो अन्तमापुः. ते धृष्गुणा शवसा शशुवांसोऽर्णां न द्रेष्ो धृषता परि ष्ुः.. (९)

O Maruts, your strength knows no end, reaching even the distant. With your fierce power, you overcome all obstacles and vanquish your foes.

हे मरुदगण! हम लोगों में से एक भी व्यक्ति दूर रहकर भी तुम्हारे बल की सीमा नहीं जान सका. तुम शत्रुओं को हराने वाले बल से जलराशि के समान बढ़ते हो और अपनी शक्ति से उन्हें हराते हो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
वयमहेन्द्रस्य प्रेष्ठा वयं श्रो वोचेमहि समर्यं. वयं पुरा महि च नो अनु घूनं तन्त्र ऋभुक्षा नरामन् ष्यात्.. (१०)

We praise Indra, the most beloved, and we shall proclaim his greatness. May he, the powerful, grant us strength and prosperity.

आज हम इंद्र के अत्यंत प्रिय बनकर यज्ञ में उनकी महिमा का वर्णन करेंगे. हमने प्राचीन काल में इंद्र की महिमा का वर्णन किया था और प्रतिदिन कर रहे हैं. इसलिए महान् इंद्र अन्य लोगों की अपेक्षा हमारे अनुकूल बनें. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
यज्ञायज्ञा वः समना तुतुर्वाणोऽन्धिष्यं वो देवया उ दधिध्व. . आ वोऽवर्चिः सुविताय रोदस्योर्महे ववृत्यामवसे सुवक्तिभिः.. (१)

May the sacrifices offered by you, O gods, be pleasing and abundant. We invoke your grace and protection for prosperity and well-being.

हे मरुतो! सभी यज्ञों के प्रति तुम्हारी समान भावना जान पड़ती है. तुम अपने जल-प्रदान आदि सारे कर्मों को देवों को प्राप्त कराने के लिए धारण करते हो. मैं तुम्हें महान् स्तोत्र के द्वारा अपने सामने इसलिए बुलाता हूँ कि तुम धरती और आकाश की भली प्रकार रक्षा कर सको. (१)

Mandala 1 · Verse 2
व्रासो न यो स्वजाः स्वतवस् इर्षं स्वर्भिजायन्त धूतयः। सहस्रियासो अपां नोर्मय आसां गावो वन्द्यासो नोक्षणः.. (२)

The mighty, self-powered waters, born of the sky, surge forth like cows, their waves like bulls, worthy of worship.

Mandala 1 · Verse 3
सोमासो न ये सुतास्तृप्तांशावो हत्सु पीतासो दुवसो नास्ते. एषामंसेषु रम्भिणीवRARमे हस्तेषु खादिंश्च कृत्तिश्च सं दधे.. (३)

Those who have drunk the Soma, their thirst is quenched, and they are filled with strength. In their laps, the celestial nymphs rejoice, and in their hands, they hold weapons and hides.

Mandala 1 · Verse 4
अव स्वयुक्ता दिव आ वृथा ययुरमत्याः कशया चोदत त्मना. अरेणवस्तृविजाता अच्युव्युद्ढाहानि चिनमरतो भाजदृष्टयः.. (४)

The unattached, pure souls, having attained divine knowledge, ascend to the heavens, their vision unwavering and their minds free from worldly desires.

Mandala 1 · Verse 5
को वोऽन्तर्मरुत ऋषिविद्युतो रेजति त्मना हन्वेव जिह्वया. धन्वव्युत इषां न यामिनि पुरप्रेषा अहन्पोऽ नैनशः.. (५)

Who among you, O Maruts, with your inner wisdom and lightning, trembles with your own spirit, like a hunter with his tongue, sending forth arrows of light in the night, dispelling darkness and sin?

Mandala 1 · Verse 6
क्व स्वित्स्य रजसो महस्पं क्वारं मरुतो यस्मिन्नचायय. यच्चयावयथ विथुरेव संहितं व्यद्रिणा पथं त्वेषमर्णवम्.. (६)

Where is the greatness of this dust, O Maruts, in which you have placed it? You have gathered it, though scattered, into a shining, flowing path.

Mandala 1 · Verse 7
सातिर्न वोऽभवन्ती स्वर्वती त्वेषा विपाका मरुतः पिपिष्वती. भद्रा वो रातिः पणतो न दक्षिणा पृथग्जयी असुर्यै जज्ज्वती.. (७)

May the generous gifts of the Maruts, who are swift and bring forth ripening fruits, be yours. May your offerings be auspicious and not like the stingy gifts of the greedy, for they are truly victorious who are free from avarice.

हे मरुतो! तुम्हारे धन के समान ही तुम्हारा दान भी प्रशंसनीय है. इंद्र तुम्हारे दान में सहायता करते हैं. उस में सुख, तेज, फल का परिपाक एवं किसानों का कल्याण है. तुम्हारा दान दाता की दक्षिणा के समान तुरंत फल देने वाला एवं अपनी शक्ति के समान सबको हराने वाला है. (७)

Mandala 1 · Verse 8
प्रति ष्ठोभन्ति सिन्धवः पविभ्यो यदभ्रियां वाचमुदीरयन्ति. अव स्यमन्त विद्युत: पृथिव्यां यदी घृतं मरुतः पृष्वुवन्ति.. (८)

The oceans surge and roar with thunderous voices, as the clouds pour forth rain. The lightning flashes across the earth, and the Maruts anoint it with their divine essence.

जिस समय नीचे गिरने वाला जल चलता है, उस समय वज्र के शब्द के समान गर्जन करता है. जब मरुद्गण धरती पर जल बरसाते हैं, उस समय बिजली नीचे की ओर मुंह करके प्रकट हो जाती है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अभूतं पृथ्मिंमहे रणाय त्वेभमयासां मरुतामनीकम्. ते सप्रसोऽजनयन्ता-भ्मादिस्त्वधमिभिर्‌ां पर्यपश्यन्.. (९)

The Maruts, a mighty host, have come forth for battle, their strength like a blazing fire. They have generated the divine, and with their weapons, they survey all.

पृथ्षि ने शीघ्र गति वाले मरुतों के समूह को विशाल युद्ध के लिए जन्म दिया है. समान रूप वाले मरुतों ने जल को उत्पन्न किया. इसके पश्चात् सब लोगों ने अभिलषित अन्न के दर्शन किए. (९)

Mandala 1 · Verse 10
एष वः स्तोमो मरुत इयं गीर्म्नादार्यस्य मान्स्य कारोः. एषा यासीष्ट तन्वे वयां विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (१०)

This praise is for you, O Maruts; this song is for the mighty Aryaman. May this reach our bodies, that we may know this strong, life-giving one.

हे मरुतो! आदर के योग्य मांदर्य कवि का यह स्तुतिसमूह तुम्हारे लिए है. यह स्तुति तुम्हें इस अभिलाषा से प्राप्त होती है कि स्तुतिकर्ता का शरीर पुष्ट हो. हम भी इस स्तुति द्वारा अन्न, बल एवं दीर्घ-आयु प्राप्त करें. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
प्रति व एना नमसाहमेमि सूक्तेन भिक्षे सुमतिं तुराणाम्. रराणता मरुतो वेदाभिनि हैळो धत वि मुचध्वमश्वान्.. (१)

With praise and hymns, I approach you, O Maruts, seeking your favor and good will. May you, who are swift and joyful, unharness your steeds and bestow your blessings upon us.

हे वेगशाली मरुतो! मैं अपना नमस्कार और स्तुति वचन लेकर तुम्हारे समीप आता हूं एवं तुम्हारी दया की याचना करता हूं. तुम स्तुतियों से चित्त प्रसन्न करो, क्रोध त्यागो और घोड़ों को रथ से अलग कर दो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
एष वः स्तोमो मरुतो नमस्वान्-हृदा तष्टो मनसा धायि देवाः. उपमा यात मनसा जुषणा यूयं हिष्णां नमस इद्वृधासः.. (२)

O Maruts, this hymn, offered with reverence from the heart and mind, is for you, O gods. Come with your minds, accept this praise, for you are the mighty ones who are honored by our devotion.

हे तेजस्वी मरुतो! तुम्हारे प्रति बोला जा रहा स्तोत्र अन्न सहित है. यह स्तोत्र तुम में श्रद्धा रखने वाली बुद्धि से निकला है, इसलिए हमारे प्रति कृपा करके मन से इसे सुनो एवं इसे स्वीकार करके शीघ्र आओ. तुम हविरूप अन्न की वृद्धि करने वाले हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स्तुतासो नो मरुतो मूल्यन्तूत स्तुतो मधवा शम्भविष्ठः. ऊर्ध्वा नः सन्तु कोम्य वनान्यानि विग्रा मरुतो जिगीष.. (३)

May the praised Maruts grant us wealth, and may Indra, the giver of joy, be praised. May our forests be abundant and flourishing, O Maruts, may we conquer.

हे मरुतो! स्तुति सुनकर हमें सुखी करो. सर्वाधिक सुखदाता इंद्र हमें प्रसन्न करें. हे मरुतो! हम जितने दिन जीवित रहें, वे दिन सबसे अधिक उत्तम, चाहने योग्य एवं भोगपूर्ण हों. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अस्मादहं तविषीदीषमाणा इन्द्रादिद्या मरुतो रेजमानः. युष्मभ्यं हव्यां निशितान्यासन्तान्यारे चक्रमा मूळता नः.. (४)

We, the Maruts, are invigorated by Indra's might, and we have prepared these offerings for you, O gods. May our hymns bring you joy and protection.

हे मरुतो! हम इस बलवान् इंद्र के भय से कांपते हुए भागने लगे. हमने तुम्हारे लिए जो हवि तैयार किया था, उसे दूर कर लिया. तुम हमारी रक्षा करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
येन मानासश्चितयन्त उसा व्युष्टिषु शवसा श istiनाम्. स नो मरुद्रृषभ श्रवो धा उग्र उग्रभिः स्थविरः सहोदाः.. (५)

May the Maruts, strong and mighty, grant us glory, who with their power and might, in the dawn's light, contemplate and achieve victory.

हे इंद्र! तुझ बलशाली के अनुग्रह से अभिमानपूर्ण किरणें नित्य प्रति उषाकाल होने पर प्राणियों को जगा देती हैं. हे कामवर्षि, उग्र, शत्रुओं को हराने वाले बल के दाता एवं पुरातन इंद्र! तुम परम बलशाली मरुतों के साथ मिलकर हमें अन्न दो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वां पाहीन्द्र सहीयसो नृन्वा मरुद्रिरखयात्हेळाः. सुप्रकेतेभिः सासहिर्दधनो विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (६)

Protect us, O Indra, with your mighty strength, as you have protected men with the Maruts. Grant us, O giver of life, this strength and victory.

हे इंद्र! तुम मरुतों की रक्षा करो. तुम्हारी कृपा से ही वे अधिक शक्तिशाली बनें हैं. मरुतों के साथ-साथ हमारे प्रति भी क्रोधरहित बनो. शोभन बुद्धि वाले मरुतों के साथ मिलकर तुम शत्रुओं को हराते हुए हमारे प्रति कृपालु बनो. हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
रपत्वविरिन्द्रकंसातो क्षां दासायोपबर्हणीं कः करतिस्रो मघवा दानुचित्रा नि दुर्योण कृयवाचं मधि शेत्र.. (७)

Who can truly praise the mighty Indra, the giver of gifts, whose glory is beyond measure, and who vanquishes all enemies?

हे इंद्र! अन्न प्राप्ति के निमित्त क्रांतदर्शी होता तुम्हारी स्तुति करता है. तुमने दास असुर का वध करके धरती को उसकी शय्या बनाया था. इंद्र ने तीन भूमियों का दानरूपी विचित्र कार्य करके दुर्योणि राजा के कल्याण के लिए कृयवाच को मारा था. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सना ता त इन्द्र नव्या आगुः सहो नमोऽविविराय पूर्वीः भिनतुरो न भिदो अदेवीर्नमो वधरदेवस्य पीयो... (८)

May the new hymns, O Indra, reach you, and may our ancient strength, unhindered, destroy the godless foes.

हे इंद्र! नवीनत्तम ऋषि तुम्हारे अति प्राचीन वीरकर्मों की स्तुति करते हैं. तुमने युद्ध समाप्त करने के लिए अनेक हिंसकों को समाप्त किया है. तुमने विरोधियों के देवशून्य नगरों को नष्ट किया तथा दानरहित विरोधी वृत्र के ऊपर अपना वज्र झुकाया. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वं धुरिनन्द्र धुनिमतींऋणोरूपः सीरा न सवन्तीः प्र यत्समृदंमति शूर पार्षं पारया तुर्वशं यदुं स्वस्ति.. (९)

You are the strength that bears the burden, the river of abundance, the swift chariot. O hero, grant us passage across all difficulties, bringing prosperity to Turvasha and Yadu.

हे इंद्र! तुम शत्रुओं को कंपित करने वाले हो, इसलिए बहती हुई सीरा नदी के समान तरंगों वाला जल धरती पर बहाते हो. हे शूर! तुमने सागर को जल से पूर्ण करते समय यदु और तुर्वसु राजाओं का पालन करके उनका कल्याण किया. (९)

Mandala 1 · Verse 1
मत्स्यपायि ते महः पात्रस्येव हरिवो मत्सरों मदः वृषा ते वृष्ण इन्दुर्वाजी सहससात्मः.. (१)

Your glory, O Hari, is like the fish that drinks, and your strength is like the bull. You are the soma, the powerful one, the self of strength.

Mandala 1 · Verse 2
आ नस्ते गन्तुमत्सरों वृषा मदो वरेण्यः। सहावाऽइन्द्र सानसिः पृतनाषष्ठमर्त्यः.. (२)

O Indra, may our desire for you, the strong and praiseworthy exhilarator, reach you. May you, the invincible hero, grant us victory in battles.

हे इंद्र! प्रसनदाता, कामवर्शी, तृप्त करने वाला, श्रेष्ठ, शक्तिशाली, शत्रु सेनाओं का नाश करने वाला एवं अविनाशी सोम रस तुम्हें मिले। (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्वं हि शूरः सनिनता चोदयों मनुषो रथम्. सहावान्दस्युमव्रतमोषः पां न शोचिषा.. (३)

You are indeed the brave and the wise, driving the chariot of humanity. With your strength, you banish the godless and the unrighteous with your brilliance.

हे शूर एवं दाता इंद्र! मुझ मनुष्य की अभिलाषा पूरी करो. सोम रस तुम्हारा सहायक है. अग्नि जिस प्रकार अपनी लपटों से अपने ही आधारभूत पात्र को जलाता है, उसी प्रकार तुम व्रतहीन असुर को नष्ट करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
मुषाय सूर्यं कवे चक्रमीशान ओजसा. वह शुष्पाय वर्धं कृत्सं वातस्याश्रैः.. (४)

The Sun, the radiant eye of the universe, is driven by the divine power of the Lord. It nourishes all beings and expands with the breath of the wind.

हे मेघावी एवं समर्थ इंद्र! तुमने अपनी शक्ति से सूर्य के एक पहिए को चुरा लिया था. तुम शुष्ण नामक असुर का वध करने के लिए वायु के समान तेज चलने वाले घोड़ों की सहायता से वज्र लेकर आओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
शुष्पिन्मो हि ते मदो ह्युन्निमत् उत् क्रतुः. वृत्रघ्नां वरिवोविदां मंसीष्ठा अश्वसातमः.. (५)

Your intoxication is indeed mighty, O powerful one, the bestower of strength and prosperity, the slayer of enemies.

हे इंद्र! तुम्हारी प्रसन्नता सबसे अधिक शक्तिशाली है एवं तुम्हारे यज्ञ में सबसे अधिक अन्न होता है. हे अश्व रूप अनेक धन देने वाले इंद्र! तुम वृत्रघाती एवं धन देने वाले दोनों यज्ञों का समर्थन करो. (५)

Mandala 1 · Verse 1
kā ta upetir manaso varāya bhuvad agne śaṁtamā kā manīṣā | ko vā yajñaiḥ pari dakṣaṁ ta āpa kena vā te manasā dāśema

May Indra, the bestower of wealth, the fulfiller of desires, the lord of all, and praised by many, come to us. O Indra, hearing our praise, harness your two desire-fulfilling horses and come forth to protect us, desiring the offerings of food.

धन आदि द्वारा सभी मनुष्यों को प्रसन्न करने वाले, कामवर्षि, सब लोगों के स्वामी एवं बहुतों द्वारा स्तुत इन्द्र हमारे पास आवें. हे इन्द्र! हमारी स्तुति सुनकर हव्य अन्न की इच्छा करते हुए दोनों कामवर्शी घोड़ों को रथ में जोड़कर हमारी रक्षा के लिए सामने आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ये ते वृष्णो वृषभास इन्द्र ब्रह्मयुजो वृषरथासो अत्याः। ताँ आ तिष्ठ तैभिरा याह्यवार्ड हवमहे त्वा सुत इन्द्र सोमे.. (२)

O Indra, come with your mighty, swift steeds and chariots, you who are strong and united with Brahman. We call you with Soma, so ascend and come to us.

हे इन्द्र! तुम्हारे घोड़े तरुण, उत्तम, कामवर्शी, मंत्रयुक्त एवं रथ में जोड़ने योग्य हैं. तुम उन पर सवार होकर, उनके साथ हमारे सम्मुख आओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ तिष्ठ रथं वृषण वृषा ते सुतः सोमः परषिष्का मधुनि। युक्त्वा वृषभ्यां वृषभ क्षितीनां हरिभ्यां याहि प्रवतो मद्रि.. (३)

Mount your chariot, O powerful one, for your potent Soma is pressed and sweet. Harnessing your strong steeds, come to us, O bestower of joy.

हे इन्द्र! अपने कामवर्शी रथ पर बैठो, क्योंकि तुम्हारे लिए निचोड़ा हुआ सोमरस और मधुर घृत तैयार है. हे कामवर्शी इन्द्र! अपने घोड़ों को रथ में जोड़ो और सत्कर्म करने वाले यजमानों पर अनुग्रह करने के लिए शीघ्रगामी रथ से हमारे सम्मुख आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अयं यञ्जो देवया अयं मियेध इमा ब्रह्मण्यायमिन्द्र सोमः। स्तर्णी बह्मिरा तु शक्र प्र याहि पिबा निषध वि मुचा हरी इह.. (४)

O divine Soma, accept this offering and this praise; O Indra, come and drink. O powerful one, ascend the altar, drink deeply, and loosen your reins here.

हे इन्द्र! यह यज्ञ देवों को प्राप्त करने वाला है. यह यज्ञ-संबंधी पशु, ये मंत्र, यह निचोड़ा हुआ सोमरस और बिछे हुए कुश, सब तुम्हारे लिए हैं. हे शक्रतु! तुम शीघ्र आओ और कुशों पर बैठकर सोमरस पियो. तुम इस यज्ञ में अपने घोड़ों को रथ से अलग करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ओ सुहृत इन्द्र याह्यवार्डुप ब्रह्माणि मान्स्यस्य कारोः। विघाम वस्तोरवसा गुणन्तो विघामेभं वृतं जीरदानुम्.. (५)

O Indra, our friend, come to us with your strength and listen to our prayers, so that we may overcome obstacles and enjoy your life-giving sustenance.

हे भली प्रकार स्तुत्य इन्द्र! आदरणीय स्तोता के मंत्रों को स्वीकार करके हमारे सामने आओ. स्तुति करते हुए हम तुम्हारी रक्षा पाकर निवासस्थान के साथ ही अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करेंगे. (५)

Mandala 1 · Verse 1
यद्व स्थ त इन्द्र श्रुष्टिरस्ति यया बभथ जरितृभ्य ऊती। मा नः कामं मह्यन्तमा धगविश्र्था ते अश्वां पर्याप आयो.. (१)

O Indra, what is your most excellent protection, by which you have sustained your worshippers? May our desire not be great; may your chariot horses carry us across.

हे इन्द्र! तुम्हारी वह समृद्धि सब जगह प्रसिद्ध है, जिसके द्वारा तुम स्तोताओं की रक्षा में समर्थ होते हो. हमें महान् बनाने की अपनी अभिलाषा तुम समाप्त मत करो. तुम्हारी सभी मानवोचित वस्तुओं को हम प्राप्त करें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
न ृा राजेन्द्र आ दभ्नो या नु स्वसारा कृणवन्त योनौ, आपश्चिद्रस्मे सुतुका अवेष्णामन्त्र इन्द्रः सख्या वयश्च.. (२)

May Indra, our friend, grant us strength and prosperity, just as the waters flow swiftly and the birds fly freely.

हे राजेन्द्र! क्या तुम या अन्य कोई भी हमारे लिए ऐसा कार्य कर रहे हैं जो हमारे लिए अवांछित हो? हे इन्द्र! तुम हमारे मित्र हो और हम तुम्हारे मित्र हैं। (२)

Mandala 1 · Verse 3
जेता नृभिरन्द्रः पृत्सु शूरः श्रोता हवं नाधमानस्य कारोः. प्रभर्ता रंथं दाशुष उपाक उद्यन्ता गिरो यदि च त्मना भूतू.. (३)

Indra, the victorious warrior in battles, hears the prayers of the distressed and brings the chariot of the worshipper. He is the one who ascends with praise, if the devotee's heart is also with him.

हे इन्द्र! तुम शत्रुओं के विजेता, युद्ध में शूरवीर, स्तुति करने वाले और पुकारने वाले हो। तुम ही रथ के चलाने वाले, और स्तुति करने वाले हो। यदि तुम चाहो तो तुम अपने स्तोताओं के लिए अपने रथ को भी ले आओ। (३)

Mandala 1 · Verse 4
एवा नृभिरिन्द्रः सुश्रवस्या प्रखादः पृक्षो अभि मित्रिणो भूतू. समर्य इषः स्तवते विधाचि सत्राकरो यजमानस्य शंसः.. (४)

Indra, the giver of fame, is praised by men, a nourisher and friend. He is invoked in battle, and the praise of the worshipper is effective.

हे इन्द्र! तुम अपने मित्रों के लिए अन्न देने वाले, और स्तुति करने वाले हो। तुम अपने यजमान के लिए स्तुति करने वाले हो। (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वया वयं मघवन्निन्द्र शत्रुभिभ्याम हतो मन्यमानान्. त्वं त्राता त्वमु नो वृधे भूर्विधेमेषं वृजनं जीरदानुम्.. (५)

O Indra, we believe we have been struck by enemies; you are our protector and our strength. We offer you this vigorous and life-giving sacrifice.

हे इन्द्र! तुम्हारी सहायता से हम उन शत्रुओं का वध करें, जो अपने आपको बड़ा शक्तिशाली मानते हैं. तुम हमारे रक्षक एवं पालनकर्ता बनो. हम अन्न, बल और दीर्घ-आयु प्राप्त करें. (५)

Mandala 1 · Verse 1
पूर्वाग्ं शरदः शश्रमाणा दोषा वस्तोरुषसो जरयन्तीः. गिरिमा ति श्रियं जरिमा तनुनाभ्य् नु पत्नीवृष्णेो जगम्मुः.. (१)

The dawns, growing weary with the passing of autumn nights, have brought forth the splendor of the mountains, as the wives of the divine couple have come to the world.

अनेक वर्षों से रात, दिन और उषा काल में शरीर को जीर्ण करती हुई तुम्हारी सेवा में लगी रही हूँ। इस समय बुढ़ापा मेरे अंगों का सौंदर्य नष्ट कर रहा है। क्या इस अवस्था में पुरुष नारियों के साथ समागम न करें? (१)

Mandala 1 · Verse 2
ते चिदवासुर्नह्यन्तमापुः समू नु पत्नीर्विषभिर्जग्मुः.. (२)

They, dwelling in consciousness, reached the end of their being, as if their wives had been consumed by poison.

"हे अगस्त्य! प्राचीन महर्षियों ने सत्य को प्राप्त किया. वे देवों के साथ सत्य बोलते थे. उन्होंने भी पत्नियों में वीर्य का स्कलन किया और इस कार्य को समाप्त नहीं किया. तपस्या करती हुई पत्नियां भोग समर्थ पतियों के समीप जाती थीं." (२)

Mandala 1 · Verse 3
न मृषा श्रान्तं यदवन्ति देवा विश्वा इत्स्पृधो अभ्यश्रवाव. जयावेत्रं शतमनीमाजिं यत्सभ्यच्चा मिधुनावभ्यजाव.. (३)

The gods protect those who are not weary from striving, and we have overcome all rivals. We have won the chariot race, the hundred-holed chariot, and the prize.

अगस्त्य ने उत्तर दिया—"हे पत्नी! हम लोग व्यर्थ ही नहीं थके हैं. हमारी तपस्या से प्रसन्न देव हमारी रक्षा करते हैं. हम सभी भोगों को भोगने में समर्थ हैं. यदि हम और तुम इच्छा करें तो इस संसार में अब भी सुखसंभोग के सैकड़ों साधन प्राप्त कर सकते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
नदस्य मा रुषतः काम आगग्नितो आ जातो अभूतः कृतश्रि. लोपामुद्रा वृषणं नी रिणाति धीरमधीरा धयति भृसन्तम्.. (४)

The desire of the roaring, angry one is born from the fire of passion, and the wise woman drinks deeply from the powerful, flowing stream.

“हे पत्नी! मैं मंत्रों के जप और ब्रह्मचर्य पालन में लगा रहा. फिर भी न जाने किस कारण मुझमें काम भाव उत्पन्न हो गया. तुम लोपामुद्रा वीर्य सेचन समर्थ मुझ पति के साथ संगत हो जाओ. तुम अधीर नारी बनकर मुझ महाप्राण पुरुष का भोग करो.” (४)

Mandala 1 · Verse 5
इमं नु सोममन्तितो हन्तु पीतममुप ब्रुवे. यत्सीमाभिक्रमा तन्तु मृत्युं पुलकामो हि मर्त्यः.. (५)

This Soma, drunk near, destroys the drinker; for the mortal, desiring pleasure, is drawn to death by his transgressions.

शिष्य कहने लगा—"उदर में पिया हुआ सोम रस मुझे सब पापों से छुड़ाकर सुखी करे, यह प्रार्थना मैं सच्चे मन से कर रहा हूं. मैंने जो पाप किया है, उससे मेरी रक्षा हो. क्यों मनुष्य मन में बहुत सी कामनाएं करता है? (५)

Mandala 1 · Verse 1
प्रातःकाल सोम रस पीते हुए हमसे मिलो। (१)

Meet us in the morning, drinking the Soma nectar.

प्रातःकाल सोम रस पीते हुए हमसे मिलो।

Mandala 1 · Verse 2
युवमत्स्याव नक्षथो यद्विप्तमनो नरस्य प्रयज्योः। स्वसा यद्रां विश्वगूतीं भराति वाजा यट्टे मधुपाविश्च च.. (२)

You are like two fish, swimming together, your minds united. May your strength and nourishment be abundant, bringing you sweet success.

हे सबसे के द्वारा स्तुत्य एवं मधुपानकर्ता अश्विनीकुमारो! तुम्हारी बहिन उषा जिस समय तुम्हारे आने के लिए प्रभात करती है एवं यजमान अन्न और बल पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करता है, उस समय तुम दोनों का नित्यगामी, विविध गतियों वाला, मनुष्यों का हितकारंक एवं विशेष रूप से पूज्य रथ पहले ही चल देता है। (२)

Mandala 1 · Verse 3
युवं पय उस्त्रियायामधतं पक्वमायायमव पूर्वं गोः। अन्तर्द्निनो वामृतप्ष हारो न शुचियजते हविष्मा.. (३)

You have nourished the cow with milk, the ripe fruit, and the first grass. The immortal nectar, like a pure offering, is consumed by the divine.

युव ह धर्म मधुमन्तमत्रयेऽपो न क्षोदोऽवृणीतमेषे, तद्वां नरावश्विना पश्वङ्ङ्ठी रथ्येव चक्रा प्रति यन्ति मध्यः.. (४)

Mandala 1 · Verse 4
युवं ह धर्म मधुमन्तमत्रयेऽपो न क्षोदोऽवृणीतमेषे, तद्वां नरावश्विना पश्वङ्ङ्ठी रथ्येव चक्रा प्रति यन्ति मध्यः.. (४)

O Ashvins, you two have chosen the sweet Dharma for the sage Atri, just as the waters are not separated from the earth. Your chariot wheels, like those of a swift horse, move together in the middle.

हे अश्विनीकुमारो! तुमने सुख के इच्छुक अग्नि मुनि के लिए गरम दूध और घी की नदियां बहा दी थीं. हे नेताओ! हम इसीलिए तुम्हारे लिए अग्नि में यज्ञ करते हैं. रथ का पहिया जिस प्रकार ढालू मार्ग पर अपने आप चलता है, उसी प्रकार सोम रस तुम्हें स्वतः प्राप्त होता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
आ वां दानाय ववृत्तीय दसा गोरोहेण तोभ्यो न जित्रिः। अपः क्षीणो सचते महिना वां जूणां वामभुरहसो यत्रा.. (५)

May your generous gifts be praised, O powerful ones, for your strength is unmatched. Your glory shines brightly, dispelling all darkness and weakness.

हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! तुम राजा के पुत्र भुज्यु ने जिस प्रकार तुम्हें बुलाया था, उसी प्रकार मैं अपनी स्तुतियों द्वारा तुम्हें अपने यज्ञ में बुला लूंगा. तुम्हारी कृपा से ही धरती और आकाश मिले हैं. हे यज स्वामियो! यह बूढ़ा दुर्बल ऋषि पाप से छूट कर दीर्घ जीवन प्राप्त करे. (५)

Mandala 1 · Verse 6
नि यद्वेवेथे संयुतः सुदानू उप स्वधाभिः सृजथः पुरन्धिम्। प्रेषद्देदातो न सूरि महे ददे सुव्रतो न वाजम्.. (६)

The generous ones, united in their gifts, create abundance. The wise giver bestows wealth and sustenance, like a righteous one granting prosperity.

हे शोभनदानशील अश्विनीकुमारो! जब तुम अपने नियुक्त नाम के घोड़ों को रथ में जोड़ते हो, उस समय धरती को अन्न से पूर्ण बना देते हो. यह यजमान तुम्हें वायु के समान शीघ्र प्रसन्न करे एवं तुम्हारी कामना करे. इसके बाद यजमान उत्तम कर्म करने वाले व्यक्ति के समान अन्न प्राप्त करता है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
वयं चिद्धि वां जरितारः सत्या विपण्यामहे वि पणिहितावान्, अथा चिद्धि ष्माशिनोवन्निन्दा पाथो हिष्मां वृष्नावन्तिदेवम्.. (७)

We, the singers of truth, praise you, O mighty ones, with our offerings. You, who are the bestowers of strength, accept our hymns and nourish us.

हम भी तुम्हारे स्तोता एवं सत्य बोलने वाले हैं. हम तुम्हारी स्तुति कर रहे हैं. तुम यज्ञ न करने वाले परम धनी का त्याग करो. हे प्रशंसनीय एवं कामवर्षी अश्विनीकुमारो! तुम देवों के समीप सोम रस पियो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
युवां चिद्धि ष्माशिनोवनु घून्निरुद्रस्य प्रसवणस्य सातौ, अगस्त्यो नरां नृषु प्रशस्तः काराधुनीव चितयसहसैः.. (८)

You two, like Agastya praised among men, are the protectors and nourishes of the divine flow, bringing forth strength and wisdom.

हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार शंख शब्द करता है, उसी प्रकार यज्ञकर्ता मनुष्यों में उत्तम अगस्त्य ऋषि हजारों स्तुतियों द्वारा प्रतिदिन तुम्हें जगाते हैं. वे ग्रीष्म का दुःख दूर करने वाला वर्षा का जल चाहते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
प्र यद्धेहे महिना रथस्य प्र स्यन्द्रा याथो मनुषो न होता, धतं सूक्ष्भ्य उत् वां स्वस्यं नास्त्या रषिप्रावः स्याम.. (९)

As the chariot's glory moves forth, and the reins are grasped by the wise, so may we, with clear minds, attain the divine.

हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने रथ की महिमा से हमारा यज्ञ पूर्ण करते हो. हे गतिशीलो! तुम यजमान के होता के समान यज्ञ के आरंभ में आकर यज्ञ के अंत में जाओ. तुम स्तोताओं को उत्तम अश्व प्रदान करो. हम भी धन प्राप्त करेंगे. (९)

Mandala 1 · Verse 10
तं वां रथं वयमृहा हुवेम स्तोमैरश्विना सुविताय न्व्यम्, अरिष्टनेमिं परि घामियानं विधांमेषं वृजनं जीरदानुम्.. (१०)

O Ashvins, we invoke you with praises to your chariot, which brings prosperity and is swift and life-giving, to protect us and grant us strength.

हे अश्विनीकुमारो! हम स्तुतियों द्वारा तुम्हारे शीघ्रगति वाले, प्रशंसनीय, आकाश में उड़ने वाले तथा न टूटने योग्य नेम वाले रथ को अपने यज्ञ में बुलाते हैं, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त कर सकें. (१०)


Mandala 1 · Verse 11
इदं द्यावापृथिवी सत्यमस्तु पितर्मर्त्यादिषोऽब्रुवे वाम्. भूतं देवानांमवमे अवोभिविद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (११)

May this truth of heaven and earth be for you, O Father, as I have spoken to you mortals. May we know the protection of the gods, and their life-giving strength.

हे माता और पितास्वरूपी धरती और आकाश! इस यज में मेरे द्वारा की गई स्तुतियों को सार्थक करो. तुम रक्षा साधनों द्वारा हम स्तुतिकर्ताओं के पास आओ, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (११)

Mandala 1 · Verse 12
sahasrākṣo vicarṣaṇir agnī rakṣāṁsi sedhati | hotā gṛṇīta ukthyaḥ

Mandala 1 · Verse 1
आ न इळाभिरिद्विथे सुशास्ति विश्वानरः सविता देव एतु. अपि यथा युवानो मत्स्था नो विश्वं जगदभिप्रेप्तवे मनीषा.. (१)

May the divine Savitr, the sustainer of all, approach us with praise and offerings, guiding us with wisdom so that we, like youth, may embrace and comprehend the entire universe.

हे विश्व के नियन्ता सविता देव! आप हमें अन्न, जल और ऐश्वर्य से युक्त करें। जैसे युवा पुरुष किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तत्पर रहते हैं, वैसे ही हम भी आपको प्राप्त करने के लिए तत्पर रहें। (१)

Mandala 1 · Verse 2
आ नो विश्व आस्क्रा गमनन्तु देवा मित्रो अर्यमा वरुणः सजोषाः. मन्युव्या नो विश्वे वृधासः करन्तुसुषाहा विश्वं न शवः.. (२)

May the divine beings, Mitra, Aryama, and Varuna, united in purpose, enter our assembly. May all the great ones, with their blessings, bestow upon us strength and prosperity.

हे मित्र, अर्यमा, वरुण और इन्द्र देव! आप सब मिलकर हमारे यज्ञ में पधारें। आप सब मिलकर हमारे शत्रुओं का नाश करें और हमें बल प्रदान करें। (२)

Mandala 1 · Verse 3
प्रेष्ठं वो अतिथिं गृणीषेडग्निं शस्तिभिरस्तुवर्णः सजोषाः. असद्यथा नो वरुणः सुकीर्तिरिश्प्रं पर्दरिगुर्तः सूरिः.. (३)

May we praise Agni, the most beloved guest, with hymns and songs, as Varuna, the renowned and swift protector, is honored.

हे अग्नि देव! मैं शीघ्रता करता हुआ एवं तुम्हारे साथ प्रसन्न होकर मंत्रों द्वारा तुम्हारे उत्तम अतिथि अग्नि की स्तुति करता हूँ। शीघ्र कीर्ति संपन्न वरुण देव हमारे बनकर शत्रुओं के प्रति इनकार करें एवं हमारे लिए अन्नदाता बनें। (३)

Mandala 1 · Verse 4
उप व एषं नमसा जिगीषोषासानन्ता सुदुघेव धेनुः. समाने अहन्विमिमानो अर्के विष्णुर्वरुणे पयसि सस्मिन्धन्.. (४)

This offering, like a bountiful cow, is for the victorious one who desires to conquer. In the same way, Vishnu and Varuna, the givers of sustenance, are honored with praise.

हे देवो! जिस प्रकार दुधारू गाय सवेरे और शाम दूध काढने के स्थान में जाती है, उसी प्रकार हम पापों को जीतने की इच्छा से स्तुतिवचन के साथ प्रातः:सायं तुम्हारे सामने उपस्थित होते हैं. हम गाय के थनों से उत्पन्न घी, दूध आदि पदार्थों को मिलाकर प्रतिदिन लाते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उत नोऽहिर्बुध्योऽ मयस्कः शिशुं न पिप्पुबीव वेति सिन्धुः. येन नपातमापां जुनाम मनोभुवो वृष्णो यं वहन्ति.. (५)

The divine serpent, Ahirbudhnya, the protector, carries the infant like a bird carries its young, just as the waters carry the beloved of the mind-born Rishis, whom the vigorous ones bear along.

हे अहिर्बुध्न्य! तुम हमें सुख दो. गाय जिस प्रकार बछड़े को तृप्त करती हुई आती है, उसी प्रकार सिंधु नदी हमें तृप्त करती हुई आवे. हम स्तुति करते हुए जल के नाती अग्नि से मिलें. मन के समान तेज चलने वाले बादल उन्हें ले जाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
उत न ई त्वष्टा गन्तवच्छा स्मृतीरभिभिप्रेत्वे सजोषाः. आ वृत्रेन्द्रश्र्णणप्रास्तुविष्मो नरां न इह गभ्याः.. (६)

May Tvashtar, the divine architect, come to us with joy, and may we, united, praise him. May Indra, the mighty, hear our prayers and grant us strength.

हे त्वष्टा! तुम हमें ज्ञान और ऐश्वर्य प्रदान करो। हे इन्द्र! हम तुम्हारी स्तुति करते हुए शत्रुओं को परास्त करें और वे हमारे लिए कभी भी भय उत्पन्न न कर सकें। (६)

Mandala 1 · Verse 7
उत न ईं मतयोऽश्रुयोगाः शिशुं न गावस्तरुणं रिहन्ति. तमीं गिरो जनयो न पत्नीः सुर्भिष्ठमं नरां नसनत.. (७)

Like cows licking their young calf, these thoughts, unjoined by tears, embrace Him. Like wives embracing their husband, these hymns embrace Him, the most excellent, the most beloved.

जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार घोड़ों के समान वेगशाली हमारी बुद्धियां नित्ययुवा इंद्र को घेरती हैं. स्त्रियां जिस प्रकार पति को पाकर संतान उत्पन्न करती हैं, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां इंद्र के पास पहुंचकर फलों को जन्म दें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
उत न ईं मरुतो वृहसेनाः स्मदोदसी समनसः सदन्तु. पृष्ठक्षasoऽवनयो न रथां रिषादसो मित्रयुजो न देवाः.. (८)

May the Maruts, with their great strength and unified minds, be pleased with us, just as the gods, united in friendship, are pleased with their companions.

परम शक्तिशाली, हमारे समान ही प्रतियुक्त, पुष्ट नामक घोड़ों वाले, नम्र एवं शत्रुनाशक मरुद्गण धरती और आकाश से हमारे पास इस प्रकार आवें, जिस प्रकार मित्रता करने वाले एक-दूसरे के समीप जाते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
प्र नु यदेषां महिमा चिकिन्ने प्र युञ्जते प्रयুজस्ते सुऊक्तिः. अथ यदेषां सुदिने न शरुविश्वमोरेणण पुषायन्त सेनाः.. (९)

When their glory is understood, they harness their strength with excellent praise. Then, in auspicious times, their armies flourish with abundant might.

मरुद्गण स्तुति का प्रयोग जानते हैं, इसलिए उनकी महिमा से सभी परिचित हैं. जिस प्रकार सुदिन में आकाश में प्रकाश फैल जाता है, उसी प्रकार मरुतों की वर्षा करने वाली सेना सारी ऊसर धरती को उपजाऊ बना देती है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
प्रो अश्विनाववसे कृण्वंश्चं प्र पूषणं स्वतमसो हि सन्ति. अदेपो विष्णुवव्रत ऋभुक्षा अच्छा सुनाय ववृत्तीय देवान्.. (१०)

O Ashvins, we invoke you for protection, and praise Pushan, for they are indeed the illuminators. May Vishnu, the steadfast observer of vows, and Indra, the bestower of sustenance, lead us to auspiciousness.

हे ऋत्विजों! हमारी रक्षा के लिए अश्विनीकुमारों एवं पूषा के अतिरिक्त स्वाधीन शक्ति वाले तथा ॠتبرहित विष्णु, वायु और इंद्र की भी स्तुति करो. मैं सुख प्राप्ति के लिए सब देवों के सामने स्तुति करूँगा. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
इयं सा वो अस्मे दीधितियर्जत्रा अपिप्रणी च सदनी च भूयाः. नि या देवेषु यतते वसुर्विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (११)

May this offering, worthy of praise, be present with us, and may it be a dwelling place. May we obtain this life-giving strength, which strives among the gods.

हे यज्ञयोग्य देवो! तुम्हारी प्रसिद्ध ज्योति हमें प्राण और शरण देने वाली बनें. तुम्हारी द्रव्य अन्न सहित स्तुति देवों को प्राप्त हो, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (११)

Mandala 1 · Verse 12
na vepasā na tanyatendraṁ vṛtro vi bībhayat | abhy enaṁ vajra āyasaḥ sahasrabhṛṣṭir āyatārcann anu svarājyam

Mandala 1 · Verse 13
yad vṛtraṁ tava cāśaniṁ vajreṇa samayodhayaḥ | ahim indra jighāṁsato divi te badbadhe śavo 'rcann anu svarājyam

Mandala 1 · Verse 14
abhiṣṭane te adrivo yat sthā jagac ca rejate | tvaṣṭā cit tava manyava indra vevijyate bhiyārcann anu svarājyam

Mandala 1 · Verse 15
nahi nu yād adhīmasīndraṁ ko vīryā paraḥ | tasmin nṛmṇam uta kratuṁ devā ojāṁsi saṁ dadhur arcann anu svarājyam

Mandala 1 · Verse 16
yām atharvā manuṣ pitā dadhyaṅ dhiyam atnata | tasmin brahmāṇi pūrvathendra ukthā sam agmatārcann anu svarājyam

Mandala 1 · Verse 1
पितुं नु स्तोष्मं महो धर्मांण तविष्मिम्। यस्य त्रितो व्योअसा वृत्रं विपरमर्दयत्.. (१)

Let us praise the great, powerful, and righteous father, by whose strength Trita crushed Vritra.

मैं सबके धारणकर्ता एवं बलस्वरूप पालक अन्न की शीघ्र स्तुति करता हूं. अन्न की शक्ति से इंद्र ने वृत्र असुर के टुकड़े कर दिए थे. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स्वादो पितो मधो पितो वय त्वं ववृमहे. अस्माकमविता भव.. (२)

O Soma, you are sweet and intoxicating; we choose you. Be our protector.

हे स्वादिष्ठ एवं मधुर पितः! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमारे रक्षक बनो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उप नः पितवा चर शिवः शिवाबभिरूतिभिः। मयोभुर्ऋद्धिषेण्यः सखा सुशवो अद्रयाः.. (३)

O Father, approach us with auspicious blessings and protection. May you, the source of joy and prosperity, be our friend, bringing us strength and abundance.

हे मंगलरूप पितः! कल्याणकारी रक्षा साधनों के साथ हमारे पास आओ और हमें सुख दो. तुम हमारे लिए प्रिय रस वाले मित्र एवं अनोखे सुखदाता बनो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
तव त्वे पितो रसा रजांस्यनु विष्ठिताः.. दिवि वाताइव श्रिताः.. (४)

Your essence, O Father, pervades all realms, like winds dwelling in the heavens.

हे पितः! अर्थात् अन्न! जिस प्रकार आकाश में हवा व्याप्त है, उसी प्रकार तुम्हारा रस सारे संसार में फैला हुआ है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तव त्वे पितो ददत्स्त्व स्वादिष्ठ ते पितो। प्र स्वाज्ञानो रसानं तुविग्रीवाइवेरते.. (५)

O Father, you who give, you are indeed most delicious. You are the source of all flavors, like the swift-moving sun.

हे परम स्वादिष्ठ पितः! तुम्हारी प्रार्थना करने वाले मनुष्य तुम्हारा भोग करते हैं. तुम्हारी कृपा से ही वे तुम्हारा दान करते हैं. तुम्हारे रस का भोग करने वाले मनुष्य गरदन ऊँची करके चलते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वे पितो महानों देवानां मनो हितम्। अकारि चारु केतुना तवाहिमवसावधीत्.. (६)

You, O Father, have been the mind of the great gods, and with your beautiful brilliance, you have destroyed the serpent.

हे पितः! महान् देवों का मन तुम्ही में लगा हुआ है. इंद्र ने तुम्हारी रक्षा एवं बुद्धि का सहारा लेकर ही वृत्र का वध किया था. (६)

Mandala 1 · Verse 7
यददो पितो अजगन्विस्व पर्वतानाम्। अत्रा चिनो मघो पितोऽरं भक्षाय गम्याः.. (७)

Whatever is born, whatever moves, whatever stands still, all these are pervaded by the divine. This divine being is the source of all sustenance and the ultimate destination.

हे मधुर पितः! जब बादल प्रसिद्ध जल बरसाने को लावें, उस समय तुम पर्याप्त भोजन के रूप में हमारे समीप आना. (७)

Mandala 1 · Verse 8
यदपामोषधीनां परिशामाशिमहे. वातपे पीव इन्द्रव.. (८)

We eat the waters and herbs, which are purified by the sun, O Indra, and become strong.

Mandala 1 · Verse 9
त्वष्टा रूपाणि हि प्रभुः पश्ूनिश्छान्त्समानजे, तेषां नः स्फातिमा यज.. (९)

May the Lord, who fashioned all forms and creatures, grant us prosperity through our offerings.

त्वष्टा रूप निर्माण में समर्थ हैं. वे समस्त पशुओं को रूप देते हैं. वे हमारे पशुओं की वृद्धि करें. (९)

Mandala 1 · Verse 1
अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वाणि देव वयुनानि विद्वान्. युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम.. (१)

O Agni, divine knower of all paths, lead us to prosperity. Remove from us crooked sin; to you we offer abundant praise.

हे द्योतमान अग्नि! तुम सभी प्रकार के ज्ञानों को जानते हो, इसलिए हमें धन की ओर

Mandala 1 · Verse 2
अग्ने त्वं पार्या नव्यो अस्मान्त्वस्खस्तिभिरति दुर्गाणि विश्व। पृष्ठं पृथ्वी बहुला न उवीं भवा तोकाय तनयाय शं यः... (२)

O Agni, you are the new, the ever-present, who with your auspiciousness helps us overcome all difficulties. May you be a broad, protective shield for our children and grandchildren, bringing them well-being.

हे अति नवीन अग्नि! तुम अतिपूजित यज्ञादि साधनों का सहारा लेकर हमें दुर्गम पापों के पार पहुँचाओ. हमारी नगरी और धरती अत्यंत विस्तृत हो. हमारी संतान को तुम सुख दो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्ने त्वमस्मद्युध्यमीवा अनग्निन्न अभ्यमन्त कृष्टीः। पुनरस्मयं सुविताय देव क्षां विश्वाभिरमृतभिरर्ज्जत्र.. (३)

O Agni, you are our protector, the one who drives away the non-believers. You bring us prosperity and all blessings.

हे अग्नि! तुम समस्त रोगों के साथ-साथ अग्निहोत्र न करने वाले लोगों को भी हमसे दूर कर दो. हे प्रकाशमान एवं यज्ञ के योग्य अग्नि! तुम अन्य समस्त देवों के साथ आकर हमें यज्ञ में उत्तम फल दो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
पाहि नो अग्ने पायुभिरजैरूत प्रियं सदन आ शुशुक्वान्। मा ते भयं जरितारं यविष्ठ नूनं विदनमापर सहस्वः.. (४)

O Agni, protect us with your guardians, and shine brightly in our beloved home. May no fear ever reach your worshipper, O youthful one, for you are the vanquisher of all enemies.

हे अग्नि! सदैव आश्रय देकर हमारा पालन करो एवं अपने प्रिय यज्ञस्थल में सब ओर से प्रकाशित बनो. हे अतिशय एवं शक्तिशाली अग्नि! तुम्हारे स्तोता मुझको आज या इसके बाद कभी भी भय न लगे. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मा नो अग्नेऽव सृजो अद्यायाविष्यवे रिपवे दुच्छनाय। मा दत्तवते दशते मादते नो मा रीषते सहसावन्परा दाः.. (५)

O Agni, do not abandon us to the wicked, the deceitful, or the destructive. Do not give us over to the stingy or the greedy; do not let the powerful harm us.

हे अग्नि! हमें हिंसक, भूखे और दुःखदाता शत्रु के अधीन मत होने दो. हमें दांत वाले कटखने सर्पादि, बिना दांत के, सींग वाले पशुओं एवं हिंसक राक्षसों को भी मत सौंपो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वि घ त्वां ऋतजातं यंसदग्णुणानो अग्ने तन्वंे वरुस्थम्। विश्वाद्रिदृक्षोरुत वा निनित्सोरिभृतामसि हि देव विष्दृ.. (६)

O Agni, you are born of Truth, the sustainer of all, and the protector of the universe. You are the source of all strength and the destroyer of all obstacles.

हे यज्ञ से उत्पन्न एवं वर्णनीय अग्नि देव! जो लोग शरीर की पुष्टि के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं, उन्हें तुम हिंसक, चोर आदि एवं निंदक लोगों से बचाते हो. तुम अपने सामने कुटिल आचरण करने वाले के बाधक बनो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
अनर्वाणं वृषभं मन्द्रजिहं बृहस्पतिं वर्धया नव्यमर्कैः. गाथान् यः सुचो यस्य देवा आशुष्पवन्ति नवमानस्य मर्ताः.. (१)

Praise the mighty, resonant-tongued Bṛhaspati with new hymns, for the gods and mortals eagerly offer him their swift oblations.

हे होता! न त्यागने वाले, फलदायक, मधुरभाषी एवं स्तुति के योग्य बृहस्पति को मंत्रों द्वारा बढ़ाओ. शोधन दीप्ति एवं स्तुति किए जाते हुए बृहस्पति को गाथा नामक मंत्रों का पाठ करने वाले मनुष्य और देव स्तुतियाँ सुनाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तमूतिया उप वाचः सवन्ते सर्गो न यो देवयतामसज्रि. बृहस्पतिः सहस्रज्जो वरांसि विश्वाभवत्समृते मातिरिक्षा.. (२)

The divine hymns flow forth, not created by mortals, but by the gods. Brihaspati, the lord of immense power, encompasses all worlds and is the source of all existence.

वर्षा ऋतु संबंधी स्तुतियाँ जल की सृष्टि करने वाले एवं देवभक्त यजमानों को फल देने वाले बृहस्पति के समीप जाती हैं. वे आकाश रूपी व्यापी मातिरिक्षा के समान सभी उत्तम फलों को उत्पन्न करके यज के निमित्त प्रकट करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उपस्तुतिं नमस उहतिं च श्लोकं यंस्तत्वितेव प्र बाहु. अस्य क्रत्वाहन्यो यो अस्थि मृगो न भीमो अरक्षस्तस्तुविष्षान्. (३)

He who praises, bows, and sings, and with strong arms upholds the divine, is protected like a deer from a fearsome hunter, and is filled with great strength.

जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से प्रकाश देता है, उसी प्रकार बृहस्पति यजमानों के समीप जाकर उनकी स्तुतियाँ, अन्नदान एवं स्तुतिमंत्रों को स्वीकार करते हैं. विरोधाधीन इन बृहस्पति की शक्ति से दिन के सूर्य, भयानक सिंह आदि के समान शक्तिशाली बनकर घूमते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अस्य श्लोको दिवियते पृथिव्यामत्त्यो न यं सक्षभ्भृदिचेताः. मृगाणां न हेतयो यन्ति चेमा बृहस्पतेरहिमायो अभि घून.. (४)

The divine power of the Lord, which cannot be grasped by the mind or the senses, is like the swiftness of deer, unhindered and all-pervading.

बृहस्पति की कीर्ति धरती और आकाश में फैली है, वे आदित्य के समान द्रव्य धारण करते हुए प्राणियों में बुद्धि संचार के साथ-साथ उन्हें फल भी देते हैं, बृहस्पति के आयुध मायावियों की ओर शिकारी लोगों के आयुधों के समान तेजी से चलते हैं। (४)

Mandala 1 · Verse 5
ये त्वा देवोसिकं मन्यमानाः पापा भद्रमुपजीवन्ति प्रज्ञाः न दृढ्ढेषु अनु दद्रासि वामं बृहस्पते चयस इत्यारुम्.. (५)

Those who, thinking "God is this," live by unrighteous means, O Brihaspati, do not attain true prosperity, for they do not follow the righteous path.

हे बृहस्पतिदेव! तुम कल्याणकारक हो, जो पापी लोग तुम्हें बूढ़ा बैल समझकर तुम्हारे समीप जाते हैं, उन्हें मनचाहा उत्तम धन मत देना, तुम सोमायग करने वाले पर अवश्य कृपा करना. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सुप्रेतुः सूर्यवसो न पन्था दुर्नियन्तुः परिप्रीतोन मित्रः अनर्वाणो अपि ये चक्षते नोडपीवृत्तो अपोपूर्णवन्तो अस्थुः.. (६)

The path of the sun, the friend of all, is not easily traversed by the uncontrolled. Those who are unrestrained and unfulfilled remain stagnant.

हे बृहस्पति! तुम शोभन मार्ग वाले एवं उत्तम धन से युक्त यजमान के लिए मार्ग के समान सरल एवं दृष्टों के नियंत्रण करने वाले राजा के प्रसन्न मित्र बनो, जो विरोधी हमारी निंदा करते हैं और सुरक्षित रहते हैं, उन्हें रक्षाहीन करो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
asāvi soma indra te śaviṣṭha dhṛṣṇav ā gahi | ā tvā pṛṇaktv indriyaṁ rajaḥ sūryo na raśmibhiḥ

Burning and unseen beings surround me.

दाहक एवं अदृश्य प्राणी मुझे घेरे हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अदृष्टान् हन्त्यत्यथो हन्ति परायती. अथो अबञ्जहन्त्यथो पिषष्टि पिषष्टि.. (२)

The unseen is destroyed, and then the departed is destroyed. Then the unmoving is destroyed, and then the moving is destroyed.

विषधर जीवों से काटे हुए के पास आकर ओषधि विष का प्रभाव नष्ट करती है एवं दूर जाती हुई भी नष्ट करती है. उसे जब उखाड़ते हैं एवं पीसते हैं, तब भी वह विष का प्रभाव नष्ट करती है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
शराः कुशरासो दर्भाः सैर्या उत. मौञ्जा अदृष्टा বৈरिणः सर्वे साकं न्यलिप्त.. (३)

All sharp, pointed, and thorny grasses, including Kusha, Darbha, and Munjja, are like enemies when they are not properly bound or managed.

शर, कुश, दर्भ, सैर्य, मुंज एवं वीरण नामक घासों में छिपे हुए विषधर मुझसे एक साथ लिपट जाते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
नि गावो गोष्ठे असद्गनि मृगासो अविक्षत. नि केतवो जनानां न्यदृष्टा अलिस.. (४)

The cows are not in the cowpen, the deer have not been seen, nor have the people's banners been raised; the bees have not been observed.

Mandala 1 · Verse 5
indrāya nūnam arcatokthāni ca bravītana | sutā amatsur indavo jyeṣṭhaṁ namasyatā sahaḥ

When cows rest in their stalls, deer in their homes, and men, lost in sleep, are devoid of knowledge, then unseen serpents embrace me.

जब गाएं गोशाला में बैठती हैं, हरिण निवासस्थान में बैठते हैं एवं मनुष्य निद्रा के कारण ज्ञानशून्य होते हैं, उस समय अदृष्ट विषधर आकर मुझसे लिपट जाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
एत उ त्ये प्र त्यदृश्न-प्रदोषां तस्करा इव. अदृष्टा विश्वदृष्टा: प्रतिबुद्धा अभूतन.. (६)

These are the ones who, like thieves in the darkness, were unseen. Now, having awakened, they are seen by all.

वे चोरो के समान रात में देखे जाते हैं. वे किसी को दिखाई नहीं देते, पर सारे संसार को देखते रहते हैं. सब लोग उनसे सावधान रहें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
ये अस्या ये अदृग्याः सूचीका ये प्रकडकताः. अदृष्टाः किं चनेह वः सर्वे साकं नि जस्यत.. (७)

Those who are seen and unseen, the pure and the manifest, all of you shall be destroyed together.

जो जंतु स्कंध वाले, अंग वाले, सूची वाले एवं अत्यंत विषधारी हैं, ऐसे अदृष्ट विषधरों का यहां कोई काम नहीं है. तुम सब यहाँ से एक साथ चले जाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
उत्पुरस्तात्सूर्य एति विश्वदृष्टो अदृष्टहा. अदृष्टान्त्सर्वाञ्भयन्त्सवाश्रु यातुधान्यः.. (८)

The sun rises in the east, seen by all, dispelling darkness. Fleeing from the unseen, the night-demons depart with tears.

सारे संसार को देखने वाले एवं अदृष्ट विषधरों को नष्ट करने वाले सूर्य पूर्व दिशा में निकलते हैं. वे सभी अदृष्ट विषधारियों एवं राक्षसों को भयभीत करके भगा देते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
उदपप्तदसौ सूर्यः पुरू विश्वानि जूर्वन्, आदित्यः पर्वतेभ्यो विश्वदृष्टो अदृष्ट्हा.. (९)

The sun, the all-seeing Aditya, has risen from the mountains, illuminating all the worlds.

सारे संसार को देखने वाले एवं अदृष्ट विषधारियों को नष्ट करने वाले सूर्य विषैले जंतुओं को अत्यंत दुर्बल बनाते हुए उद्यगिरि से निकलते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
सूर्य विषमा सजाभि दृष्टि सुरावतो गृहे. सो चिन्गु न मराति नो वयं मरिमारे अस्य योजनं हरिछा मधु त्वा मधुला चकार.. (१०)

The sun, with its uneven gaze, enters the house of the gods. He does not die, nor do we die by his hand; this union of the sun and the earth has been made by the sweet honey.

सुरा बनाने वाला जिस प्रकार चमड़े के पात्र में शराब डालता है, उसी प्रकार मैं विष सूर्य मंडल की ओर फेंकता हूँ. जिस प्रकार सूर्य नहीं मरते, उसी प्रकार हम भी न मरें. घोड़ों द्वारा लाए गए सूर्य दूरवर्ती विष को नष्ट कर देते हैं. हे विष! सूर्य की मधुविद्या तुम्हें अमृत बना देती है. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
इयन्तिका शकुन्तिका सका जघास ते विषम्. सो चिन्गु न मराति नो वयं मरिमारे अस्य योजनं हरिछा मधु त्वा मधुला चकार.. (११)

The little bird, Shakuntika, ate your poison. Therefore, neither she nor we will die, for the honey of Hari has made you sweet.

छोटी सी चिड़िया ने तुम्हारा विष खा लिया और नहीं मरी. उसी प्रकार हम भी नहीं मरेंगे. हे विष! घोड़ों द्वारा गमन करने वाले सूर्य दूर से ही विष को नष्ट कर देते हैं. उनकी मधुविद्या तुम्हें अमृत बना देती है. (११)

Mandala 1 · Verse 12
त्रिः सप्र विष्णुलिङ्का विषस्य पुष्यभक्षन्. ताश्चिणु न मरन्ति नो वयं मरिमारे अस्य योजनं हरिछा मधु त्वा मधुला चकार.. (१२)

The three serpents, nourished by Vishnu's essence, consume poison. They do not die, nor do we. This union of Hari, the honeyed one, has made you sweet.

अग्नि की सातों जिह्वाओं में सफेद, लाल और काले इस प्रकार मिलकर इक्कीस वर्ण पक्षी के रूप में विष का नाश करते हैं, जब वे नहीं मरते तो हम भी नहीं मरेंगे. अपने घोड़ों द्वारा गमनशील सूर्य दूर रखे विष का नाश करते हैं. हे विष! सूर्य की मधुविद्या तुझे अमृत बना देती है. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
नवानां नवतीनां विषस्य रोपुषीणाम्. सर्वासांमगभं नामारे अस्य योजनं हरिछा मधु त्वा मधुला चकार.. (१३)

The Lord Hari, who is the remover of all obstacles, has created this universe, which is filled with the sweetness of all the nine and ninety types of poisons and their antidotes.

निन्यानवे नदियां विष नष्ट करने वाली हैं. मैं सबका नाम पुकारता हूँ, घोड़ों द्वारा चलने वाले सूर्य दूर रखे विष को भी नष्ट कर देते हैं. हे विष! मधु-विद्या तुझे अमृत बना देगी. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
त्रिः सप्र मयूरः सप्र स्वसारो अगुवः. तास्ते विषं वि जभ्रि उदकं कुम्भिनीरिव.. (१४)

The three swift peacocks, along with their sisters, swiftly carried away the poison, just as pitchers carry water.

हे शरीर! जिस प्रकार नारियाँ घड़ों में जल भरकर ले जाती हैं, उसी प्रकार इक्कीस मयूरियां एवं सात नदियां तुम्हारा विष दूर करें। (१४)

Mandala 1 · Verse 15
इत्युक्तकः कृष्मभस्तके भिन्नदयश्मना। ततो विषं प्र वावृते पराचीरनु संवत्ः.. (१५)

The Lord, with a heart softened by these words, then turned away, and the poison of desire began to spread.

हे शरीर! छोटा सा नकुल यदि तुम्हारा विष समाप्त नहीं करेगा तो मैं उसे पत्थर से मार डालूंगा। इस प्रकार विष मेरे शरीर से निकलकर दूर दिशाओं में चला जाए। (१५)

Mandala 1 · Verse 16
कृष्मभस्तदब्रवीद्गिरेः प्रवर्तमानकः: वृश्चिकस्यारसं विषमरसं वृश्चिक ते विषम्.. (१६)

The Scorpion, speaking from the mountain, said, "Scorpion, your venom is bitter and unpleasant."

पर्वत से आने वाले नकुल ने कहा—"बिच्छू का विष बेकार है." हे बिच्छू! तुम्हारा विष प्रभावहीन है। (१६)

Mandala 1 · Verse 17
ka īṣate tujyate ko bibhāya ko maṁsate santam indraṁ ko anti | kas tokāya ka ibhāyota rāye 'dhi bravat tanve3 ko janāya

Mandala 1 · Verse 18
ko agnim īṭṭe haviṣā ghṛtena srucā yajātā ṛtubhir dhruvebhiḥ | kasmai devā ā vahān āśu homa ko maṁsate vītihotraḥ sudevaḥ

Mandala 1 · Verse 19
tvam aṅga pra śaṁsiṣo devaḥ śaviṣṭha martyam | na tvad anyo maghavann asti marḍitendra bravīmi te vacaḥ

Mandala 1 · Verse 20
mā te rādhāṁsi mā ta ūtayo vaso 'smān kadā canā dabhan | viśvā ca na upamimīhi mānuṣa vasūni carṣaṇibhya ā

Mandala 1 · Verse 1
त्वमग्ने शुशुक्षणिस्त्वमदभ्यस्त्वमश्मनस्पतिः त्वं वनेभ्यस्त्वमोषधीभ्यस्त्वं नृणां नृपते जायसे शुचिः.. (१)

You are the brilliant, unassailable fire, the lord of stones, born pure from forests and plants, and the king of men.

हे मनुष्यों के पालक एवं पवित्र अग्नि! तुम यज्ञ के दिन जल, पाषाण, वन एवं औषधियों से दीप्तिशाली रूप में उत्पन्न हो जाओ। (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वाग्ने होत्रं तव पोत्रमृत्वियं तव नेष्टृ त्वमग्निदृत्तायतः त्वं प्रशास्तं त्वमेश्वरीसि ब्रह्मा चासि गृहपतिश्च नो दमे.. (२)

You are the offering, the descendant, the ritual priest, the fire-watcher. You are the ruler, the mistress, the Brahma, and the householder of our home.

हे अग्नि! यज्ञ के होता, पोता, ऋत्विज् और नेष्टा जो कर्म करते हैं, वह तुम्हारा है. तुम आनीघ्र हो. यज्ञ की इच्छा करने पर तुम प्रशास्ता का काम भी करने लगते हो. तुम्ही अध्वर्यु एवं ब्रह्मा हो. मेरे इस यजगृह में तुम्ही गृहपति हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्वमग्ने इन्द्रो वृषभः सतामसि त्वं विष्णुर्वरुणोगायो नमस्यः त्वं ब्रह्मा रयिविद्रब्रह्मणस्पते त्वं विवर्थः सचसे पुरन्ध्या.. (३)

You are Agni, Indra the powerful, Vishnu, Varuna the praiseworthy. You are Brahma, the bestower of wealth, and the lord of Brahman, who accompanies all with wisdom.

हे अग्नि! सज्जनों की मनोकामना पूर्ण करने के कारण तुम इंद्र हो. तुम्ही बहुत से भक्तों द्वारा स्तुत एवं नमस्कार करने योग्य विष्णु हो. तुम मंत्रों के पालक एवं धनों के ज्ञाता ब्रह्मा हो. तुम विविध पदार्थों का निर्माण करते एवं सबकी बुद्धियों में निवास करते हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वमग्ने राजा वरुणो धृतव्रतस्त्वं मित्रो भवसि दस्म ईड्यः त्वमर्यमा सत्यपर्येस्य सम्भुजं त्वमंशो विदेव देव भाजयुः.. (४)

You are Agni, the King, Varuna of steadfast vows; you become Mitra, the wonderful, worthy of praise. You are Aryama, the truthful one, who bestows abundant wealth; you are Ansha, the divine giver, who distributes blessings.

हे अग्नि! तुम व्रतधारी राजा वरुण एवं स्तुतियोग्य शत्रुनाशक मित्र हो. तुम्ही सज्जनों के रक्षक एवं व्यापक दान वाले अर्यमा तथा अंश अर्थात् सूर्य हो. तुम सभी का यज्ञ सफल बनाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वमग्ने त्वष्टा विधते सुवीर्यं तवग्नावो मित्रमहः सजात्यम्. त्वामाशुहेमा रषिरं स्वस्यं त्वं नरा शर्धो असि पुरुवसुः.. (५)

You are Agni, the divine craftsman, bestowing strength and glory. You are the friend of the mighty, of noble birth. You are the swift, golden, and self-sustaining power, the abundant giver of riches.

हे अग्नि! तुम त्वष्टा विश्वकर्मा हो. तुम्हारे यज्ञ में सब प्रकार के धन आदि पदार्थ हैं. तुम ही सब के मित्र हो. तुम ही सब के स्वामी हो. तुम ही सब के रक्षक हो. तुम ही सब के धनवान हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वमग्ने रुद्रो असुरो महो दिवस्त्वं शर्धो मारुतं पृष्ठ ईशिषे. त्वं वातैररुणांयसि शडगयस्त्वं पृषा विधातः पासि नु त्वम्ना.. (६)

You are Agni, Rudra, the mighty Asura of heaven, and you rule the Maruts' strength. You drive the winds, O Shadaṅga, and you, O Pṛṣā, protect us.

हे अग्नि! तुम विस्तृत आकाश में वर्तमान रुद्र हो. तुम्ही मरुतों के बल एवं अन्न के स्वामी हो. तुम वायु के समान वेगशाली लाल घोड़ों द्वारा सुखपूर्वक जाते हो. तुम पूषा हो, इसलिए यज्ञ करने वालों की अपने आप रक्षा करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्वमग्ने द्रविणोदा अरडकृते त्वं देवः सविता रत्नधा असि. त्वं भगो नृपते वस्व ईशिषे त्वं पायुर्दमे यस्तैऽविधत्.. (७)

You, O Agni, are the giver of wealth and the sustainer of all. You, O Savitr, are the divine bestower of precious gifts. You, O Bhaga, are the lord of riches, and the protector of those who worship you.

हे अग्नि! तुम पर्याप्त यज्ञकर्म करने वाले यजमान को स्वर्ण देने वाले हो. तुम्ही रत्न धारण करने वाले तेजस्वी सविता हो. हे मनुष्यों के पालनकर्ता अग्नि! जो तुम्हारी सेवा करते हैं, उन्हें तुम धन देते हो. यज्ञशाला में जो यजमान तुम्हारी सेवा करता है, उसका तुम पालन करते हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
त्वामग्ने दम आ विशपत्तिं विशस्तkwargs राजानं सुविद्रमूज्जते. त्वं विश्वानि स्वनीक पत्यसे त्वं सहस्राणि शता दश प्रति.. (८)

O Agni, enter our home as the protector of the people, the king of the sacrifice, and the bestower of wealth. You rule over all, O brilliant one, and you command thousands and hundreds.

हे अग्नि! तुम यजमानों के पालनकर्ता हो. वे तुम्हें अपने घर में प्रकाशमान एवं अनुकूल चेतना वाला पाकर सुशोभित करते हैं. हे उत्तम सेवा वाले एवं समस्त द्रव्यों के स्वामी अग्नि! तुम हजारों, सैकड़ों और दसियों प्रकार के फल लोगों को देते हो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वामग्ने पितरमिष्ठिभिनरस्त्वां भ्रात्राया शम्या तनूनरुम्. त्वं पुत्रो भवसि यस्तैऽविधत्त्वं सखा सुशेवः पास्यायुषः.. (९)

O Agni, you are the father in sacrifices, the brother in the assembly, and the son who honors you. You are a benevolent friend, protecting our lives.

हे अग्नि! तुम्हें पिता समझकर लोग यज्ञ द्वारा तृप्त करते हैं. तुम्हारा भ्रातृप्रेम पाने के लिए लोग यज्ञों द्वारा तुम्हें प्रसन्न करते हैं. जो तुम्हारी सेवा करते हैं, तुम उनके पुत्र, सखा, कल्याणकर्ता एवं शत्रुनाशक बनकर उनकी रक्षा करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
त्वमग्ने ऋभुराके नमस्यश्वं वाजस्य क्षुमतो राय ईशिषे. त्वं वि भास्यनु दक्षि दावने त्वं विशिश्धुरसि यज्मऽऽतनिः.. (१०)

O Agni, you are the powerful one, worthy of worship, who rules over abundant wealth and sustenance. You shine forth, bestowing gifts, and are the most excellent and praiseworthy one to be invoked in sacrifice.

हे अग्नि! तुम सम्मुख स्तुति करने योग्य ऋभु हो. तुम सर्वत्र प्रसिद्ध धन एवं अन्न के स्वामी हो. तुम उज्ज्वल हो एवं अंधकार मिटाने के लिए लकड़ियों को धीरेधीरे जलाते हो. तुम यज्ञ की विशेष शिक्षा देने वाले एवं फल का विस्तार करने वाले हो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
त्वमग्ने अदितिर्देव दाशुषे त्वं होता भारती वर्धसे गिरा। त्वमिल्ला शतमहिंासि দক্ষसे त्वं वृत्रहा वसुपते सरस्वति.. (११)

O Agni, you are Aditi, the divine giver to the worshipper; you are the Hotri, the priest, and Bharati, growing with praise. You are Ilā, the protector of hundreds of sacrifices, and Sarasvati, the lord of wealth, the slayer of Vṛtra.

हे अग्नि देव! तुम हव्यदाता के लिए अदिति हो, तुम होता, भारती एवं स्तुतियों से बढ़ने वाले हो। भारतीय एवं स्तुतियों से बढ़ने वाले हो। तुम अपरिमित कालों वाली भूमि एवं धनदान करने में समर्थ हो। हे धन के पालक तुम ही वृत्रहंता एवं सरस्वती हो। (११)

Mandala 1 · Verse 12
त्वमग्ने सुभृतं उत्तमं वयस्तव स्पार्ह वर्ण आ सन्दृशि श्रियः। त्वां वाजः प्रतरणो बृहन्सि त्वं रयिर्बहुलो विश्वस्पृथुः.. (१२)

You, O Agni, are perfectly sustained, of supreme radiance, and worthy of admiration for your splendor. You are the abundant and vast nourishment, the wealth that encompasses all.

हे अग्नि! सुभृत उत्तम वय वाले हो। तुम ही वाक् के प्रदाता, धन के प्रदाता एवं विश्व को व्याप्त करने वाले हो।

Mandala 1 · Verse 1
यज्ञेन वर्धत जातवेदसमग्निं यजध्वं हविषा तना गिरा। समियधं सुप्रयसं स्वर्णं घुक्षं होतारं वृजनेषु धूष्दम्.. (१)

Worship the ever-increasing Agni, the knower of all births, with sacrifice, offerings, and hymns. Adore this brilliant, all-pervading, and all-sustaining divine fire, the priest of the sacrifice.

हे ऋत्विजो! सभी उत्पन्न पदार्थों को जानने वाले अग्नि को यज्ञ के द्वारा बढ़ाओ तथा हव्य एवं विस्तृत स्तुतियों द्वारा उनकी पूजा करो. अग्नि प्रज्वलित, शोभन अन्न युक्त, यजमान को स्वर्ग में ले जाने वाले, दीप्त, यज्ञपूर्ण करने वाले एवं बल प्रदान करने वाले हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अभि त्वा नक्तीरुपसो ववाशिरेडग्ने वत्सं न स्वसरेषु धेनवः। दिवस्वेददतिर्मनुषा युगा क्षपो भासि पुरवारं संयतः.. (२)

O Agni, the nights and dawns have desired you, as cows desire their calf in the seasons. You are the nourisher of all, the one who illuminates the ages and the nights, controlled and powerful.

हे अग्नि! गाएं जिस प्रकार दिन में बछड़े की इच्छा करती हैं, उसी प्रकार यजमान तुम्हें रात और दिन चाहते हैं. हे सर्वप्रिय! तुम संयमशील रूप में स्वर्ग में व्याप्त हो, मनुष्यों के यज्ञों में निवास करते हो एवं रात में प्रकाशित होते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
तं देवा बुधे रजसः सुदंससं दिवस्पृथिव्योररतिं न्यरिरे। रथमिब वेदां शुक्रशोचिषमग्निं मित्रं न क्षितिषु प्रशस्यम्.. (३)

The gods have placed Him, the radiant and powerful, the sustainer of heaven and earth, like a chariot of knowledge, brilliant and praised among mortals, as Agni, the friend.

देवता लोग यज्ञ के मध्य भाग में स्थापित, सुदर्शन, धरती-आकाश के ईश्वर, धनपूर्ण रथ के समान दीप्तवर्ण, मित्र के समान कार्यसाधक एवं प्रशंशित अग्नि की स्तुति करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
तमुक्षमाणं रजसि स्व आ दमे चन्द्रमिव सुरुचं हार आ दधुः। पृश्न्याः पतरं चितयन्तम्क्षभिः पाथो न पायुं जनसी उभे अनु.. (४)

Adorning him, who shone brightly like the moon in his own dwelling, with garlands, they placed him, the protector of the earth, as a guardian for both worlds.

पुष्यः पतरं चितयन्तम्क्षभिः पाथो न पायुं जनसी उभे अनु.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
स होता विश्वं परि भूत्वध्वरं तमु इव्यैमनुष ऋज्ज्ते गिरा। हिरिशिश्रो वृषसानासु जभ्रदंष्ट्रं स्तृभिभ्रत्यद्रोदसी अनु.. (५)

He is the priest who encompasses the sacrifice, whom the wise praise with hymns. He, the radiant, the powerful, with sharp teeth, upholds the earth and sky.

वे होम पूर्ण करने वाले अग्नि समस्त यज्ञों को चारों ओर से व्याप्त करें. मनुष्य द्रव्य और स्तुतियों द्वारा उसी अग्नि को सुशोभित करते हैं. जिस प्रकार तारागण आकाश को प्रकाशित करते हैं, उसी प्रकार दीप्त शिखाओं वाले अग्नि बढ़ती हुई औषधियों में बार-बार जलकर धरती और आकाश के मध्य भाग को प्रकाशित करते हैं. (५)


Mandala 1 · Verse 6
स नः रेवत्सम fiind: स्वस्तये सन्ददस्वान्णयिमस्मासु दीदिहि। आ नः कृणुष्व सुविताय रोदसी अग्ने हव्या मनुषो देव वीतये.. (६)

O Agni, bestower of wealth, grant us prosperity and well-being. Shine brightly within us, and bring us to auspiciousness, O divine messenger, for the acceptance of our offerings.

हे अग्नि! तुम हमारे कल्याण के लिए अविनाशी एवं वृद्धिशील धन देते हुए प्रज्वलित होकर प्रकाश फैलाओ तथा आकाश को हमारे लिए फलदाता बनाओ. तुम मेरे यजमान द्वारा दिया द्रव्य देवों के भक्षण के लिए ले जाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
दा नो अग्ने बृहतो दा: सहस्सिणो दुगे न वां श्रुत्या अपां वृधि। प्राचीं द्यावापृथिवीं बह्मणा कृष्व स्वर्णं शुक्रमुषसो वि दिद्युतः.. (७)

O mighty Agni, grant us strength and sustenance. May your divine word, like a swift chariot, carry us through difficulties. Illuminate the heavens and earth with your brilliance, and let the dawn shine forth with golden splendor.

हे अग्नि हमें पर्याप्त गौ, अश्व तथा हजारों पुत्र-पौत्र प्रदान करो. हमारी कीर्ति के लिए अन्न प्राप्ति का द्वार खोलो. हमारे उत्तम यज के कारण धरती और आकाश को हमारे अनुकूल बनाओ. सूर्य जिस प्रकार संसार को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार उषार्एं तुम्हें प्रकाशित करें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
स इधाय उषसो राम्पा अनु स्वर्णं दीददेरूपेण भानुना। होत्राभिरग्निर्मनुषः स्वधरो राजा विशामतिथिश्रृणरायवे.. (८)

The radiant Agni, like the dawn, shines forth with golden brilliance, a guest honored by all, the king of men and their offerings.

अग्नि रमणीय उषकाल में जलते हैं और अपनी उज्ज्वल किरणों से सूर्य के समान चमकते हैं. वे अग्नि होता की यज साधनरूप स्तुतियों के आधार, उत्तम यज वाले, प्रजाओं के स्वामी होकर यजमान के पास इस प्रकार आते हैं, जैसे प्यारा अतिथि आता है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
एवा नो अग्ने अमृतोष् पूर्वं धीष्पीपाय बृहदिवेषु मानुषा। दुहाना धेनुर्वृष्णेषु कारवे त्वना शतिं पुरुष्पमिष्णि.. (९)

O Agni, immortal and radiant, may our thoughts, like a nourishing cow, yield abundant sustenance for the devoted seeker.

हे अमितप्रभा युक्त एवं देवों के पूर्ववर्ती अग्नि! मनुष्यों में हमारी स्तुति तुम्हें तृप्त करती है. जिस प्रकार दुधारू गाय यज के स्तोता को दूध देती है, उसी प्रकार तुम्हारी स्तुति असंख्य धन देती है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
वयमग्ने अवर्ता वा सुवीर्ये बह्मणा वा चितयेमा जनां अति। अस्माकं ह्यममधि पञ्च कृष्षिष्चा स्वर्णं शुशुचीतं दुष्टम्.. (१०)

O Agni, may we, through your strength and divine knowledge, transcend all human limitations. For you, we have cultivated five fields, and a radiant, pure spirit shines forth.

हे अग्नि! हम तुम्हारे दिए हुए अन्न, अश्व आदि से शोभन सामर्थ्य प्राप्त करके सबसे श्रेष्ठ बन जाएंगे. इससे वह हमारा अनंत धन ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, निषाद पांच जातियों के ऊपर प्रकाशित होगा जो दूसरों को प्राप्त होना कठिन है. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
समिद्धोऽग्निर्निहितः पृथिव्यां प्रत्यङ्ङ्विश्वानि भुवनन्यस्थात्. होता पावकः प्रदिवः सुमेधा देवो देवान्यजत्वग्निर्हन्.. (१)

The awakened fire, established on earth, illuminates all worlds. May the divine, pure, and wise Agni, the priest, offer oblations to the gods.

वेदी पर रखे हुए प्रज्वलित अग्नि समस्त प्राणियों के सामने स्थित हैं. होम निष्पादक, शुद्धिकर्ता, पुराने, शोभन बुद्धि वाले, प्रकाशमान एवं यज्ञ के योग्य अग्नि देवों का आदर करें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
नराशंसः प्रति धामान्यञ्जन् तिग्मं तिग्मं स्वर्चिः. घृतपुषा मनसा हव्यमुन्मुधं-न्यजस्य समनक्तु देवान्.. (२)

May the radiant, sharp light, smeared with ghee and mind, anoint the gods with the offering.

मनुष्यों द्वारा स्तुति के योग्य एवं सुंदर ज्वालाओं वाले अग्नि अपनी महिमा से प्रत्येक यज्ञस्थल एवं तीनों प्रकाशित लोकों को प्रकट करते हैं. वे घी बरसाने की अभिलाषा से हव्य को चिकना करते हुए यज्ञ के उच्च भाग में देवों को तृप्त करें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
ईळितोऽग्ने मनसा नो अर्हन्देवा-न्यक्षि मानुषत्पूर्वो अध. स आ वह मरुतां शर्धां अच्युतमिन्द्रं नरो बर्हिषदं यजध्वम्.. (३)

O Agni, worthy of praise, accept our offerings and be our divine guest. Bring forth the Maruts and the steadfast Indra, O men, and worship them seated on the sacred grass.

हे हमारे द्वारा स्तुत अग्नि! हम पर प्रसन्न होकर यज्ञ के योग्य बनो एवं आज मनुष्यों से पहले ही देवों के निमित्त यज्ञ करो. हे ऋत्विजों! मरुतों की शक्ति से युक्त अच्युत इंद्र को बुलाओ एवं कुश पर स्थित इंद्र को लक्ष्य करके हवन करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
साकं हि शुचिना शुचिः प्रशास्ता ऋतजनानि. विद्वां अस्य व्रता ध्रुवा वयाइवानु रोहते.. (४)

The pure one, along with the pure, becomes the ruler of righteous deeds, and like a bird, the wise one ascends with unwavering vows.

शुद्ध प्रशास्ता नामक अग्नि शुद्ध यज्ञ के ही साथ उत्पन्न हुए थे, जिस प्रकार पक्षी फल पाने के लिए एक शाखा से दूसरी शाखा पर जाता है, उसी प्रकार यजमान अग्नि संबंधी यज्ञों को निश्चित फलदायक जानकर बार-बार करता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ता अस्य वर्णमायुवो नेष्टृःसञ्चन्त धेनवः. कुवितिस्चभ्य आ वरं स्वसारो या इदं ययुः.. (५)

The cows, like the seasons, move with the divine will, bringing forth abundance. The sisters, who have attained this, have brought forth the best.

यज्ञकर्म करने वाली उंगलियां गायों के समान नेष्टा नामक अग्नि की सेवा करती हैं. वे ही अग्नि के गार्हपत्य आदि तीन रूपों की भी सेवा करती हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यदी मातृरूपं स्वसा घृतं भर्न्त्यस्थिते. तासामधर्युरागतौ यवो वृहीव मोदते.. (६)

When the sister, like a mother, offers ghee, the younger brother rejoices like barley and rice.

यदि मातृरूप स्वसा घृतं भर्न्त्यस्थिते. तासामधर्युरागतौ यवो वृहीव मोदते.. (६)

Mandala 1 · Verse 1
इमाम् मे अग्ने समिधमिमामुपसदं वनेः. इमा उ षु श्रुधी गिरः.. (१)

O Agni, accept this offering of fuel and this approach. Hear these hymns.

हे अग्नि! यज्ञ में दी गई मेरी समिधा तथा आहुति का उपभोग करो एवं मेरी स्तुतियां सुनो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अया ते अग्ने विधेमोर्जो नपादृष्मि. एना सूक्तेन सुजात्.. (२)

O Agni, son of energy, we worship you with this hymn, seeking your strength and favor.

हे अग्नि! इस आहुति के द्वारा हम तुम्हारी सेवा करेंगे. हे बल के नाती, विस्तृत यज्ञ के स्वामी एवं सुंदर जन्म वाले अग्नि! इस सुंदर स्तुति द्वारा हम तुम्हें प्रसन्न करेंगे. (२)

Mandala 1 · Verse 3
तं त्वा गीर्भिर्विप्रणसं द्रविणोदः. सपर्यंम सपर्यवः.. (३)

We worship You, O giver of wealth, with hymns and praise, O most excellent one.

हे धनदाता, स्तुति योग्य एवं हवि के अभिलाषी अग्नि! हम तुम्हारे सेवक बनकर स्तुतियों द्वारा तुम्हें प्रसन्न करेंगे. (३)

Mandala 1 · Verse 4
स बोधि सूरिर्मधवा वसुपते वसुदावन्. युयोध्यस्मद् द्वेषांसि.. (४)

O Madhava, lord of wealth and bestower of riches, you are the wise one who grants enlightenment. Please destroy our hatreds.

हे धनस्वामी, विद्वान् एवं धनदाता अग्नि! हमारी स्तुति जानकर हमारे शत्रुओं को भगाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
स नो वृष्टिं दिवसपरि स नो वाजमर्णोणम्. स नः सहस्रिणोरिषः.. (५)

May He bestow upon us rain, sustenance, and abundant nourishment.

वे ही अग्नि हमारे कल्याण के लिए आकाश से वर्षा करते हैं एवं पर्याप्त बल तथा हजारों प्रकार के अन्न देते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
ईळनायावस्ये यविष्ठ दूत नो गिरा. यजिष्ठ होतरा गहि.. (६)

O Agni, most youthful and worthy of praise, come to us with your hymns, O most devoted priest.

हे अतिशय तरुण, देवदूत एवं यज्ञ के परम योग्य अग्नि! मेरी स्तुति सुनकर आओ एवं अपने पूजक मुझको अपना आश्रय दो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
श्रेष्ठं यविष्ठ भारतो घृणन्मा भर. वसो पुरुस्पृहं रयिम्.. (१)

O best among the young, O Bharata, do not be angry; bring us abundant wealth.

हे अतिशय तरुण, ऋत्विजों के संबंधी एवं व्याप्त अग्नि! हमें अति प्रशंसनीय, तेजस्वी एवं बहुत से याचकों द्वारा मांगा गया धन प्रदान करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
मा नो अरातीरिशत देवस्य मत्स्यस्य च. पर्षि तस्या उत्त द्विषः.. (२)

May no enemy harm us, nor the envious. Protect us from their hatred.

हे अग्नि! हमें मनुष्यों एवं देवों की शत्रुता हरा न सके. हमें इन दोनों प्रकार के शत्रुओं से बचाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
विश्वा उत त्वया वयं धारा उदन्वाइव. अति गाहेमहि द्विषः.. (३)

May we, like waves in the ocean, overcome all our enemies through You.

हे अग्नि! तुम्हारी कृपा से हम सभी शत्रुओं को जल की धारा के समान लांघ जाएंगे.

Mandala 1 · Verse 4
शुचिः पावक वन्चोऽग्ने बृहद्धि रोचसे. त्वं घृतेभिराहुतः.. (४)

O Agni, pure and radiant, you shine brightly when offered oblations of ghee.

हे शुद्ध, पवित्र करने वाले एवं वंदनीय अग्नि! तुम घृत द्वारा बुलाए गए हो और अत्यंत प्रकाशित हो रहे हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वं नो असि भारतोऽग्ने वशाभिरुक्षभिः. अष्टापदीभिराहुतः.. (५)

O Agni, son of Bharata, you are indeed our refuge, invoked with cows and bulls, and offered oblations.

हे ऋत्विजों का भरण करने वाले अग्नि! तुम हमारे हो. तुम बांधा गायों, बैलों एवं गर्भिणी गायों द्वारा बुलाए गए हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
द्रवचः सर्पिरासुतिः प्रन्नो होता वरेण्यः सहससपुत्रो अद्भुत:..(६)

The divine offering, like flowing ghee, is accepted by the worthy priest, the son of strength, who is wondrous.

समिधाओं को भक्षण करने वाले एवं घृत से सिंचे हुए, पुरातन होम पूरा करने वाले, वर्ण करने योग्य एवं शक्ति से उत्पन्न अग्नि परम विचित्र हैं.(६)

Mandala 1 · Verse 7
हरी नु त इन्द्रं वाजयन्ता घृतश्रुतं स्वार्मस्वा. वि समना भूमिरप्रथistarst पर्वताश्चश्रिष्यन्.. (७)

The gods, desiring victory, praise Indra, the drinker of ghee. The earth, with its mountains, expanded widely, united in purpose.

हे इंद्र! शीघ्रगति से चलने वाले तुम्हारे घोड़े जल बरसाने वाले बादल के समान गरजते हैं. समतल धरती प्रसन्न हुई. बादल भी इधर-उधर घूमता हुआ प्रसन्न हुआ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
नि पर्वतः सायुच्छच्छन्न्सं मातृभिविविशानो अक्रान्. दूरे पारे वाणी वर्धयन्त इन्द्रेषितां धमनं प्रपप्रन्नि.. (८)

The divine voice, inspired by Indra, expands and flows, traversing beyond the distant mountains.

वर्षा करने में सावधान बादल आकाश में आया एवं मातास्वरूप जल के कारण बार-बार गरजता हुआ इधर-उधर घूमने लगा. आकाश में दूर-दूर तक शब्द को बढ़ाने वाले मरुतों ने इंद्र द्वारा प्रेरित उस ध्वनि को अच्छी तरह फैला दिया. (८)

Mandala 1 · Verse 9
इन्द्रो महा सिन्धुमाशयानिं मायाविनं वृत्रमस्फुरिः. अरेजेतां रोदसीं भियाने कनिक्रदतो वृष्णो अस्य वज्रात्.. (९)

Indra, the mighty, struck the illusory Vritra, the great serpent. The heavens and earth trembled in fear of his thunderbolt.

इन्द्रों महा सिन्धुमाशयानिं मायाविनं वृत्रमस्फुरिः. अरेजेतां रोदसीं भियाने कनिक्रदतो वृष्णो अस्य वज्रात्.. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अरोरवीदृष्पो अस्य वज्रोऽमानुषं यन्मानुषो निजुर्वति. नि मायिनो दानवस्य माया अपादयत्पपिन्न्त्सुतस्य.. (१०)

The thunderbolt, divine and beyond human comprehension, struck the sorcerer's son, destroying his illusions.

जब मानवहितैषी इंद्र ने मानवविरोधी वृत्र को मारने की उत्कृष्ट अभिलाषा की, उस समय कामवर्षक इंद्र के वज्र ने बार-बार शब्द किया था. निचोड़े हुए सोम को पीकर इंद्र ने मायावी वृत्र की सब माया समाप्त कर दी. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
यो जात् एव प्रथमो मनस्वान्देवो देवान्क्रतुना पर्यभूषत्, यस्य शुष्माद्रोदसी अभ्यसेतां नृण्यस्य महा स जनास इन्द्रः.. (१)

He who, from his very birth, was the first intelligent deity, who by his might surpassed all gods, and whose greatness made the earth and sky tremble, he is Indra, the great one among men.

हे मनुष्यो! जिसने उत्पन्न होते ही देवों एवं मनुष्यों में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपने वीर कर्म से देवों को विभूषित किया था, जिसके बल से धरती और आकाश डर गए थे और जो विशाल सेना के नायक थे, वही इंद्र हैं। (१)


Mandala 1 · Verse 2
यः पृथिवीं व्यथमानांदृढहः पर्वतान्प्रकुपिताँ अरम्णात्। योऽन्तरिक्षं विममेवरीयो यो घामस्तम्भात्स जनास इन्द्रः.. (२)

He who firmly held the trembling earth, calmed the agitated mountains, measured the vast sky, and supports the heavens – that is Indra, O people.

जिसने काँपती हुई पृथ्वी को दृढ़ किया, उग्र पर्वतों को शांत किया, जिसने अन्तरिक्ष को विस्तृत किया और जिसने प्रकाश को थामा, वही मनुष्य इन्द्र है। (२)

Mandala 1 · Verse 3
यो हत्वाऽहिमरिणात्सप्त सिन्धून्यो गा उदाजपघा वलस्य. योऽश्मनोरन्तग्निं जजान संवृक्समत्सु स जनास इन्द्रः.. (३)

He who slew the serpent, freed the seven rivers, and drove forth the cows of Vala, and who generated fire between two stones, that Indra is the hero among men.

जिसने वृत्र नामक असुर को मारकर सात नदियों को बहाया, जिसने बल असुर द्वारा रोकी गई गायों को स्वतंत्र किया, जिसने दो बादलों के घर्षण से बिजली रूपी अग्नि को उत्पन्न किया एवं जो युद्धस्थल में शत्रुओं का विनाश करता है, वही इंद्र है। (३)

Mandala 1 · Verse 4
येनेमा विश्वा च्यवना कृतानि यो दासं वर्णमधरं गुहाकः. श्रुजीवं यो जिगीवाँ लक्ष्मादददः पुष्टानि स जनास इन्द्रः.. (४)

He who created these moving worlds, who made the dark-skinned servant inferior, who, by his strength, bestowed nourishment and victory, He is that Indra, the Lord of all beings.

जिसने इन सब चंचल लोकों को बनाया है और जिसने विनाशक असुर को अंधेरी गुहा में बंद किया, जिस प्रकार बहेलिया मारे हुए पशु को ले जाता है, उसी प्रकार जो जीते हुए शत्रु का सब धन अधिकार में कर लेता है, वही इंद्र है। (४)

Mandala 1 · Verse 5
यं पृच्छन्ति कुछ सेति घोरमुतेमाहुर्बो अस्तीत्येनम्. सोऽर्यः पृथ्वीविजडवा मिनाति श्रद्धस्मं धत स जनास इन्द्रः.. (५)

He whom they ask, "Who is the great one?" and who replies, "I am," is the one who measures the earth and sky; he is the wise Indra, whom the people worship with faith.

जो पूछते हैं कि वह कहाँ है? जिसके विषय में लोग कहते हैं कि वह नहीं है, जो शत्रु की संपत्ति को नष्ट करता है, वही इंद्र है। उनके प्रति श्रद्धा करो। (५)

Mandala 1 · Verse 6
यो रथस्य चोदिता यः कृशस्य यो ब्रह्मणो नाथमानस्य कीरेः. युक्त्रावृणो योऽविता सुशिप्रः सुतसोमस्य स जनास इन्द्रः.. (६)

He who drives the chariot, the strong, the lord of the Brahmins, the singer, the protector of the yoked, the beautiful-jawed, the preserver of the Soma-presser, He is Indra, the people's god.

हे मनुष्यो! जो संपन्न व्यक्ति को धन देता है, जो दीनदुर्बल अथवा प्रार्थना करते हुए स्तोता को धन प्रदान करता है, जो शोभन हणु वाला, हाथ में पत्थर धारण करने वाले तथा सोम निचोड़ने वाले यजमान की रक्षा करता है, वही इंद्र हैं। (६)

Mandala 1 · Verse 7
यस्याश्वासः प्रदिशि यस्य गावो यस्य विश्शे रथासः. यः सूर्य य उषसं जजान यो अपां नेता स जनास इन्द्रः.. (७)

He whose breath is in every direction, whose are the cows, whose are the chariots, who begot the sun and dawn, and who is the leader of the waters – that is Indra.

जिसके श्वास हैं, जो दिशाओं का शासक है, जिसकी गायें हैं, जिसके रथ हैं, जिसने सूर्य और उषा को उत्पन्न किया और जो जल का नेता है, वही इंद्र है। (७)

Mandala 1 · Verse 8
यं क्रन्दसी संयती विह्ययेते परेश्वर उभाय अमित्रः। समानं चिद्रथमास्थिवानाना हवते स जनास इन्द्रः.. (८)

The Lord, whom the heavens and earth, united, praise, and who is the friend of all, is invoked by the people, riding in the chariot of consciousness.

हे मनुष्यो! शब्द करती हुई दो विरोधी सेनाएं, श्रेष्ठ एवं निम्न दोनों प्रकार के शत्रु एवं एक ही प्रकार के दो रथों पर बैठे हुए लोग जिसे अपनी सहायता के लिए बुलाते हैं, वही इंद्र है। (८)

Mandala 1 · Verse 9
यस्मान् ऋते विजयन्ते जनासो यं युध्यमाना अवसे हवन्ते. यो विश्वस्य प्रतिमानं बभूव यो अच्युतव्युत्स् जनास इन्द्रः.. (९)

He from whom people, victorious, derive strength, and whom, fighting, they invoke for protection. He who has become the image of the universe, the unshakeable, is Indra.

हे मनुष्यो! जिसकी सहायता के बिना लोगों को विजय नहीं मिलती, युद्ध करते हुए लोग जिसे अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं, जो संसार के प्रतिनिधि बने थे एवं स्थिर पर्वत आदि को भी चंचल कर देते हैं, वही इंद्र है। (९)


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Amaranath Amar


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